
इस चमत्कारी फल के सेवन से पाएं पुन: जवानी
नोएडा. अक्षय नवमी भगवान विष्णु के पूजन का विशेष दिन है। कहते हैं कि इस दिन किया गया जप, तप और दान आदि व्यक्तिक को सभी पापों से मुक्ति दिला देता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को अक्षय नवमी केे साथ आरोग्य नवमी, कूष्मांड नवमी और आंवला नवमी के नाम से भी जानते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व 17 नवंबर की थी। बता दें कि आयुर्वेद में आंवला को चमत्कारी औषधि माना गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित चंद्रशेखर शर्मा बताते हैं कि इसकी उत्पत्ति ब्रह्मा जी के आंसुओं से हुई थी। उस समय पृथ्वी का कोई वजूद नहीं था और चारों ओर जल ही जल था। उस समय ब्रह्मा जी कमल पुष्प पर बैठकर तप कर रहे थे। प्रभु प्रेम में उनकी आंखों से आंसू टपके और आंवला उत्पन्न हुआ।
ज्योतिषाचार्य पंडित चंद्रशेखर शर्मा कहते हैं कि आंवला नवमी के दिन पूजा-पाठ के साथ दान करने से इस जन्म के साथ ही अगले कई जन्म सुधर जाते हैं। पंडित जी कहते हैं कि आंवला नवमी के दिन सबसे पहले स्नान के बाद पूजन, तर्पण और अन्नदान करने का बहुत बड़ा महत्व है। इस दिन किया गया पूजन और दान व्यक्ति को सभी पापों से मुक्त करता है। साथ ही सभी इच्छाएं भी पूरी हो जाती है। वे बताते हैं कि ऐसा माना जाता है कि सतयुग का आरंभ भी इसी दिन हुआ था। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने का विधान है। वे कहते हैं कि आंवले के वृक्ष में सभी देवी-देवताओं का निवास होता है तथा यह फल भगवान विष्णु को भी अति प्रिय है।
वहीं चरक संहिता में कहा गया है कि आंवला नवमी को महर्षि च्यवन ने आंवले का सेवन किया था। इससे उन्हें पुन: जवानी यानी नवयौवन की प्राप्ति हुई थी। शास्त्रों के अनुसार आज के दिन आंवले का सेवन करने से नवयौवन की प्राप्ति की जा सकती है। आंवले का रस रोजाना पीने से पुण्यों में बढ़ोतरी के साथ पापों से छुटकारा मिल जाता है। बताया जाता है कि आंवले खाने या उसका रस पीने के 2 घंटे बाद तक दूध का सेवन नहीं करना चाहिए।
Published on:
18 Nov 2018 10:11 am
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