बीजेपी और सपा एक रणनीति के तहत उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे को दुश्मन नम्बर वन बता रहे थे। दोनों को ही इसका लाभ भी मिलता दिख रहा था और दोनों पार्टियों ने यह सन्देश देने में सफलता पा ली थी कि रेस में वही दोनों हैं। इसका सीधा लाभ यह होना था कि चुनाव के दौरान ब्राह्मण वोट बैंक न बिखरता, जो उम्मीद के अनुरूप भाजपा को मिलता। वहीं, मुस्लिम भी अपना वोट मायावती को देकर खराब नहीं करता और वह वोट अन्य विकल्प न होने पर सीधा समाजवादी पार्टी को मिलता। समीकरण को ध्यान में रखते हुए यह मुद्दा खत्म करने में ही सपा को फायदा होने की उम्मीद दिख रही है इसलिए माना जा रहा है कि यूपी सरकार इस मामले पर कड़ा स्टैंड ले सकती है। हालांकि, बीजेपी से निष्कासित नेता दयाशंकर सिंह के खिलाफ लखनऊ में SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जा चुका है, लेकिन बसपा के बढ़ते विरोध के बीच उसे गिरफ्तार भी किया जा सकता है।