21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भाजपा नेता की मायावती पर टिप्पणी बड़ी चूक, चुनाव में हो सकता है बड़ा नुकसान

भाजपा ने बसपा को दिया जीवनदान, गिरफ्तार किए जा सकते हैं दयाशंकर सिंह, यूपी सरकार भी ले सकती है इस मामले पर कड़ा स्टैंड

3 min read
Google source verification

image

sharad asthana

Jul 21, 2016

Mayawati,

Mayawati,

नई दिल्ली/नोएडा।
बसपा नेत्री मायावती पर अभद्र टिप्पणी भाजपा को भारी पड़ सकती है। ऐसे समय में जब भाजपा दलितों को अपने साथ जोड़ने की भरसक कोशिश कर रही है, ऐसा बयान पार्टी की कोशिशों पर पानी फेरने वाला है। बसपा इस मुद्दे को भुनाने में कोई कमी नहीं रखेगी। गुजरात में हुई दलित राजनीति का सीधा फायदा यूपी में मायावती को भी मिलेगा, यह तय माना जा रहा है।


भाजपा के एक वरिष्ठ केंद्रीय नेता ने पत्रिका को बताया कि बसपा आज तक के अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही थी। लोकसभा चुनाव में उसे एक भी सीट नहीं मिली थी। पार्टी का मत प्रतिशत भी रिकॉर्ड स्तर तक नीचे चला गया है। प्रदेश के विधानसभा चुनाव के दौरान उसके एक-एक कर बड़े नेता मायावती का साथ छोड़कर जा रहे हैं। इससे मायावती और बहुजन समाज पार्टी का मनोबल टूटता जा रहा था लेकिन भाजपा नेता के एक अभद्र बयान से पार्टी को नया जीवन मिलता दिख रहा है।


बसपा को मिला मुद्दा


भाजपा नेता ने बताया कि जिस समय संसद सत्र चल रहा हो और गुजरात मामले पर खुद गृहमंत्री को सफाई देनी पड़ रही हो, उस समय किसी नेता का ऐसा बयान पार्टी की फजीहत कराने वाला ही हो सकता था और इस मामले में वही हुआ। भाजपा नेता ने कहा कि बसपा को यह एक मुद्दा मिल गया है, जिसके सहारे वह खुद को यूपी चुनाव के लिए तैयार करेगी।


केंद्रीय नेताओं को नुकसान का एहसास


भाजपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी को इस बयान से होने वाले नुकसान का अंदाजा है, इसीलिए बिना देर किए केंद्रीय वित्त मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने राज्यसभा में इस मामले पर माफ़ी भी मांग ली। जेटली के माफी मांगने तक खुद दयाशंकर सिंह को भी अपनी भारी गलती का एहसास हो चुका था। यही कारण है कि उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस मुद्दे पर न सिर्फ मायावती से माफी मांगी, बल्कि मायावती की सन्तुष्टि के लिए खुद को गिरफ्तार होने के लिए तैयार भी बता दिया। लेकिन पार्टी नेताओं को इस बात का एहसास है कि मामला आगे बढ़ चुका है और अब इसकी भरपाई कर पाना मुश्किल है। फिलहाल पार्टी ने मामला ठंडा करने के लिए ही न सिर्फ दयाशंकर को पद से हटाया बल्कि उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से भी निकाल दिया।


बिहार चुनाव जैसी बड़ी गलती तो नहीं!

दयाशंकर सिंह के बयान को पार्टी बिहार चुनाव के दौरान मोहन भागवत के आरक्षण संबन्धी बयान से जोड़कर देख रही है। बिहार विधानसभा चुनाव में जिस समय भाजपा मजबूती के साथ आगे बढ़ रही थी और ऐसा लग रहा था कि परिणाम उसके मन मुताबिक आएंगे। उसी दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण व्यवस्था के पुनर्समीक्षा की बात कह दी। महागठबंधन से जुड़ी पार्टियां इस बयान को आरक्षण विरोधी बयान बताते हुए मैदान में कूद पड़ीं। परिणाम यह हुआ कि सारा चुनाव एक तरफा हो गया और पार्टी को भारी हार झेलनी पड़ी।


दयाशंकर का बड़ा कद न होने से ज्यादा नुकसान नहीं

हालांकि, पार्टी को लग रहा है कि इस एक बयान से इतना बड़ा नुकसान होने की संभावना नहीं है क्योंकि दयाशंकर सिंह न तो खुद इतना बड़ा नेता है और न ही उसका कोई बड़ा प्रभाव है। उसके पीछे पार्टी के कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज भी नहीं है। ऐसे में पार्टी को लगता है कि इस मामले को बसपा बहुत ज्यादा लम्बा नहीं खींच सकेंगी और यही भाजपा के हित में होगा।


गिरफ्तार किए जा सकते हैं दयाशंकर सिंह

बीजेपी और सपा एक रणनीति के तहत उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे को दुश्मन नम्बर वन बता रहे थे। दोनों को ही इसका लाभ भी मिलता दिख रहा था और दोनों पार्टियों ने यह सन्देश देने में सफलता पा ली थी कि रेस में वही दोनों हैं। इसका सीधा लाभ यह होना था कि चुनाव के दौरान ब्राह्मण वोट बैंक न बिखरता, जो उम्मीद के अनुरूप भाजपा को मिलता। वहीं, मुस्लिम भी अपना वोट मायावती को देकर खराब नहीं करता और वह वोट अन्य विकल्प न होने पर सीधा समाजवादी पार्टी को मिलता। समीकरण को ध्यान में रखते हुए यह मुद्दा खत्म करने में ही सपा को फायदा होने की उम्मीद दिख रही है इसलिए माना जा रहा है कि यूपी सरकार इस मामले पर कड़ा स्टैंड ले सकती है। हालांकि, बीजेपी से निष्कासित नेता दयाशंकर सिंह के खिलाफ लखनऊ में SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जा चुका है, लेकिन बसपा के बढ़ते विरोध के बीच उसे गिरफ्तार भी किया जा सकता है।