
शामली। कैराना उपचुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक सरगर्मियां भी जोर पकड़ती जा रही हैं। गोरखपुर और फूलपुर में लोकसभा उपचुनाव हारने के बाद भाजपा अब कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती। इसीलिए वह अन्य दलों के नेताओं को पार्टी में शामिल कराकर उसका मनोवैज्ञानिक लाभ लेकर अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटी है।
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इस उपचुनाव के सहारे अपनी खोई हुई जमीन पाने का सपना देख रही रालोद ने भी पूरी ताकत झोंक दी है। सपा का समर्थन मिलने के वाबजूद भी रालोद कोई रिश्क उठाने के मूड़ में नही है। लेकिन उपचुनाव से ठीक दस दिन पहले सपा-रालोद गठबंधन भाजपा ने बड़ा झटका दे दिया है। दरअसल रालोद के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी साहब सिंह ने शुक्रवार को भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।
गौरतलब है कि कैराना लोकसभा उपचुनाव में 28 मई को मतदान होना है, लेकिन उससे पहले भाजपा ने विरोधी दलों को तगड़ा झटका दे दिया है। लखनऊ स्थित भाजपा मुख्यालय भाजपा प्रदेशाध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय की उपस्थित में रालोद नेता साहब सिंह ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इसके अलावा भाजपा ने रालोद मुखिया चौधरी अजीत सिंह के साथ ही बसपा सुप्रीमो मायावती को भी तगड़ा झटका दे दिया। दरअसल उनकी पार्टी के दो नेताओं ने भी भाजपा का दामन थाम लिया।
लखनऊ में प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्रनाथ पांडेय की मौजूदगी में चौधरी साहब सिंह, संभल के बसपा नेता चरण सिंह भारती और मुरादाबाद के बसपा जिलाध्यक्ष रजनीकान्त जाटव ने पार्टी की सदस्यता ली। कैराना उपचुनाव से पहले चौधरी साहब सिंह का भाजपा में शामिल होना रालोद अध्यक्ष अजीत सिंह के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। मौजूदा समय में रालोद का लोकसभा और विधानसभा में कोई सदस्य नहीं है। ऐसे में कैराना उपचुनाव में रालोद की टिकट पर सपा समर्थित तबस्सुम हसन मैदान में हैं। इस समय राजनीति के हाशिये पर चल रही रालोद 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कैराना उपचुनाव जीत कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वापसी करने को बेचैन है।
Published on:
18 May 2018 03:03 pm

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