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नरेंद्र मोदी की अगुवानी के लिए यूपी सीएम योगी आदित्‍यनाथ नोएडा पहुंचकर तोड़ेंगे अंधविश्वास

नरेंद्र मोदी की अगुवानी के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्‍यनाथ नोएडा पहुंचकर अंधविश्वास तोड़ेंगे।

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नोएडा। शनिवार को उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ अपनी कुर्सी को खतरे में डालकर वह काम करेंगे, जिसकी हिम्‍मत कई सीएम नहीं कर पाए। यहां तक की पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव तक वादा करने के बावजूद ऐसी हिम्‍मत नहीं जुटा पाए। मायावती ने जरूर यह साहस दिखाया था लेकिन इसका खामियाजा उन्‍हें भुगतना पड़ा था। दरअसल, सीएम योगी शनिवार को नोएडा आकर यहां के मिथक को तोड़ने का प्रयास करेंगे। नोएडा के बारे में एक मिथक है कि, जो भी सीएम यहां आता है, उसकी कुर्सी चली जाती है।

25 को आ रहे हैं पीएम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 दिसंबर को तीसरी बार नोएडा आ रहे हैं। वह नोएडा के मैजेंटा लाइन मेट्रो का उद्घाटन करेंगे। इसकी तैयारियों को लेकर सीएम योगी शनिवार दोपहर को नोएडा पहुंचेंगे। साथ ही पीएम की अगवानी के लिए भी वो 25 दिसंबर को यहां उपस्थित रहेंगे। इसके बाद सवाल उठने लगे हैं क‍ि क्‍या सीएम योगी की कुर्सी सुरक्षित है। हालांकि, सीएम ने साफ अल्फाज में दावा किया कि नोएडा बस एक मिथक है और वो इसे तोड़कर रहेंगे, इसलिए एक नहीं दो-दो बार नोएडा की धरती पर कदम रखकर योगी आदित्यनाथ यह जताएंगे कि वो सियासत के साथ धर्म कर्म और पूजा पाठ में भले ही डूबे रहते हों लेकिन अंधविश्वासों से परे हैं।

डरते रहे हैं अब तक सीएम

आपको बता दें क‍ि यूपी के कई मुख्‍यमंत्री नोएडा से जुड़े मिथक के कारण यहां कदम रखने में डरते रहे हैं। पूर्व सीएम अखिलेश यादव भी अपने कार्यकाल में एक बार भी नोएडा नहीं आए और लखनऊ से ही शिलान्‍यास तक कर डाला। इतना ही नहीं उन्‍होंने वादा तक किया पर कदम नहीं रखा। अब योगी आदित्यनाथ नोएडा आ रहे हैं। आदित्यनाथ ऐसे दूसरे मुख्यमंत्री हैं जो जानबूझ कर राजनीतिक रूप से 'मनहूस' माने जाने वाले नोएडा जाने की हिम्मत कर रहे हैं।

अखिलेश यादव ने लखनऊ से ही किया शिलान्‍यास

अपने 5 साल के कार्यकाल में अखिलेश यादव एक बार भी नोएडा नहीं आए। चाहे वह यमुना एक्सप्रेसवे हो या बाबा रामदेव के पतंजलि फूड पार्क, सभी का शिलान्यास और उद्घाटन उन्होंने लखनऊ से ही किया। अब देखना होगा कि क्‍या मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ पीएम मोदी की अगवानी करने 25 दिसंबर को नोएडा आकर इस मिथक से लड़ने का साहस दिखाएंगे।

यह है वजह

1. 1988 में सीएम वीर बहादुर सिंह ने नोएडा आने के बाद ही अपनी कुर्सी खो दी थी।

2.1989 में नारायण दत्त तिवारी और 1999 में कल्याण सिंह की कुर्सी भी नोएडा आने के बाद चली गई थी।

3.1995 में मुलायम सिंह सीएम रहते हुए नोएडा आए थे और कुछ दिन बाद ही उनकी कुर्सी चली गई थी।

3. 2007 में तत्‍कालीन मायावती चार बार नोएडा आईं और 2012 के चुनाव में वह हार गईं।

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