Highlights - सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर उत्तर प्रदेश सरकार ने कैदियों को लेकर बड़ा फैसला लिया - कोरोना वायरस के चलते गौतमबुद्ध नगर की लुक्सर जेल से रिहा हुए 23 कैदी - जेल सुपरिंटेंडेंट विपिन मिश्र ने बताया जेल में अब हो पाएगा सोशल डिसटेंसिंग का पालन
नोएडा. कोरोना वायरस के खौफ के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर उत्तर प्रदेश सरकार ने कैदियों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने सूबे की जेलों में बंद 11 हजार कैदियों को 8 सप्ताह के लिए निजी मुचलके पर रिहा कर रही है। कोरोना वायरस के कहर के बीच सात साल से कम सजा वाले अपराधों के लिए जेल में बंद इन कैदियों की अस्थाई रिहाई शुरू हो गई है। गौतमबुद्ध नगर के जिला कारागार से रविवार को 23 बंदियों को पेरोल पर रिहा कर दिया गया है। जबकि 56 बंदियों की पेरोल आज को होगी।
दरअसल, गौतमबुद्ध नगर के जिला कारागार में हलचल है कारण ये है कि प्रदेश सरकार के निर्णय के बाद लुक्सर स्थित जिला कारागार से 23 बंदियों को पेरोल पर रिहा कर दिया है। जबकि 56 बंदियों की पेरोल आज यानी सोमवार को होगी। जेल सुपरिंटेंडेंट विपिन मिश्र ने बताया कि देश में कोरोना के तेजी से बढ़ते प्रसार के मद्देनजर बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को सुझाव दिया था कि सात वर्ष तक की सजा वाले कैदियों को पैरोल या अस्थाई जमानत पर रिहा कर दिया जाए। इससे शेष कैदियों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुलभ हो जाएगा।
बता दें कि उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं नोएडा में 31 कोरोना वायरस पॉजिटिव मिले हैं। जानलेवा कोरोना वायरस उत्तर प्रदेश की जेलों में न फैले इसके लिए प्रदेश सरकार ने 11 हजार कैदियों को रिहा करने का निर्णय लिया है। विपिन मिश्र ने बताया कि कि लुक्सर जेल में सात वर्ष तक की सजायाफ्ता बंदियों की संख्या 27 है। जबकि अंडर ट्रायल कैदियों की संख्या लगभग 378 है। जेल अधीक्षक ने बताया कि रविवार को 23 बंदियों को रिहा किया गया है। जबकि सोमवार को 56 और बंदियों को रिहा किया जाएगा।