
Video: यादव सिंह के बाद ग्रेटर-नोएडा अथाॅरिटी के इस पूर्व सीर्इआे पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार, मुकदमा दर्ज करने के आदेश
ग्रेटर नोएडा।यादव सिंह के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एक आैर आर्इएएस अधिकारी पर घोटाले का आरोप लगा हैं। यह अधिकारी ग्रेटर नोएडा अथाॅरिटी के पूर्व सीर्इआे रमारमण है।जिन पर जमीन घोटाले का आरोप लगने के साथ ही गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।भ्रष्टाचार अधिनियम कोर्ट के स्पेशल जज ने ग्रेटर नोएडा के कासना कोतवाली को अार्इएएस रमारमण समेत पांच लोगों पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। वहीं बता दें कि इससे पहले यीडा तत्कालीन सीईओ पीसी गुप्ता को जमीन घोटाले में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
कोर्ट ने इन धाराआें में मुकदमा दर्ज करने के दिए आदेश
जानकारी के अनुसार जमीन घोटाले का मामला उत्तर प्रदेश के सीनियर आईएएस और वर्तमान में हथकरधा एवं वस्त्र उद्योग विभाग के अपर सचिव रमारमण से जुड़ा है। दरअसल 2009 में हुए एक जमीन घोटाले भ्रष्टाचार अधिनियम कोर्ट-2 के स्पेशल जज ने तत्कालीन तीनों प्राधिकरण के चेयरमैन रमारमण, मीणा भार्गव, ऋतुराज ब्यास और बिल्डर वैभव जैन के खिलाफ आईपीसी की धारा 420,467,468,471,120बी, और 7 /13 भ्रष्टाचार अधिनयम के तहत कासना थाने में मामला दर्ज करने का आदेश पुलिस को दिया था।वहीं थाना प्रभारी ने अभी कोर्ट का आदेश न मिलने की वजह से मुकदमा दर्ज नहीं करने की बात कहीं हैं।उन्होंने बताया कि अगर कोर्ट का आदेश मिलता है, तो मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवार्इ की जाएगी।
किसान की याचिका पर कोर्ट ने दिया ये आदेश
दरअसल कोर्ट ने ये आदेश किसान कुलदीप भाटी की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है। बिसरख गांव के निवासी कुलदीप भाटी की 50 बीघे जमीन थी। जिसे ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 2009 में अधिग्रहण किया था। लेकिन उनकी 3350 वर्ग मीटर जमीन जो की आबादी में थी। इसे प्राधिकरण ने छोड़ दिया था। बावजूद इसके प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ रमा रमण, उप महाप्रबंधक मीना भार्गव, नगर नियोजन, नोडल अधिकारी रितुराज व्यास समेत 5 लोगों ने कुलदीप भाटी के स्वामित्व की जमीनों को 2011 में बिल्डर वैभव जैन को आवंटित कर दिया। कुलदीप भाटी पुलिस और प्राधिकरण के चक्कर लगते रहे, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी।
2016 में दिया था जमीन वापस करने का आश्वासन
पीड़ित ने बताया कि प्राधिकरण से लेकर अधिकारियों आैर पुलिस के दरवाजे पर पांच साल तक चक्कर काटने के बाद उन्हें 2016 में प्राधिकरण अधिकारियों ने उतनी ही जमीन उसे स्थानांतरित करने की बात कही थी। जो अब तक नहीं की गई। आरोप है कि ऐसा करने की एवज में ग्रेनो प्राधिकरण ने उससे 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। शिकायत देने पर इस मामले में पुलिस ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर उसने अदालत की शरण ली। सुनवाई के बाद स्पेशल जज (भ्रष्टाचार अधिनियम) कोर्ट संख्या-2 ने गौतमबुद्धनगर जिले के कासाना थाना प्रभारी को आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए है। हालांकि थाना प्रभारी ने अभी आदेश न मिलने की वजह से मुकदमा दर्ज नहीं किया है।
Published on:
05 Mar 2019 06:49 pm
बड़ी खबरें
View Allनोएडा
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
