इस बारे में यूपी के पूर्व डीजीपी एके जैन ने कहा कि इलेक्शन से पहले हर जिले में पुलिस के द्वारा वांटेड अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाया जाता है। उसकी रिपोर्ट इलेक्शन कमीशन को जाती है। कितने लोगों को गिरफ्तार कर लिया? कितनों के खिलाफ वारंट हैं? कितनों के खिलाफ नाॅन बेलेबल वारंट हैं? अगर कुछ अपराधी छूटे हुए हैं तो मुख्यालय आैर इलेक्शन कमीशन से सख्ती होती है। गुंडे, बलवार्इ आैर जिनसे शांति भंग होने का खतरा है, उनके खिलाफ आर्इपीसी की धारा 107, 116, 116/3 में पाबंद कराया जाता हैं। भारी धनराशि के मुचलकों पर उन्हें वाॅर्न किया जाता है। गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट 110, 110 सीआरपीसी आैर 109 के तहत कार्रवार्इ की जाती है। जो एक्टिव क्रिमिनल है, जिनका इतिहास है कि वो चुनाव के दिन गड़बड़ी कर सकते हैं, उनके खिलाफ कार्रवार्इ की जाती है। इसकी सूचना डीजी हेडक्वार्टर से इलेक्शन कमीशन को आैर सरकार को जाती है। इन सब कार्रवार्इ के बाद गुंडे आैर वांछित अपराधी ज्यादा सक्रिय नहीं रह पाते हैं। इलेक्शन कमीशन की सख्ती से इलेक्शन पर काफी असर पड़ा है।