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चुनाव में वोट डलवाने के लिए तैयार हो गर्इ कुख्यातों की फौज

मेरठ मंडल में इनकी संख्या एक लाख से ज्यादा

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sharad asthana

Jul 04, 2016

gunda neta

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सौरभ शर्मा, नोएडा।
प्रदेश में वेस्ट यूपी क्राइम आैर क्रिमिनल्स का गढ़ बनता जा रहा है। हर रोज वेस्ट यूपी के किसी न किसी जिले से क्राइम की घटना सामने आती रहती है। एेसे में यूपी चुनाव में इनकी उपयोगिता बढ़ने जा रही है। हर पार्टी इस बार चुनाव को अपनी मुट्ठी में करना चाहती है, इसलिए वो साम, दाम, दंड, भेद हर तरीके अपनाने को तैयार है। इसलिए अपराधियों की भी एेसी फौैज तैयार की जा रही है जो चुनावों के समय बल से वोट अपनी आेर खींच कर पार्टी की आेर डायवर्ट कर सके। इस फौज को तैयार करने की पूरी तैयारी हो गर्इ है। पूरे मंडल में एक लाख एेसे अपराधियों की फौज है, जो चुनावों में किसी पार्टी को जिताने में सक्षम हैं।


मेरठ-गाजियाबाद में सबसे अधिक

मंडल के आंकड़ों की बात करें तो मार्च 2014 से मई 2016 तक वांछित अपराधियों की संख्या कुल 1,04,181 हैं। इनमें से मेरठ में इनकी संख्या सबसे अधिक 27 हजार 90 है। दूसरे नंबर पर गाजियाबाद आता है, यहां पर 22 हजार 310 अपराधी वांछित हैं। सबसे कम अपराधी मंडल में बागपत जिले में हैं। यहां 9500 वांछित मौजूद हैं। बुलंदशहर में 19,181, गौतबुद्घनगर में 13,984 आैर हापुड़ में 12,116 अपराधी हैं। अगर पूरे मंडल में कुल अपराधियों की संख्या का गणित देखा जाए तो एक लाख से अधिक जा रहा है।


इस तरह होता है इस्तेमाल

जानकारों की मानें तो कर्इ पाॅलिटिकल पार्टियां इन लोगों का इस्तेमाल चुनाव के कुछ दिन पहले से शुरू करती हैं। पाॅलिटिकल पार्टियां एेसे लोगों से वोटरों को धमकाने के अलावा दूसरी पार्टियों के कार्यकर्ताआें को सामने से हटाने, विपक्षी पार्टियों के रैलियों आैर सभाआें में हंगामा कराने का काम कराती हैं। चुनाव के दिन एेसे लोगों को बूथों के पास खड़ा कराकर वोटर्स को डराने का काम कराते हैं। देहात के बूथों पर तो यही अपराधी अपने समर्थित प्रत्याशियों के हित में वोटर्स को अपनी गाड़ी में लेकर आते हैं आैर पक्ष में वोट डलवाते हैं। वोट के लिए एेसे लोगों को मर्डर आैर फिरौती की रकम साथ ही इलेक्शन में इस्तेमाल होने वाले दो नंबर के रुपयों को इधर से उधर कराने में भी यूज किया जाता है। ये सभी अपराधी इस काम में पूरी तरह से ट्रेंड होेते हैं।


कैसे किया जाता है इन्हें कंट्रोल

इस बारे में यूपी के पूर्व डीजीपी एके जैन ने कहा कि इलेक्शन से पहले हर जिले में पुलिस के द्वारा वांटेड अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाया जाता है। उसकी रिपोर्ट इलेक्शन कमीशन को जाती है। कितने लोगों को गिरफ्तार कर लिया? कितनों के खिलाफ वारंट हैं? कितनों के खिलाफ नाॅन बेलेबल वारंट हैं? अगर कुछ अपराधी छूटे हुए हैं तो मुख्यालय आैर इलेक्शन कमीशन से सख्ती होती है। गुंडे, बलवार्इ आैर जिनसे शांति भंग होने का खतरा है, उनके खिलाफ आर्इपीसी की धारा 107, 116, 116/3 में पाबंद कराया जाता हैं। भारी धनराशि के मुचलकों पर उन्हें वाॅर्न किया जाता है। गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट 110, 110 सीआरपीसी आैर 109 के तहत कार्रवार्इ की जाती है। जो एक्टिव क्रिमिनल है, जिनका इतिहास है कि वो चुनाव के दिन गड़बड़ी कर सकते हैं, उनके खिलाफ कार्रवार्इ की जाती है। इसकी सूचना डीजी हेडक्वार्टर से इलेक्शन कमीशन को आैर सरकार को जाती है। इन सब कार्रवार्इ के बाद गुंडे आैर वांछित अपराधी ज्यादा सक्रिय नहीं रह पाते हैं। इलेक्शन कमीशन की सख्ती से इलेक्शन पर काफी असर पड़ा है।


अपराधियों पर कंट्रोल करने के आदेश

इस बारे में मंडल कमीश्नर आलोक सिन्हा से बात की गर्इ तो उन्होंने कहा कि मेरठ में क्राइम बढ़ा है। वांछित अपराधियों के आंकड़े बता रहे हैं कि क्रिमिनल की संख्या मंडल में सर्वाधिक है। पुलिस अधिकारियों को क्राइम कंट्रोल के निर्देश दिए गए हैं। हमें उम्मीद है कि कोर्इ अपराधी जेल से बाहर नहीं होगा। हम किसी भी अपराधी को नहीं छोड़ेंगे। साथ ही इलेक्शन को प्रभावित करने वाले सभी अपराधियों को सलाखों के पीछे कर दिया जाएगा।


जनपद- वांछित अपराधी

मेरठ- 27090

गाजियाबाद- 22310

बुलंदशहर- 19181

गौतमबुद्धनगर- 13984

हापुड़- 12116

बागपत- 9500

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(ये आंकड़े 16-3-14 से 31-5-16 के बीच के हैं)

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