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UP के इस गांव में भारत बंद के बाद टूटा दलितों पर कहर, लोगों के पलायन से गांव में छाया सन्नाटा

प्रदर्शन के एक दिन बाद एक दिलत युवक की कर दी गई थी हत्या

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मेरठ. एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट की ओर से किए गए संशोधन के खिलाफ 2 अप्रैल को हुए दलितों के भारत बंद के दौरान हुई हिंसा का खामियाजा सबसे ज्यादा दलित समुदाय के लोगों को ही उठाना पड़ा है। एक तरफ आन्दोंने के दौरान देशभर में 6 दलितों की हत्या कर दी गई। वहीं आन्दोलन के दो दिन बाद मेरठ के शोभापुर गांव में एक दलित युवक की हत्या कर दी गई। इस हत्या के बाद दलितों में दहशत का माहौल है। आलम ये हैं कि लोग गांव से पलायन कर रहे हैं। दलितों के आन्दोलन का केन्द्र रहा मेरठ के थाना कंकरखेड़ा क्षेत्र के शोभापुर में चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ है।

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एक हफ्ता गुजरने के बाद भी मेरठ के इस गांव में तनाव को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है। वहीं, बसपा से जुड़े दलित युवक गोपी की हत्या के आरोप में गुर्जर बिरादरी से जुड़े दो आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है, लेकिन इस वारदात के बाद अब भी गांव में पुलिस के अलावा कोई नजर नहीं आ रहा है।

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दलितों के आन्दोलन के अगले दिन तीन अप्रैल को मेरठ के थाना कंकरखेड़ा क्षेत्र के शोभापुर गाँव में एक दलित युवक गोपी की गांव के ही गुर्जर बिरादरी के युवकों ने ताबड़तोड़ गोली बरसाते हुए हत्या कर दी थी। इस वारदात के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेज दिया, लेकिन अब भी पुरे गाँव में दहशत का माहौल है।

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गाँव में सन्नाटा पसरा हुआ है और संघर्ष के डर से कई लोग गाँव के बाहर चले गए हैं, दलित समुदाय संबंधित जो लोग किसी काम से बाहर गए हुए थे वे भी वापिस नहीं आ रहे हैं।

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मृतक युवक के परिजनों का कहना है की पुलिस प्रशासन के कहने पर उन्होंने संगीनों के साये में पुलिस बल के साथ गोपी का अंतिमसंस्कार किया था। तनाव को देखते हुए लोगों ने 14 अप्रैल को सादगी के साथ बाबा साहब की जयंती बनाने का ऐलान किया है।

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