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केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ 2 हजार डॉक्टर हड़ताल पर, OPD पूरी तरह ठप

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर देशव्यापी हड़ताल के तहत नोएडा में भी 2 हजार से अधिक डॉक्टर हड़ताल पर हैं।

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नोएडा। नेशनल मेडिकल कमीशन बनाने के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर देशव्यापी हड़ताल के तहत नोएडा में भी 2 हजार से अधिक डॉक्टर 12 घंटे की हड़ताल पर हैं। हड़ताल के कारण शहर के निजी अस्पतालों में ओपीडी सेवा पूरी तरह ठप रहीं। जिसके चलते लोगों को खासी परेशानी हुई। हालांकि इमरजेंसी सेवाएं आम दिनों की तरह सामान्य रहीं।

एनसीआर में मेडिकल हब की तरह ख्याति नोएडा शहर के बड़े अस्पतालों में शुमार कैलाश अस्पताल, जेपी, फोर्टिस, सुमित्रा और मैक्स अस्पताल में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से ठप रहीं। केंद्र सरकार के नेशनल मेडिकल कमीशन बनाने के प्रस्ताव के बाबत सुमित्रा हॉस्पिटल के सीएमडी डॉ. वीके गुप्ता का कहना है कि इस बिल के पास होने से इलाज महंगा होगा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।

सीएमओ डॉ. अनुराग भार्गव ने बताया कि नोएडा में 350 हॉस्पिटल काम कर रहे हैं। इनमें 2000 से अधिक डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। निजी डॉक्टरों की हड़ताल के मद्देनजर जिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी और पीएचसी को सचेत कर दिया गया था। डॉक्टरों की हड़ताल के मद्देनजर जिला अस्पताल में रोज के मुकाबले मरीजों की भीड़ अधिक रही।

कैलाश अस्पताल के एमडी ने बताया कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर डॉक्टर 12 घंटे की हड़ताल पर हैं। उन्होंने बताया कि हड़ताल के तहत सिर्फ ओपीडी सेवाएं ठप हैं। लेकिन इमरजेंसी सेवाएं और भर्ती मरीजों की देखरेख को हड़ताल से मुक्त रखा गया है। इसलिए इन सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है।

बता दें कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और इंडियन मेडिकल काउंसिल को नेशनल मेडिकल कमीशन बिल 2017 के प्रावधानों पर एतराज है। नए बिल के मुताबिक अब तक प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 15% सीटों का फीस मैनेजमेंट तय करती थी। अब नए बिल के मुताबिक मैनेजमेंट को 60% सीटों का फीस तय करने का अधिकार होगा। इसमें पहले 130 सदस्य होते थे और हर राज्य का तीन प्रतिनिधि होता था। अब नए बिल के मुताबिक कुल 25 सदस्य होंगे, जिसमें 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से केवल 5 प्रतिनिधि ही होंगे।

आयुष को ब्रिज कोर्स करवाकर इंडियन मेडिकल रजिस्टर में शामिल करने का प्रावधान है, जो एमबीबीएस के लगभग बराबर होगा। एमबीबीएस के बाद भी प्रेक्टिस करने के लिए एक और परीक्षा देनी होगी। वहीं पहले यह परीक्षा विदेशों से एमबीबीएस करने वालों को ही देनी होती थी। अब नए बिल में उनको इस एग्जाम से छूट देने का प्रावधान किया गया है।