10 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

‘एकल श्री राम कथा’ में होंगे हजारों दर्शक शामिल, अपने विद्यालय की बताई खूबियां, बोले- ग्रामीण बच्चों को दी शिक्षा…

भारत लोक शिक्षा परिषद “एकल श्री राम कथा” आयोजित करने जा रहा है, इसमें हजारों श्रोता शामिल होंगे। साथ ही इसके स्कूल के बारे में भी आइये जानते हैं कि ये क्या है कब शुरू हुआ।

2 min read
Google source verification
Ekal Shri Ram Katha

Ekal Shri Ram Katha

भारत लोक शिक्षा परिषद द्वारा शिक्षित, स्वस्थ एवं स्वावलंबी राष्ट्र निर्माण को 25 साल पूरे होने की वजह से ‘रजत जयंती वर्ष’ मनाया जा रहा है। इसी को ऐतिहासिक बनाने के लिए शनिवार यानी 29 मार्च 2025 से रविवार यानी 6 अप्रैल 2025 तक हर दिन शाम 4 बजे से लेकर 7:30 बजे तक “एकल श्री राम कथा” का आयोजन किया जाएगा। यह पूरा कार्यक्रम कथा व्यास परम पूज्य भाईश्री रमेश भाई ओझा जी के मुखारविंद से पंजाबी बाग स्टेडियम रिंग रोड में होगा। इसे लेकर दर्शक काफी खुशी महसूस कर रहे हैं।

एक विद्यालयों को लेकर मुख्य लोगों ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस

इस पूरे कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम और नगर संगठन के जरिए एक मजबूत समन्वय बनाना है साथ ही 25 हज़ार नए एकल विद्यालयों को चलाना है। एकल श्रीराम कथा द्वारा ही सभी धर्मों के लोगों को राष्ट्र प्रेम, राष्ट्रधर्म और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करना भी है। वहीं, श्री नीरज रायजादा जी (राष्ट्रीय चेयरमैन एवं कथा संयोजक) ने एकल प्रेस कॉन्फ्रेंस से सभी को एकल के बारे में विस्तार से बताया है। श्री अखिल कुमार गुप्ता जी (राष्ट्रीय प्रधान एवं कथा संयोजक) ने एकल क्या है, कैसे काम करता है, विद्यालय में क्या पढ़ाया जाता है, BLSP का कार्य क्षेत्र क्या है इन सब के बारे में सभी को पूर्ण जानकारी दी है।

60 विद्यालयों से हुआ शुरू अब पहुंचा 1 लाख से ज्यादा

बता दें, सभी ने यह भी बताया है कि भारत में एकल अभियान ट्रस्ट ने साल 2017 में दूर-दराज के इलाकों के जनजातीय और ग्रामीण बच्चों को शिक्षा प्रदान करने, ग्रामीण सशक्तिकरण, लैंगिक और सामाजिक समानता को बढ़ावा दिया था और साल 26 फरवरी 2019 में इस ट्रस्ट को भारत सरकार द्वारा “गाँधी शान्ति पुरस्कार” मिला। ‘एकल अभियान’ साल 1988 में झारखंड में 60 विद्यालयों से शुरू हुआ था और आज यह लगभग 1 लाख से अधिक विद्यालयों तक पहुंच चुका है, इसके माध्यम से लगभग 30 लाख बच्चों को शिक्षा से मिल रही है। इसका लक्ष्य देश के लगभग 6.5 लाख गांवों तक पहुंचना है।

एकल विद्यालय स्वामी विवेकानंद के अनोखे वाक्स को करते है फॉलो

एकल विद्यालय का अर्थ हो कि एक गांव में एक विद्यालय और एक शिक्षक के माध्यम से बच्चों को पढ़ाना। इसके जरिए उसी गांव के 25 से 30 बच्चे नियमित रूप से शिक्षा ग्रहण करते हैं। एकल विद्यालय स्वामी विवेकानंद के इस वाक्य को चरितार्थ करता है जिसमें उन्होंने कहा था कि “अगर बच्चे विद्यालय नहीं जा सकते तो विद्यालयों को बच्चों तक पहुंचना होगा” इसी आदर्श वाक्य पर एकल अभियान आज संपूर्ण भारत में कार्यरत है।