
फैक्ट्री का पर्दाफाश तब हुआ जब एक युवक ने पुलिस से शिकायत की। युवक ने ऑनलाइन प्रोटीन पाउडर ऑर्डर किया था, जिसे खाने के बाद उसे पेट और लीवर से जुड़ी समस्याएं होने लगीं। साथ ही उसके चेहरे पर मुंहासे भी निकल आए। युवक को प्रोटीन पाउडर की गुणवत्ता पर शक हुआ और उसने पुलिस को सूचित किया।
नोएडा पुलिस ने शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करते हुए एक टीम का गठन किया। बताए गए पते पर छापेमारी के दौरान पुलिस को फैक्ट्री के बेसमेंट में तीन लोग साहिल यादव, हर्ष अग्रवाल और अमित चौबे मिले जो खाली डिब्बों में कुछ भरने का काम कर रहे थे। वहां बड़ी मात्रा में फूड सप्लीमेंट के भरे और खाली डिब्बे, रैपर, पैकिंग मशीन, और प्रिंटिंग मशीन बरामद हुई। जब उनसे खाद्य विभाग के दस्तावेज मांगे गए, तो वे कोई वैध कागजात पेश नहीं कर सके।
गिरफ्तार आरोपियों ने खुलासा किया कि वे खराब और सस्ते कच्चे माल का इस्तेमाल कर नकली प्रोटीन पाउडर बनाते थे। इस नकली प्रोटीन को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर "रॉरेज" ब्रांड के नाम से 3500 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा था। उन्होंने 1 दिसंबर 2024 को इस कंपनी की शुरुआत की थी।
पुलिस ने छापेमारी में 33 बड़े प्रोटीन डिब्बे, 2050 छोटे कैप्सूल डिब्बे, 5500 खाली डिब्बे, 10 पैकेट रैपर, मेटाडेक्सट्रिन पाउडर, कैफीन, कोको पाउडर, अश्वगंधा, चॉकलेट पाउडर, पैकिंग और प्रिंटिंग मशीनें, तीन मोहरें, और अन्य सामग्री जब्त की है। नमूनों की जांच में सभी प्रोडक्ट नकली पाए गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
Updated on:
11 Dec 2024 03:45 pm
Published on:
11 Dec 2024 03:42 pm
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