
प्रोजेक्ट दामाद जी’ -जब प्यार की पिच बनी पॉवरपॉइंट प्रेजेंटेशन (फोटो सोर्स : AI)
Project Damad Ji PowerPoint Pitch: भारत में शादी सिर्फ दो दिलों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों का गठबंधन मानी जाती है। यहां रिश्ते सिर्फ भावनाओं से नहीं, बल्कि सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संतुलन से भी तौले जाते हैं। ऐसे में अपने जीवनसाथी के चुनाव के बारे में घरवालों को बताना किसी इंटरव्यू या बोर्ड एग्जाम से कम तनावपूर्ण नहीं होता। इसी पारिवारिक दबाव और भावनात्मक उलझनों के बीच नोएडा में रहने वाली एक ऑर्गनाइजेशनल साइकोलॉजिस्ट प्रकृति ने ऐसा अनोखा तरीका अपनाया, जिसने न सिर्फ उनके परिवार को चौंकाया बल्कि सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी। उन्होंने अपनी मां को अपने बॉयफ्रेंड से मिलवाने के लिए दिल छू लेने वाली भावनात्मक बातचीत की जगह एक प्रोफेशनल पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन तैयार किया - जिसका नाम रखा गया ‘प्रोजेक्ट दामाद जी’।
प्रकृति पेशे से संगठनात्मक व्यवहार (Organizational Behavior) की विशेषज्ञ हैं। वे कॉर्पोरेट दुनिया में लोगों की कार्यशैली, निर्णय क्षमता और टीम डायनामिक्स पर काम करती हैं। शायद यही प्रोफेशनल बैकग्राउंड उनके निजी जीवन में भी काम आया। उन्होंने सोचा -जब हम नौकरी के लिए इंटरव्यू में खुद को प्रेजेंट करते हैं, स्टार्टअप फंडिंग के लिए पिच बनाते हैं, तो जीवन के सबसे बड़े फैसले के लिए क्यों नहीं। बस यहीं से शुरू हुआ ‘प्रोजेक्ट दामाद जी’।
यह कोई साधारण स्लाइड शो नहीं था, बल्कि एक सुव्यवस्थित “रिश्ता विश्लेषण रिपोर्ट” थी। प्रेजेंटेशन में शामिल थे:
1. कैंडिडेट प्रोफाइल (यानी बॉयफ्रेंड का परिचय)
2. SWOT एनालिसिस (ताकत और कमजोरियां)
3. फैमिली कम्पैटिबिलिटी इंडेक्स
4. लॉन्ग-टर्म गोल्स अलाइनमेंट
5. रिस्क फैक्टर्स
6. इमोशनल ROI (Return on Investment)
यह स्लाइड सबसे ज्यादा दिलचस्प रही। प्रकृति ने समझाया कि इस रिश्ते से भावनात्मक स्थिरता, आपसी सम्मान और भविष्य की सुरक्षा कैसे मिलेगी।
शुरुआत में मां को लगा कि यह कोई ऑफिस प्रोजेक्ट है। लेकिन जैसे-जैसे स्लाइड आगे बढ़ती गईं, माहौल हल्का-फुल्का लेकिन गंभीर होता गया। हंसी, फिर जिज्ञासा, फिर सवाल-जवाब का दौर चला। मां ने आखिर में कहा कि कम से कम तुमने सोच-समझकर फैसला लिया है, ये देखकर अच्छा लगा। यानी भावनात्मक बहस की जगह एक व्यवस्थित चर्चा हुई, जिसमें हर पहलू पर खुलकर बात हो सकी।
जैसे ही यह कहानी ऑनलाइन सामने आई, इंटरनेट दो हिस्सों में बंट गया।
लखनऊ के मनोवैज्ञानिक सुमित अग्रवाल का मानना है कि परिवारों को अक्सर डर “अनजाने” से होता है। जब जानकारी व्यवस्थित रूप से दी जाती है, तो भ्रम कम होता है,भरोसा बढ़ता है। बातचीत भावनात्मक टकराव की जगह तार्किक दिशा में जाती है। यह तरीका खासकर उन परिवारों में काम कर सकता है, जहां निर्णय सोच-विचार से लिए जाते हैं।
‘प्रोजेक्ट दामाद जी’ सिर्फ एक मजेदार किस्सा नहीं, बल्कि बदलते भारत की झलक है। नई पीढ़ी भावनाओं को नकार नहीं रही, बल्कि उन्हें समझदारी और पारदर्शिता के साथ पेश करना चाहती है। जहां पहले “मुझे वो पसंद है” ही तर्क होता था, अब “क्यों पसंद है” इसका भी जवाब तैयार किया जा रहा है।
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Published on:
10 Feb 2026 07:55 am
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