
independence-day
नोएडा। 15 August को भारत स्वतंत्रा दिवस की 72वीं वर्षगाठ मनाने जा रहा है। देश के लिए इस बार स्वतंत्रता दिवस कई मायने में खास है। एक ओर जम्मू-कश्मीर से Article 370 हटाकर उसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है। इस बार भी देश की जनता को प्रधानमंत्री से काफी उम्मीदें हैं। पीएम मोदी इस बार अपने दूसरे कार्यकाल में लाल किले ( Lal Quila ) से तिरंगा फहराएंगे। आजादी के 71 साल पूरे होने पर हर साल की तरह इस बार भी राष्ट्रीय पर्व पर तरह-तरह के कार्यक्रम किए जाएंगे।
इस खास पर्व के मौके पर क्या बड़े बुजुर्ग, युवा बच्चों से लेकर महिलाएं भी एक दूसरे को स्वतंत्रता दिवस और जश्न ए आजादी की बधाई देते हैं। इसके लिए अगर हमारे अपने या मित्र आसपास होते हैं तो आसानी से शुभकामनाएं और स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई देते हैं, लेकिन जो दूर हैं उनके लिए हम खास मैसेज के जरिए बधाई संदेश भेज सकते हैं। वैसे चंद लाइनों के जरिए हम अपनी इस आजादी के मतलब को बयां नहीं कर सकते लेकिन फिर भी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए काफी मदद करते हैं
15 अगस्त के विशेष अवसर पर भेजिए कुछ इस तरह के संदेश -
वो ज़िन्दगी ही क्या जिसमे देशभक्ति ना हो।
और वो मौत ही क्या जो तिरंगे में ना लिपटी हो।
शहीदों के त्याग को हम बदनाम नही होने देंगे,
भारत की इस आजादी की कभी शाम नही होने देंगे ।
उस धरती पे मैने जनम लिया, ये सोच के मैं इतराता हूँ
भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूं।
जश्न आजादी का मुबारक हो देश वालो को,
फंदे से मोहब्बत थी हम वतन के मतवालो को।
न आंखों की दो बूंदों से सातों सागर हारे हैं,
जब मेहँदी वाले हाथों ने मंगल-सूत्र उतारे हैं ।
कुछ तो बात है मेरे देश की मिट्टी में साहेब
सरहदें कूद के आते हैं यहाँ दफन होने के लिए ।
आजादी की कभी शाम नही होने देंगे,
शहीदों की क़ुरबानी बदनाम नही होने देंगे,
क्यों मरते हो यारों सनम बेवफा के लिए,
जो कभी नहीं देगी अपना दुप्पटा तुम्हारे कफन के लिए
मरना है तो मरो अपने वतन के लिए
कम से कम तिरंगा तो मिले जायेगा कफन के लिए…
भूल न जाना भारत माँ के सपूतों का बलिदान,
इस दिन के लिए जो हुए थे हंसकर कुर्बान,
आज़ादी की ये खुशियाँ मनाकर लो ये शपथ
की बनायेंगे देश भारत को और भी महान..
बची हो जो एक बूंद भी लहू की,
बची हो जो एक बूंद भी लहू की,
तब तक भारत माता का आंचल निलाम नही होंगे देंगे|
वतन हमारा मिसाल है मोहब्बत की,
तोड़ता है दीवारें नफरत की,
ये मेरी खुश नसीबी है जो मिली जिन्दगी इस चमन में…
और भुला न सके कोई भी इसकी खूशबु सातों जनम में…
संस्कार और संस्कृति की शान मिले ऐसे,
हिन्दू मुस्लिम और हिंदुस्तान मिले ऐसे
हम मिलजुल के रहे ऐसे की
मंदिर में अल्लाह और मस्जिद में राम मिले जैसे…
Updated on:
10 Aug 2019 11:17 am
Published on:
10 Aug 2019 11:11 am
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