
गाजियाबाद. क्या आप जानते हैं कि जिस दूध को आप पी रहे हैं वह आपकी सेहत बनाने के बजाय उल्टा नुकसान पहुंचा रहा है। भाग-दौड़भरी दिनचर्या में हमारे पास इतना समय ही नहीं होता कि हम ये जान सकें कि जिस दूध को हम और हमारा परिवार पी रहा है वह लाभदायक है भी या नहीं। दरअसल, विदेशी गायों और भैंसों का दूध स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक है। ये दूध आसानी से पचता भी नहीं है, क्योंकि इंसानों के पेट में इतना तापमान नहीं होता है। ये कहना है गाजियाबाद के सिकंदरपुर निवासी 39 वर्षीय असीम रावत का। यहां बता दें कि असीम अमेरिका समेत कई देशों में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकर कर चुके हैं। लेकिन, अपने देश से गांव से लगाव के चलते उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने गांव में एक डेयरी खोल ली। उनकी डेयरी में साहीवाल जैसी देसी नस्ल के करीब 400 गोवंश हैं, जिसमें 100 बैल और बाकी गाय और बछड़े-बछिया हैं। असीम लगातार दूध पर अध्ययन करते रहते हैं।
गाजियाबाद के साहिबाबाद क्षेत्र में आप हिंडन एयरफोर्स स्टेशन के पास स्थित सिंकदरपुर गांव में हेथा नाम से डेयरी चलाने वाले असीम रावत देसी गायों और गोवंश के मुरीद हैं। असीम बताते हैं कि अध्ययन के दौरान वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि विदेशी गाय और भैंस का दूध हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। क्योंकि इसमें ए-1 प्रोटीन पाया जाता है, जिससे मधुमेह और भूलने जैसी कई बीमारियां हो सकती हैं। वहीं ए-2 प्रोटीन वाला दूध अमृत तुल्य होता है। उनके मुताबिक दुनिया में जितनी गाय हैं उनकी आधी संख्या भारत में और लगभग हर देसी नस्ल में ये ए-2 प्रोटीन पाया जाता है। गिर, साहीवाल और कंकेर जैसी नस्लों में ए-2 प्रोटीन प्रचुर मात्रा में मिलता है, लेकिन कुछ लोग ज्यादा मुनाफे के चक्कर में विदेशी गाय और भैंस रखकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। इसलिए असीम डेयरी के साथ-साथ ए-2 प्रोटीन वाले दूध का भी खूब प्रचार-प्रसार करते हैं। वे कहते हैं कि जब हम जानते हैं कि विदेशी गायों, भैंस आदि से जो दूध होता हो वो नुकसान करता है तो फिर उसके कारोबार या फिर पीने की क्या जरुरत है।
इसके परखने के कई तरीके
असीम कहते हैं कि सबसे पहले हमे कोशिश करनी चाहिए कि अपनी आंखों के सामने निकला दूध ही पीएं, ताकि अच्छे-बुरे में अंतर पता किया जा सके। असीम की मानें तो देसी और विदेशी नस्ल की गायों में आसानी से अंतर किया जा सकता है। वे कहते हैं कि गाय-भैंस परखने के कई तरीके हैं। इनमें सबसे आसान तरीका उनकी पीठ और पेट से लगाया जा सकता है। देसी नस्ल की गायों में पीठ उठी हुई मतलब कूबड़ होती है और नीचे पेट की खाल लटकी हुई होती है। अगर जरूरी हो तो किसी अच्छी लेबोरेट्री से आप दूध की जांच भी करवा सकते हैं।
Published on:
07 May 2018 01:34 pm
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