
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बाजार आधारित संपत्तियों के मूल्य संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया है कि किसी भी फ्रीज की गई निवेशित संपत्ति को केवल सुरक्षित रखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके आर्थिक मूल्य की रक्षा करना भी आवश्यक है।
यह मामला लगभग ₹423 करोड़ मूल्य की प्रतिभूतियों और निवेशों से जुड़ा है, जो ड्रीम अचीवर कंसल्टेंसी सर्विसेज प्रा. लि., डिस्कवरी बिल्डकॉन प्रा. लि., फॉरेस्ट विनकॉम प्रा. लि., ब्रिलियंट इन्वेस्टमेंट्स कंसल्टेंट प्रा. लि., एबिलिटी वेंचर्स प्रा. लि., एबिलिटी स्मार्टेक प्रा. लि., एबिलिटी गेम्स लिमिटेड और सवर्ण भूमि वाणिज्य प्रा. लि. के पास हैं।
माननीय हाईकोर्ट ने बाजार में उतार-चढ़ाव के जोखिम को ध्यान में रखते हुए संबंधित कंपनियों को यह अनुमति दी है कि वे प्रवर्तन निदेशालय के समक्ष एक प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकें, जिसके तहत फ्रीज की गई प्रतिभूतियों का परिसमापन कर प्राप्त राशि को ऐसे विनियमित वित्तीय साधनों में पुनर्निवेश किया जा सके।
न्यायालय ने माना कि सूचीबद्ध शेयरों और बाजार आधारित निवेशों को अनिश्चितकाल तक फ्रीज रखे जाने की स्थिति में उनके मूल्य पर बाजार की अस्थिरता का प्रभाव पड़ सकता है। इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए अदालत ने लंबित कार्यवाही के दौरान भी संपत्तियों के आर्थिक हितों की सुरक्षा को महत्व दिया है।
यह मामला उद्योगपति हरि शंकर तिबरेवाल से जुड़े होने के कारण भी विशेष चर्चा में है। हालांकि मामले के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकरणों द्वारा लिया जाना अभी शेष है, लेकिन हाईकोर्ट की यह टिप्पणी निवेशित संपत्तियों के संरक्षण के प्रति एक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण को दर्शाती है।
₹423 करोड़ के निवेश पोर्टफोलियो से जुड़े इस मामले में हाईकोर्ट का दृष्टिकोण एसेट वैल्यू प्रोटेक्शन की अवधारणा को नई मजबूती प्रदान करता है। आदेश यह संकेत देता है कि लंबी कानूनी प्रक्रियाओं के दौरान संपत्तियों के वास्तविक आर्थिक मूल्य को सुरक्षित रखने के उपायों पर भी विचार किया जाना चाहिए।
कानूनी क्षेत्र में इस फैसले को एक महत्वपूर्ण विकास के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि यह आदेश भविष्य में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत फ्रीज की गई प्रतिभूतियों और बड़े निवेश पोर्टफोलियो से जुड़े मामलों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।
न्यायालय का यह दृष्टिकोण न्यायिक संतुलन, आर्थिक व्यावहारिकता और संपत्तियों के मूल्य संरक्षण के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे यह संदेश भी जाता है कि कानूनी प्रक्रिया के दौरान संपत्तियों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उनके आर्थिक मूल्य की रक्षा भी समान रूप से आवश्यक है।
Updated on:
02 Jun 2026 09:18 pm
Published on:
02 Jun 2026 09:18 pm
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