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ईद से पहले हिंदू महिला ने दी मुस्लिम भाई को ऐसी ईदी, जिससे मिली उन्हें नई जिंदगी

नोएडा में हिंदू और मुस्लिम महिला ने एक-दूसरे के पति को यह तोहफा दिया है, जिसे ईदी से कम नहीं कहा जा सकता है
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नोएडा

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sharad asthana

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Updated: 15 Jun 2018, 5:57 PM IST

noida jp hospital

ईद से पहले हिंदू महिला ने दी मुस्लिम भाई को ऐसी ईदी, जिससे मिली उन्हें नई जिंदगी

नोएडा। पूरे देश में शनिवार को ईद मनाई जाएगी। इस दिन सभी लोग एक-दूसर को गले मिलकर अपने प्रियजनों को मुबारकबाद देंगे। वहीं, ईद-उल-फितर से ठीक पहले ही एक हिंदू महिला ने मुस्लिम भाई को ऐसी ईदी दी है, जिसे भुला पाना उनके लिए नामुमकिन होगा। हालांकि, मुस्लिम महिला ने भी अपने हिंदू भाई को बेशकीमती तोहफा देकर हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल को कायम किया है। गंगा जमुनी तहजीब की यह मिसाल नोएडा में देखने को मिली है। नोएडा में हिंदू और मुस्लिम महिला ने एक-दूसरे के पति को यह तोहफा दिया है, जिसे ईदी से कम नहीं कहा जा सकता है। दोनों के लिए लिए यह ईद जीवन की सबसे बढ़िया ईद होगी। इसे भुला पाना उनके लिए मुश्किल होगा।

हिंदू और मुस्लिम महिला ने एक-दूसरे के पति को दी किडनी

भाईचारे की यह मिसाल नोएडा के जेपी अस्पताल में देखने को मिली। यहां हिंदू और मुस्लिम महिला ने एक-दूसरे के पति को किडनी देकर उनकी जान बचाई है। डॉक्टरों के अनुसार, हिंदू मरीज की पत्नी का ब्लड ग्रुप मुस्लिम रोगी से और मुस्लिम महिला का हिंदू मरीज से मैच हुआ था। दोनों की जान बचाने के लिए डॉक्टरों ने उन्हें एक-दूसरे के पति को किडनी देने की सलाह दी थी। इस सलाह पर दोनों राजी हो गईं, जिसके बाद मरीजों का ऑपरेशन किया गया।

दोनों की एक ही समस्या

43 वर्षीय अनिल कुमार ने बताया कि वह बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर यहां आए थे। यहां पर वह मुजफ्फरनगर निवासी इकराम से मिले। उनकी भी पत्नी का ब्लड ग्रुप उनसे नहीं मिलता था। वहीं, मुजफ्फरनगर के रहने वाले 53 साल के इकराम का कहना है कि उनका ब्लड ग्रुप बी पॉजीटिव है जबकि उनकी पत्नी का ब्लड ग्रुप ए पॉजीटिव है। ऐसे में वह उनको किडनी नहीं दे सकती थी। जेपी अस्पताल में उनकी मुलाकात अनिल से हुई। उनकी भी यहीं समस्या थी। डॉक्टरों की सलाह पर किडनी ट्रांसप्लांट के लिए सहमत हो गए थे।

हाई ब्लड प्रेशर की वजह से खराब हुई थीं किडनियां

जेपी अस्पताल के डॉ. अनिल प्रसाद भट्ट ने बताया कि दोनों मरीजों की किडनियां हाई ब्लड प्रेशर की वजह से खराब हुई थी। इनको डाेनर नहीं मिल पा रहा था। अनिल की पत्नी लीला का ब्लड ग्रुप इकराम से और इकराम की पत्नी बालो का ब्लड ग्रुप अनिल से मैच हो रहा था। दोनों की पत्नियां एक-दूसरे की जान बचा सकती थी। यह देखते हुए उनको एक-दूसरे के पति को किडनी देने की सलाह दी गई थी। अब ऑपरेशन के बाद दोनों ही डोनर और मरीज ठीक हैं। उनका कहना है कि इससे दोनों की जान भी बच गई और सामाजिक भाईचारे की एक मिसाल भी कायम हो गई। टीम में किडनी ट्रासप्लांट विभाग के डॉ. अमित देवरा, डॉ. मनोज अग्रवाल व डॉ. एलपी चौधरी और नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. अनिल प्रसाद भट्‌ट, डॉ. भीमराज और डॉ. हारून शामिल रहे।