नोएडाः
अक्सर देखा जाता है कि एक बेटा अपने पिता की इच्छाआें को पूरा करता है फिर
चाहे वो उनके जिंदा होने के दौरान हो या फिर जिंदगी के बाद। लेकिन आज एक
पिता ने अपने बेटे की अंतिम इच्छा पूरी। करते भी क्यों ना। बेटा जिसने देश
की खातिर अपने प्राणों की आहुति दे दी। बेटे की इच्छा थी कि जिस चोटी पर वह
तैनात था वहां उनके पिता या घर वाले आएं। आइए इस आजादी के जश्न के मौके पर
आपको भी एेसी ही कहानी से रूबरू कराते हैं। पिता द्वारा अपने पुत्र की
अंतिम इच्छा पूरी करने की कहानी को भारतीय सेना के पूर्व जनरल आैर सेंट्रल
गवर्नमेंट में मिनिस्टर ने अपनी फेसबुक पर लिखी है।
परिवार केेे लिए छाेड़ गए थे अंतिम संदेश
कारगिल
युद्ध में एक अति महत्वपूर्ण चोटी पर भारतीय परचम लहराने के प्रयास में 22
साल की आयु में कैप्टन विजयंत थापर वीरगति को प्राप्त हुए। जाते जाते एक
अविश्वसनीय जीत वे भारत की झोली में डाल गए जो संभवतः युद्ध का निर्णायक
मोड़ था। कैप्टन थापर अपने परिवार के लिए जो अंतिम सन्देश छोड़ कर गए, उससे
किसी की भी आंखें नम होना स्वाभाविक है। उन्होंने अपनी एक इच्छा भी व्यक्त
की कि यदि संभव हो तो उनके परिवार वाले उन ऊंचे पर्वतों पर आयें और देखें
जहां उनके जैसे सैनिक वीरतापूर्वक देश के लिए लड़ते हैं।
हर जन्म करना चाहते हैं देश ही सवा
उन्होंने
अपनेे पत्र में आैर भी काफी कुछ लिखा था। उन्होंने लिखा कि उन्हें किसी
चीज़ का मलाल नहीं है, और अगले जन्म में यदि वे इंसान बने तो उनकी फिर से
भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने की कामना है। वे चाहते थे कि
उनका बलिदान अन्य सैनिकों को प्रेरणा दे सके। साथ ही साथ वे यह भी चाहते थे
कि मरणोपरांत उनके शरीर को अंगदान में उपयोग किया जाए।
पिता ने उठाया बीड़ा
कैप्टन
विजयंत थापर के पिता कर्नल विजेंद्र थापर ने अपने शहीद बेटे की अंतिम
इच्छा पूरा करने का बीड़ा उठाया। मगर कर्नल थापर 58 वर्ष के हैं और 16,000
फ़ीट की ऊंचाई पर वह पर्वत एक असाध्य लक्ष्य था। जवान बेटे को खोने की पीड़ा
इन्सान को तोड़ देती है। परन्तु पिता ने अपने शहीद बेटे को श्रद्धांजलि देने
के लिए उस पर्वत की तरफ कदम बढ़ा दिए। बूढ़ी टांगे, पीड़ादायक तापमान एवं
वायु-दबाव और कठिन चढ़ाई। अपने बेटे का अंतिम पत्र थामे हुए एक एक कदम आगे
बढ़ाते हुए कर्नल थापर चलते गए और आखिरकार वह विशाल पर्वत उनके दृणनिश्चय के
आगे छोटा सिद्ध हो गया।

kargil martyr, Capt. Vijyant Thapar" title="करगिल में बहादुरी से लड़े शहीद कैप्टन विजयंत थापर, याद करेगा देश" width="646" height="416">
पिता पुत्र को नमनजनरल वीक सिंह ने
कहा कि यह यात्रा एक पुत्र की अंतिम इच्छापूर्ती के लिए एक पिता की
तीर्थयात्रा थी। गर्व से कहिये कि हमारी सेना भारतीय सेना है। यहां देश की
रक्षा बंदूकों से नहीं, बल्कि त्याग, मान और चरित्र से करना एक मर्यादा है।
वीर पिता-पुत्र को मेरा सलाम।