
surya in kundali
नोएडा। अपने भविष्य को सुरक्षीत रखने के लिए कई जतन करते हैं। जिसमें ग्रह, राशि और सितारों के मेल को इस तरह से सामंजस्य बैठाने की कोशिश करते हैं। लेकिन कई बार कुछ ऐसा छूट जाता है जिसकी वजह से भाग्य में कई काम रुक जाते हैं यै परेशानियां आने लगती हैं। इन्हीं ग्रहों में सूर्य भी आता है।
surya को ग्रहों का राजा कहा जाता है। ऐसे में जब किसी की kundali में सूर्य मजबूत हों तो फिर आपका भाग्य काफी मजबूत हो जाता है। वैसे भी कहा जाता है कि किसी व्यक्ति पर किसी राजा यानी किसी दमदार व्यक्ति की कृपा हो जाए तो कहना ही क्या। इसी बारे में पंडित कमल नयन तिवारी बता रहे हैं की सूर्य ग्रह के बारे में।
Kundali में सूर्य ग्रह का मजबूत होना जरूरी-
कुडंली में सूर्य के मजबूत होने से मतलब उसका कुंडली में उच्च होना या फिर स्वग्रही होने से है। लेकिन कई बार देखा गया है कि कुंडली में सूर्य उच्च, स्वग्रही होने के बाद भी जातक पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता है। ऐसे में भाव, भावेश, कारक पर विचार करना चाहिए। किसी की कुंडली में सूर्य उच्च यानी मेष राशि और स्वग्रही यानी सिंह राशि में होने के बाद जरूरी नहीं है कि उसे अच्छी सरकारी नौकरी ही मिल जाए, ये जरूरी नहीं कि उसके लिए राजनीति का क्षेत्र अच्छा हो। अगर सूर्य छठे, 8वें, या फिर 12वें भाव में मजबूत भी तो भी उतना अच्छ परिणाम नहीं पाता।
क्यों साथ नहीं देता सूर्य ग्रह-
यही नहीं किसी की कुंडली में बुध आदित्य योग बनना बहुत अच्छा माना गया हो, लेकिन अगर वहां बुध की स्थिति सही न तो भी उसका पूर्ण फल नहीं मिल पाएगा। यही नहीं उच्च के सूर्य के साथ अगर राहु, केतु, शनि, बैठा हो तो सूर्य प्रभावी नहीं होता। कई बार तो यह भी देखने को मिला है कि उच्च के सूर्य की अपेक्षा नीच का सूर्य नीच भंग होने से उससे अच्छा परिणाम देता है। तीसरे, 9वें, 10वें और 11वें भाव में सूर्य का मजबूत होकर बैठना अच्छा परिणाम देता है।
इन मंत्रों का करें जाप-
कुंडली में सूर्य के अशुभ होने पर नेत्र विकार, कुष्ठ, चर्म रोग, क्षय, अतिसार सहित कई रोग-दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सूर्य को मजबूत करने, अच्छा परिणाम पाने के लिए आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करना सबसे लाभदायक होता है। यही नहीं सूर्य के दोष को शांत करने के लिए माणिक्य धारण करें, साथ ही उसके मंत्र का 7 हजार जाप कराएं। साथ ही हर रोज उगते सूर्य को अर्घ्य दें और हाथ जोड़कर इस मंत्र का पाठ करें। साथ ही सूर्य नमस्कार करने से भी सूर्य देव प्रसन्न होते हैं।
आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने।
जन्मान्तरसहस्रेषु दारिद्रयं नोपजायते।।
Updated on:
21 Sept 2018 08:50 am
Published on:
10 Sept 2018 10:17 am
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