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Nag panchami 2018: इस दिन है नागपंचमी, मनाने के पीछे है यह बड़ा कारण

Nag panchami 2018: इस तारीख को होगी नाग देवता की पूजा। भक्त पिलाएंगे दूध।

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नोएडा। हिंदू धर्म में सांप को भी देवता मानकर पूजा जाता है। प्राचीनकाल से ही हिंदू धर्म में नागपंचमी के दिन सांपों की पूजा की जाती रही है। नागपंचमी का पर्व मनाने के पीछे कई रोचक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। हिंदुओं के अाराध्‍य देवताओं का सांपों के प्रति विशेष लगाव प्राचीन काल से ही है। शेषनाग पर लेटे भगवान विष्‍णु हों या फिर कंठ में सर्परूपी माला धारण करने वाले भगवान शिव। यहां तक कि मां पार्वती के कई मंदिरों में भी नागों की विशेष पूजा होती है। लोग मां दुर्गा के प्रारंभिक स्‍वरूप के रूप में भी नागों की पूजा करते हैं।

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नोएडा के सेक्टर-2 स्थित लाल मंदिर पुजारी पं. विनोद कुमार शास्त्री के मुताबिक सावन मास के शुक्‍ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी मनाई जाती है। जो कि इस बार 15 अगस्‍त को है। वहीं देश के कई भागों में सावन के कृष्‍ण पक्ष की पंचमी को भी नागपंचमी के रूप में मनाया जाता है। हिंदू पुराणों में नागों को पाताल लोक या फिर नाग लोक का स्‍वामी माना जाता है। नागपंचमी के दिन सर्पों की देवी मनसा देवी की विशेष पूजा भी की जाती है। दक्षिण भारत में हिमालय श्रृंखला के शिवालिक पर्वत पर मनसा देवी का विशाल मंदिर स्थित है।

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मान्‍यता है कि भगवान शिव के अंश से ही मनसा देवी की उत्‍पत्ति हुई थी। इन्‍हें नाग वंश की देवी और नागराज वासुक की बहन भी माना जाता है। मान्‍यता है कि नागपंचमी के दिन मनसा देवी की आराधना करने से भक्‍तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और नाग दंश का भय दूर होता है। नागपंचमी के दिन सांपों को दूध अर्पित करके भक्‍तजन अपने परिवार की सुख, समृद्धि और सुरक्षा की कामना करते हैं। भारत के अलावा यह त्‍योहार पड़ोसी देश नेपाल में भी धूमधाम से मनाया जाता है।

नागपंचमी मनाने के पीछे है यह कथा
पुराणों में बताया गया है कि एक बार कालिया नाग ने पूरी यमुना नदी के पानी में अपने शरीर से विष घोल दिया था। बृजवासियों के लिए नदी का पानी जहर बन चुका था। फिर विष्‍णु के अवतार भगवान कृष्‍ण ने बृजवासियों की समस्‍या के निवारण के लिए कहानी रची। ए‍क दिन वह गेंद ढूढ़ने के बहाने से यमुना में कूद गए और वहां डेरा डाले कालिया नाग को युद्ध में पछाड़ दिया। युद्ध में पराजित होने के बाद कालिया नाग ने नदी में घुले अपने संपूर्ण विष को वापस ले लिया। उस दिन सावन माह की पंचमी तिथि थी। इसके बदले में भगवान कृष्‍ण ने कालिया नाग को वरदान दिया कि जो भी पंचमी के दिन सर्प देवता को दूध पिलाएगा उसके जीवन से सारे कष्‍ट दूर हो जाएंगे। उसी दिन से हिंदू धर्म में नागपंचमी का त्‍योहार मनाने की परंपरा शुरु हो गई।