
नोएडा। शहर के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने और यहां निकलने वाले कचरे का उचित निस्तारण न करने व सीवर के पानी को बिना ट्रीट किये यमुना नदी में डालने पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नोएडा प्राधिकरण पर एक करोड़ और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर दो करोड़ का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना एनजीटी में दायर एक याचिका पर एनजीटी ने केंद्रीय नियंत्रण प्रदूषण बोर्ड के जांच करने के बाद लगाया है।
दरअसल, इस वर्ष सेक्टर 137 निवासी अभीष्त गुप्ता ने एक याचिका एनजीटी में दायर की थी। जिसमें पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की बात कहते हुए उचित कारवाई करने का अनुरोध किया गया था। जिस पर एनजीटी ने केंद्रीय नियंत्रण प्रदूषण बोर्ड को जांच करने के निर्देश दिए थे। केंद्रीय नियंत्रण प्रदूषण बोर्ड ने यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नोएडा प्राधिकरण के सदस्यों जांच की टीम बनाई थी।
जांच के दौरान नोएडा में जांच की गई तो नालों में ऐसी कई गंदगी पाई गई, जिसे बिना ट्रीट किए नदी में सीधा नहीं डाल सकते। वह यमुना नदी में डाली जा रही थी। जांच टीम में शामिल यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अनिल सिंह ने बताया कि उस दौरान शहर के चार प्रमुख नालों की जांच कर रिपोर्ट सौंप दी गई थी। केंद्रीय नियंत्रण प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार नोएडा की नालों से 216 एमएलडी पानी निकलता है, जबकि 152 एमएलडी ही ट्रीट हो पाता है, बाकी सीधे नाले में डाला जा रहा है। नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी राजेश कुमार ने बताया कि जुर्माने के बारे में नोएडा प्राधिकरण को अभी तक कोई पत्र नहीं मिला है।
वहीं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को शहर से निकने वाले कचरे का उचित निस्तारण नहीं करने का दोषी पाया गया है। एनजीटी की ओर से सॉलि़ड वेस्ट मैनेजमेंट एवं अनुशरण समिति के सदस्यों ने जांच में पाया कि ग्रेटर नोएडा में गड्ढा खोदकर उसमें कूड़ा भरा जा रहा है। इसके लिए समिति ने ग्रेटर नोएडा 2 करोड़ का पर्यावरण जुर्माना लगाया है और निर्देश दिया कि यदि एक साल में वैज्ञानिक तरीके से कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं हुई तो 3 करोड का जुर्माना देना पड़ेगा।
समिति को ग्रेटर नोएडा के निरीक्षण में कचरे के निस्तारण की स्थिति काफी खराब मिली। यहां के लखनावली गांव में वर्ष 2007 में से कचरा भरा जाता मिला। नवंबर 2018 में जब समिति के सचिव और पूर्व जज राजेंद्र सिंह ने निरीक्षण किया तब यहां कूड़ा गिराया जा रहा था। मई 2019 में दोबारा अनुश्रवण समिति ने निरीक्षण किया तो यहां कचरा गिराया जाना तो बंद हो गया था, लेकिन जेसीबी मशीन जगह-जगह गड्ढे खोदकर उसमें कूड़ा भर रही थी। इसके लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर भी जुर्माना लगाया गया है।
गाजियाबाद नगर निगम पर भी एक करोड़ का जुर्माना
एनजीटी ने गाजियाबाद नगर निगम पर भी एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना खोड़ा क्षेत्र में सीवर का पानी बिना ट्रीट किए दिल्ली पीडब्लूडी के ड्रेनेज सिस्टम में डालने को लेकर लगाया गया है। एनजीटी ने नगर निगम को हिदायत दी गई है कि सीवर से निकलने वाले गंदे पानी को ट्रीट करने की पूर्ण व्यवस्था की जाए।
Published on:
27 Jun 2019 04:58 pm
बड़ी खबरें
View Allनोएडा
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
