2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Exclusive: जरा सी बारिश नहीं झेल पा रही सवा करोड़ की आॅटोमेटिक बस

इन बसों के संचालन और देखरेख का जिम्मा नोएडा अथॉरिटी के पास है. लेकिन अफसरों की जिम्मेदारी सिर्फ इसके गड़बड़ियों (भ्रष्टाचार और मनमानी) तक सीमित है

3 min read
Google source verification

image

Rajkumar Pal

Aug 07, 2017

NMRC

नोएडा, पत्रिका टीम। नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एनएमआरसी) की एसी बस सेवा की पोल पहली बारिश में ही खुल गई. करोड़ों की लागत वाली इस बस का ढांचा इतना खराब और हल्का है कि बारिश में छत से पानी टपक रहा है. सड़क पर अगर पानी जमा है और बस उसमें से गुजर जाए तो बाहर का पानी अंदर आ जाता है.

सूत्रों के अनुसार इन बसों के संचालन और देखरेख का जिम्मा नोएडा अथॉरिटी के पास है. लेकिन अफसरों की जिम्मेदारी सिर्फ इसके गड़बड़ियों (भ्रष्टाचार और मनमानी) तक सीमित है. सभी एक दूसरे पर जिम्मेदारी टालते हुए कुछ भी कहने से बच रहे हैं.

किराया दोगुना, सुविधा पुरानी

नोएडा अथॉरिटी ने एनएमआरसी के तहत शहर में यात्रियों की सहूलियत के लिए एसी बस सेवा शुरू की गई थी. सूत्रों के अनुसार शुरुआत से ही करीब 50 एसी बसें अलग-अलग रूट पर चल रही हैं. करीब सवा करोड़ की कीमत वाली इस ऑटोमेटिक बस पर अथॉरिटी के अधिकारी खास मेहरबानी दिखाते हैं. बस का किराया दूसरी अन्य बसों से करीब दोगुने से भी ज्यादा है. लेकिन सेवा वही पुराने ढर्रे वाली।

सड़क पर ही बना दिया बस स्टैंड

अथॉरिटी ने बोटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन के बगल में इन बसों के लिए करोड़ों की लागत से बस स्टैंड बनवाया है, जबकि कमाई देने वाली दूसरी बसें बाहर खड़ी होती हैं. दिलचस्प ये है कि बस स्टैंड के ऑफिस में लाइट और पंखा नहीं है. जिससे कर्मचारी बाहर खुले में बैठते हैं. वहीं नोएडा सेक्टर 62 में इन बसों का स्टैंड सड़क पर ही बना दिया गया, जिससे वहां दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है.

6 महीने में खराब होने लगी बस

बसों का मेंटेनेंस नहीं होने से इनकी हालत 6 से 8 माह में खराब होने लगी है. अथॉरिटी के पास बस के लिए टेक्निकल ग्रेड के कर्मचारी नहीं होने से इनके रखरखाव में भी दिक्कत आ रही हैं. सूत्रों का कहना है कि बस बनाने वाली कंपनी ने जो सामान इसमें इस्तेमाल किया है उनकी क्वालिटी भी अच्छी नहीं है.

चालक-परिचालक गड़बड़ी कर रहे

इन बसों के लिए एक प्राइवेट कंपनी की मदद से चालकों और परिचालकों की भर्ती की गई. लेकिन इन्होंने खुद ही गड़बड़ियां शुरू कर दीं. शिकायतें बढ़ीं तो कुछ लोगों की जांच करवाई गई और आनन- फानन में उन्हें हटा दिया गया. अब तक करीब 30 चालक-परिचालक हटा दिए गए हैं. यही नहीं जो चालक-परिचालक अभी हैं, उनकी निगरानी के लिए अलग से टीम बनाई गई है.

दूसरी बार फंड देने से मना किया

सूत्रों के अनुसार नोएडा अथॉरिटी ने एनएमआरसी को बस खरीदने के लिए फंड दिया था. इसके बाद एनएमआरसी ने दूसरे फेज में बस खरीदने के लिए फंड मांगा तो अथॉरिटी ने मना कर दिया. कारण ये है कि ये बसें घाटे में चल रही हैं, जिससे एनएमआरसी ने पहले फेज का पैसा अथॉरिटी को नहीं चुकाया. अथॉरिटी का कहना है पहले फेज का पैसा एनएमआरसी भरे तब दूसरे फेज के लिए फंड जारी करेंगे.

मैं कुछ नहीं बोलूंगा

इस बारे में पत्रिका ने जब एनएमआरसी के जीएम सीडी उपाध्याय से बात की तो उन्होंने यह कह कर फोन काट दिया की, मैं किसी भी बारे में कुछ भी नहीं बता पाउंगा.







ये भी पढ़ें

image