
नोएडा। शहर में पिछले काफी समय से आवारा कुत्तों का आतंक इस हद तक बढ़ गया है कि अब लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने में भी डर लगने लगा है। वहीं आए दिन शहर में घूम रहे आवारा कुत्ते मासूम बच्चों को अपना शिकार बना रहे हैं। तीन-चार दिन पहले भी सेक्टर-100 स्थित एक सोसायटी के बाहर आवारा कुत्तों ने एक मासूम को नोंच डाला था, जिसके चलते उसके शरीर में तीन इंच तक गहरे जख्म हो गए थे, लेकिन शायद प्राधिकरण के अधिकारियों की नींद अभी तक नहीं खुली है। इसी के चलते अब शहर की विभिन्न सोसायटियों के लोगों को पैदल सोसायटी से बाहर निकलने में भी डर लगता है। लोगों का कहना है कि वह इस बाबत एसपीसीए (कुत्तों की नसबंदी करने वाली एजेंसी) से कई बार शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
रोजाना 750 से अधिक लोग हो रहे कुत्ते-बंदर का शिकार
सीएमओ द्वारा दिए गए आंकड़ों पर अगर गौर किया जाए तो सिर्फ शहर ही नहीं बल्कि पूरे जिले में कुत्तों का आतंक है। इसके चलते जिलेभर में रोजाना 750 से अधिक लोगों को कुत्ते-बंदर के काटने पर रैबीज का इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। इसमें अकेले जिला अस्पताल में ही रोजाना 370 से 400 लोग रैबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले कुत्तों के काटने से पहुंच रहे हैं। इसके बाद बंदर, चूहा व चमगादड़ भी लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।
बच्चों और बुजुर्गों को शिकार बना रहे कुत्ते
बता दें कि पिछले दिनों कुत्तों के काटने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पीड़ितों में बच्चे और बूढ़े लोगों की तादाद ज्यादा है। वहीं कई मामले ऐसे भी हुए हैं, जहां आवारा कुत्तों ने मासूम बच्चों को बुरी तरह नोंच डाला। ऐसा ही मामला पहले सेक्टर-29 स्थित गंगा कॉम्पलेक्स में हुआ था। अभी हाल ही में सेक्टर-100 स्थित लोटस बुलवार्ड सोसायटी में कुत्तों ने बच्ची को बुरी तरह नोंच डाला।
मरीज को दी जाती हैं तीन डोज
कुत्ते, बंदर, चमगादड़ व चूहा काटने से लोगों को रेबीज नामक बीमारी न हो, इसके लिए पांच डोज दी जाती है। इसमें पहली डोज 24 घंटे के भीतर, दूसरी डोज तीसरे दिन और तीसरी डोज सातवें दिन दी जाती है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. रमेश शर्मा ने बताया कि जब भी किसी व्यक्ति को कुत्ता , बंदर, चमगादड़ व चूहा काट लेता है तो उसे प्रिकॉशन के तौर पर रैबीज का इंजेक्शन लगाया जाता है। इसमें तीन डोज ही लगवानी पड़ती हैं। उन्होंने बताया कि अगर मरीज रैबीज का शिकार हो जाए तो उसे पानी से डर लगता है और वह काफी आक्रामक हो जाता है। इसके साथ ही वह कुत्ते की तरह भाग व भौंक भी सकता है और अचानक बेहोश हो सकता है। इतना ही नहीं रैबीज होने पर मरीज की मौत तक हो जाती है। सीएमओ डॉ. अनुराग भार्गव ने बताया कि जिले में अब रैबीज के रोजाना करीब 750 इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इसमें सबसे ज्यादा मामले कुत्ते के काटने के आते हैं।
क्या कहते हैं शहर के लोग
शहर के लोगों की मानें तो प्रशासन द्वारा सही कदम नहीं उठाए जाने से आए दिन कुत्तों द्वारा काटने जैसी घटनाएं हो रही हैं। सेक्टर-20 में रहने वाले शशि कुमार बताते हैं कि हाल ही में हुई घटनाओं के बारे में सुनकर अब वह अपने बच्चों को अकेले बाहर नहीं जाने देते क्योंकि उनके सेक्टर के अंदर यूं ही आवारा कुत्ते घूमते नजर आते हैं। वहीं, सेक्टर- 23 के निवासी लोकेश श्रीवास्तव का कहना है कि शहर में जिस तरह आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ रही है, वह चिंता का विषय है और प्रशासन को जल्द से जल्द इस पर कोई कदम उठाना चाहिए। सेक्टर-34 के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष देवेंद्र कुमार वत्स ने बताया कि उनके सेक्टर में दर्जन भर से अधिक आवारा कुत्ते हैं जो कि अब तक कई लोगों को काट चुके हैं। इसकी शिकायत कई बार प्राधिकरण को की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले में जब प्राधिकरण के अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
Updated on:
07 Jan 2018 04:04 pm
Published on:
07 Jan 2018 12:03 pm
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