
इस जिले में बिना रजिस्ट्री अपने घरों में रह रहे हैं 50 हजार लोगों को मिली बड़ी राहत
नोएडा। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में बिना रजिस्ट्री के अपने फ्लैटों में अवैध रूप से रह रहे 50 हजार आवंटियों को राहत मिलने जा रही है। इसके लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। डीएम बीएन सिंह ने साफ कर दिया कि बिल्डर्स और डेवलपर्स ने यदि दो माह के भीतर आवंटियों के पक्ष में एग्रीमेंट फॉर सब लीज का पंजीकरण नहीं कराया तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बिल्डरों ने सब लीज ट्रांसफर डीड का रजिस्ट्रेशन कराए बगैर दे दिया था कब्जा
नोएडा के सेक्टर-27 स्थित कैंप कार्यालय में डीएम बीएन सिंह ने बताया कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण क्षेत्र में बिल्डर्स और डेवलपर्स ने आवंटी के पक्ष में सब लीज ट्रांसफर डीड का रजिस्ट्रेशन कराए बगैर फ्लैटों पर कब्जा दे दिया है। यह पूरी तरह से अवैध और नियम विरुद्ध है। ऐसे आवंटियों की सख्या लगभग 50 हजार है। आवंटियों ने फ्लैट का पूरा मूल्य चुका दिया है। उस पर कब्जा पाना उनका हक है, लेकिन उनके पास कोई भी ऐसा दस्तावेज नहीं है, जिससे वे अपने को उस फ्लैट का स्वामी होने का सबूत दे सकें। बायर्स के हक में यह फैसला किया गया है कि एग्रीमेंट फॉर सब लीज के पंजीकरण के समय यदि पूरा स्टांप शुल्क अदा किया जा चुका है, तो सब लीज के रजिस्ट्रेशन के समय सिर्फ 50 रुपये का ही स्टांप शुल्क देना होगा। आवंटी के लिए भी यह सुविधाजनक होगा, क्योंकि यदि लीज डीड के निस्पादन के समय सर्किल रेट में उस संपत्ति का मूल्य बढ़ भी जाता है तो भी अतिरिक्त स्टांप शुल्क नहीं देना होगा। उन्हें सिर्फ 50 रुपये का ही स्टांप शुल्क देना होगा।
आवंटियों के पक्ष में नहीं हुआ रजिस्ट्रेशन
डीएम के अनुसार, सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि अनेक बिल्डर्स और डेवलपर्स ने 50 हजार आवंटियों को फ्लैट्स और व्यावसायिक यूनिटों पर कब्जा तो दे दिया, लेकिन कोई ठोस कागजी कर्यवाही और रजिस्ट्रेशन आवंटियों के पक्ष में नहीं कराया गया। इससे जहां राज्य सरकार को स्टांप राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं संपूर्ण भुगतान के बावजूद आवंटियों को टाइटिल डीड से वंचित होना पड़ रहा है। यह स्थिति गैर कानूनी है। यह अवैध काम करने वाले 30 बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके बाद छह बिल्डरों ने अपने आवंटियों के पक्ष में ट्रांसफर डीड का पंजीकरण शुरू करा दिया है, लेकिन यह संख्या बेहद कम है। इससे न तो सरकार को राजस्व मिल रहा है और न ही आवंटियों को कोई राहत मिल पा रही है। डीएम का कहना है की एग्रीमेंट फॉर सब लीज का काम द्विपक्षीय किया जा सकता है। इसमें तीसरे पक्ष यानि प्राधिकरण की आवश्यकता सब लीज डीड के निष्पादन के समय ही होगी।
Published on:
20 Dec 2018 09:32 am

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