सरकारी नौकरियों में भर्ती कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दो कांस्टेबल और गृह मंत्रालय का कर्मचारी भी शामिल

Highlights:

-सेक्टर-62 से तीन साल्वर सहित नौ लोग गिरफ्तार किए गए हैं

-इनमें से दो दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल हैं

-एक आरोपित ने साल्वर बैठाकर रक्षा मंत्रालय में एएसओ के पद पर नौकरी पाई है

By: Rahul Chauhan

Published: 29 Nov 2020, 09:03 AM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

नोएडा। सेक्टर 58 थाना पुलिस ने सरकारी नौकरियों में भर्ती कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने नोएडा के सेक्टर-62 से तीन साल्वर सहित नौ लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इनमें दिल्ली पुलिस के दो सिपाही भी शामिल है। सिपाही का मौसेरा भाई अर्पित मुख्य सॉल्वर है। जबकि दिनेश मुख्य सरगना है। इनके पास से तीन कार, दो लाख 10 हजार रुपये नकद, दिल्ली पुलिस की दो वर्दी, मोबाइल व फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं। गिरोह ने अब तक करीब 100 लोगों को भर्ती कराया है। गिरोह यूपी, दिल्ली और हरियाणा में सक्रिय था।

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पुलिस कि गिरफ्त में खड़े दिनेश जोगी, शिव कुमार, अर्पित, रविन्द्र, मंजीत, अमन, सोनू और दिनेश चौधरी व मुकेश निवासी प्रतियोगी परीक्षाओं में आवेदक की जगह साल्वर बैठाकर नौकरी दिलाने वाले गिरोह के सदस्य है। एडिशनल पुलिस कमिश्नर लॉं एंड ऑर्डर लव कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कोतवाली सेक्टर-58 पुलिस ने इस गिरोह का पर्दाफाश कर सेक्टर-62 से तीन साल्वर सहित नौ लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इसमें से दो दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल हैं। आरोपित दिनेश जोगी गिरोह का सरगना है। उसने खुद साल्वर बैठाकर रक्षा मंत्रालय में एएसओ के पद पर नौकरी पाई है। कुछ दिनों में उसकी ज्वाइनिग होने वाली थी। रविन्द्र व मंजीत दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल हैं। रविन्द्र दिल्ली के मुंडका व मंजीत वेलकम थाने में तैनात है। अर्पित, अमन व दिनेश साल्वर हैं। शिव कुमार दिल्ली पुलिस की परीक्षा में आवेदक है।

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एडिशनल पुलिस कमिश्नर ने बताया कि शनिवार को सेक्टर-62 स्थित आइओन डिजीटल जोन में दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल पद के लिए परीक्षा थी। वहां तीनों साल्वर दूसरे आवेदकों की जगह परीक्षा देने आए थे। संदेह के आधार पर वहां पकड़े गए। कोतवाली सेक्टर-58 पुलिस मौके पर पहुंची। पूछताछ के बाद सेक्टर-62 से ही छह अन्य आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। दिल्ली पुलिस के दोनों कांस्टेबल गिरोह के सरगना को साल्वर उपलब्ध कराते थे। गिरोह में शामिल आरोपित आवेदकों के आवेदन भरने से लेकर परीक्षा देने तक का काम करते थे। एक एप के जरिये आवेदक व साल्वर की तस्वीर का उपयोग कर मिलती जुलती तस्वीर तैयार कर पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देते थे। परीक्षा केंद्र पर आइडी दिखाने के लिए फर्जी तरीके से बल्लभगढ़ से ड्राइविग लाइसेंस भी बनवाते थे। पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ में एक आयकर इंस्पेक्टर और गृह मंत्रालय में तैनात एक कर्मचारी की भूमिका भी सामने आई है। आयकर इंस्पेक्टर पकड़े गए एक आरोपित का रिश्तेदार बताया जा रहा है।

एडिशनल पुलिस कमिश्नर का कहना है कि पिछले करीब तीन वर्षों से यह गिरोह सक्रिय है। करीब 100 लोगों को इस प्रकार से फर्जीवाड़ा कर नौकरी दिला कर चुके हैं। एक आवेदक से परीक्षा के अनुसार 10 लाख से 20 लाख रुपये तक वसूल करते थे। दिल्ली-एनसीआर में विभिन्न जगहों पर आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ों को अंजाम देता था। परीक्षा के दौरान गिरोह में शामिल आरोपित साल्वर को लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाते थे। इनके पास से तीन कार, दो लाख 10 हजार रुपये नकद, दिल्ली पुलिस की दो वर्दी, मोबाइल व फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं। गिरोह ने अब तक करीब 100 लोगों को भर्ती कराया है। गिरोह यूपी, दिल्ली और हरियाणा में सक्रिय था।

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