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जिस बेटे को पाला, उसी ने नहीं दिया सहारा, अब बीमारी की हालत में जूते पॉलिश कर रहे हैं यह बुजुर्ग

घरवालों ने नहीं दिया सहारा तो अब मोची का काम कर रैन बसेरे में जीवन बिता रहे हैं लकवे से पीड़ि‍त सुंदरलाल

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राहुल चौहान, नोएडा। जहां एक तरफ कड़ाके की ठंड ने लोगों को ठिठुरने पर मजूबर किया हुआ है, वहीं एक 60 वर्षीय व्यक्ति ऐसे भी हैं जो लकवे की बीमारी से पीड़ित होते हुए भी दो वक्त का खाना जुटाने के लिए मोची का काम कर रहे हैं। दरअसल, झांसी के रहने वाले सुंदरलाल सर्दी से बचने के लिए नोएडा स्टेडियम में बनाए गए रैन बसेरे में ठहरे हुए हैं। उन्हें पिछले एक साल से लकवे ने अपनी चपेट में ले रखा है, जिसके चलते उनका एक हाथ काम नहीं करता है।

35 साल से हैं नोएडा में

घरवालों का सहारा नहीं मिलने पर सुंदरलाल पिछले 35 साल से नोएडा में मोची का काम कर रहे हैं, लेकिन अब लकवे की बीमारी ने उन्हें मजबूर कर दिया कि वह मुश्किल से दो वक्त का खाना जुटा पाते हैं। इसके साथ ही उनके पास न तो इलाज कराने के पैसे हैं और न ही रहने के लिए कोई छत। हालांकि वह सरकार से आस लगाए बैठे हैं कि कैसे भी उनकी कोई मदद करे और उनकी बीमारी का इलाज करा दे।

बेटे ने नहीं दिया सहारा

पत्रिका से बात करते हुए सुंदरलाल ने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि उनके परीवार में एक बेटी और एक बेटा है। बेटी की शादी होने के बाद बेटे ने उन्हें सहारा नहीं दिया, जिसके चलते वह अपने घर से आ गए और अब नोएडा में ही अपनी जिंदगी बसर कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां उनके पास रहने की जगह तक नहीं है। वह चौड़ा गांव के बाहर ही बैठकर मोची का काम करते हैं व उससे ही अपनी जीवनी चला रहे हैं। अब इतनी सर्दी पड़ने के कारण वह रैन बसेरे में आकर रोज रुकते हैं।

डॉक्‍टर ने बड़े अस्‍पताल में जाने को कहा

सुंदरलाल ने बताया कि वह जब से बीमार हुए हैं, तब से ही उनका एक हाथ काम नहीं करता लेकिन वह फिर भी किसी तरह से जूते सिलकर व पोलिश करके अपना गुजारा कर रहे हैं। इलाज के लिए वह सबसे पहले दादरी के बंबावड़ गांव गए थे, लेकिन वहां से कोई खास फायदा नहीं हुआ। अभी उनका इलाज जिला अस्पताल से चल रहा है लेकिन वहां डॉक्टर कहते हैं कि किसी बड़े अस्पताल में दिखाओ तो जल्दी आराम होगा।