14 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नोएडा हिंसा का सच: वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर भीड़ को भड़काया, पुलिस कमिश्नर ने बताया कैसे रची गई साजिश

Noida News: नोएडा में हुए हिंसक प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि रातों-रात बनाए गए वॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिए भीड़ को उकसाया गया, जबकि हिंसा में शामिल कई लोग बाहरी थे।

2 min read
Google source verification

नोएडा

image

Mohd Danish

Apr 14, 2026

noida violence whatsapp groups conspiracy

नोएडा हिंसा का सच | Image - X/@ANI

Noida Violence News: उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सोमवार को हुए हिंसक प्रदर्शन ने प्रशासन और पुलिस को चौंका दिया है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि यह हिंसा केवल श्रमिकों का आक्रोश नहीं, बल्कि एक बड़ी और सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकती है। पुलिस का दावा है कि जिन लोगों ने तोड़फोड़ और आगजनी की, वे वास्तविक फैक्ट्री कर्मचारी नहीं थे, बल्कि कर्मचारियों की आड़ में शामिल उपद्रवी तत्व थे।

पुलिस कमिश्नर का बड़ा खुलासा

गौतमबुद्धनगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि मामला पहले ही शांत हो चुका था, लेकिन अचानक कुछ असामाजिक तत्व सामने आए और हिंसा शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि ये लोग आसपास के गांवों से समूह बनाकर आए थे और इन्होंने ही बवाल को बढ़ावा दिया। श्रमिकों के शांत होने के बावजूद बाहरी भीड़ ने स्थिति को भड़काकर हिंसक बना दिया।

वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए उकसावे की साजिश

जांच में यह भी सामने आया है कि इस आंदोलन को हिंसक बनाने के लिए रातों-रात कई वॉट्सऐप ग्रुप बनाए गए। क्यूआर कोड के माध्यम से कर्मचारियों को इन ग्रुप्स से जोड़ा गया और उनमें भड़काऊ संदेश फैलाए गए। पुलिस का मानना है कि यह पूरी तरह से संगठित प्रयास था, जिसका मकसद शांत प्रदर्शन को उग्र बनाना था।

पहले से सतर्क थी पुलिस, फिर भी बिगड़ी स्थिति

पुलिस कमिश्नर के अनुसार हरियाणा में हुए प्रदर्शन के बाद से ही प्रशासन सतर्क था और संवेदनशील क्षेत्रों में फोर्स तैनात कर दी गई थी। हालांकि, बाहरी तत्वों के अचानक शामिल होने की आशंका नहीं थी, जिसके कारण कुछ समय के लिए हालात नियंत्रण से बाहर हो गए, लेकिन पुलिस ने जल्द ही स्थिति को संभाल लिया।

150 से ज्यादा लोग हिरासत में

इस हिंसा के मामले में अब तक 150 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनमें वास्तविक कर्मचारी कितने हैं और बाहरी तत्व कितने। साथ ही यह भी जांच हो रही है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कौन से संगठन या समूह सक्रिय थे।

प्रदर्शन में नहीं था कोई स्पष्ट नेतृत्व

सूत्रों के मुताबिक, पिछले चार दिनों से चल रहे इस प्रदर्शन का कोई स्पष्ट नेता नहीं था। अलग-अलग कंपनियों के कर्मचारी एक जगह इकट्ठा होते थे और धीरे-धीरे भीड़ बढ़ती जाती थी। जब प्रशासन बातचीत के लिए पहुंचा, तो कई लोगों ने खुद को नेता मानने से इनकार कर दिया, जिससे बातचीत में भी बाधा आई।

मजदूरों ने उठाए कई अहम मुद्दे

योगी सरकार का दावा है कि कर्मचारियों के साथ बातचीत के बाद कई मुद्दों पर सहमति बन गई थी। लेकिन कुछ कर्मचारियों का कहना है कि इस सहमति में उद्योग मालिकों की भूमिका नहीं थी। कर्मचारियों ने न्यूनतम मजदूरी, 8 घंटे की ड्यूटी, ओवरटाइम भुगतान और नाइट ड्यूटी अलाउंस जैसे मुद्दों पर स्पष्ट आश्वासन की मांग की है।

अफवाहों से बचने की सलाह

नोएडा प्रशासन ने कर्मचारियों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। डीएम मेधा रुपम ने बताया कि कंपनियों के साथ बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम के लिए समिति बनाई जाएगी, शिकायत पेटियां रखी जाएंगी, हर महीने 10 तारीख तक वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा और कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार को प्राथमिकता दी जाएगी।