
Nalgadha noida
नितिन शर्मा, नोएडा। आजादी में नोएडा के नलगढ़ा गांव की भी काफी अहम भूमिका रही है। उस समय दिल्ली के नजदीक होने के कारण इस गांव में बना विजय सिंह पथिक आश्रम आजादी के दीवानों के लिए महफूज जगह बन गया था। अंग्रेजी सेना पर हमला करने के बाद क्रांतिकारी यहां आसानी से छुप जाते थे। बीहड़ क्षेत्र होने की वजह से अंग्रेजी सेना का यहां पहुंचना संभव नहीं था। शहीद भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद आश्रम में बम बनाते थे। गांव में बिखरी निशानियां आज भी इसकी गवाही देती हैं। असेंबली पर फेंका गया बम भी यहीं बनाया गया था। चंद्रशेखर आजाद के गौत्र के ही करनैल सिंह का परिवार भी इस गांव में रहता है। इस वजह से चंद्रशेखर आजाद करनैल सिंह को अपना भाई मानते थे।
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शहीदों ने यहां बिताए थे तीन साल
करनैल सिंह के बेटे की बहू मनजीत कौर बताती हैं कि चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुखदेव व भगत सिंह जैसे महान क्रांतिकारियों ने नलगढ़ा में पनाह ली थी। यहां रहने वाले सिंधु परिवार के करनैल सिंह ने शहीदों का साथ दिया था। करनैल सिंह कर्नल थे। इसके साथ ही वह सुभाष चंद्र बोष की स्पीच भी पढ़ते थे। उनका परिवार आज भी यहां रहता है। उनके बेटे की पत्नी मनजीत कौर का कहना है कि चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु आैर सुखदेव यहां तीन वर्ष तक छुपकर रहे थे। यहां अंग्रेज सेना पर हमला करने की रणनीति बनाने के अलावा आंदोलन को सही रास्ता देने की भी योजना बनार्इ गर्इ थी। बम बनाने के लिए बारूद व अन्य सामग्रियों को जिस पत्थर पर रखकर मिलाया जाता था, वह आज भी गांव में मौजूद है। पत्थर में दो गड्ढे हैं, जिसमें बारूद को मिलाया जाता था। अब इस पत्थर को लोगों ने गांव के बीच मौजूद गुरुद्वारे में रखा है।
पुरानी तस्वीर आैर अन्य सामान भी है इसका गवाह
मनजीत कौर ने बताया कि दिल्ली से पास होने की वजह से ही भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु आैर सुखदेव ने इसको अपना अड्डा बनाया था। वे सभी यहां जंगल में पत्ते व फल खाकर गुजारा करते थे। इसके साथ ही दिन-रात यहां बारूद आैर हथगोले बनाने का काम भी होता था। जिस पत्थर पर वे सब लोग बारूद पीसते थे, वह आज भी मौजूद है। इतना ही नहीं मनजीत कौर के पास उस समय के फोटो भी मौजूद हैं।
Updated on:
24 Jan 2018 10:55 am
Published on:
24 Jan 2018 10:53 am
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