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देश का इकलौता प्रांत, जहां हर पंचायत में लगती है आरएसएस की शाखा

वेस्ट यूपी के तीनों मंडलों के 14 जिलों की सभी 987 न्याय पंचायतों में चल रही हैं शाखाएं, वर्ष 2015-16 में ही वेस्ट यूपी में शुरू की गई हैं 673 नई शाखाएं

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Sarad Asthana

Mar 17, 2016

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सौरभ शर्मा, नोएडा।
वेस्ट यूपी के तीन मंडलों से बने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) का
प्रांत देश का इकलौता ऐसा प्रांत है, जहां की हर न्याय पंचायत में शाखा
नियमित रूप से चलाई जाती है। इसका फायदा आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा
को मिल सकता है। वहीं, आरएसएस का कहना है कि संगठन और इसे आगे बढ़ाने
का काम काफी तेजी से चल रहा है।


गौरतलब है कि आरएसएस के इस प्रांत में
मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल आते हैं, जिनमें करीब 14 जिले शामिल हैं।
इन सभी जिलों में करीब 987 न्याय पंचायतें काम कर रही हैं। वहीं, वर्ष
2015-16 की बात करें तो 673 नई शाखाओं की शुरुआत इस प्रांत में हुई है।
देश में शुरू हुईं 5524 नई शाखाएं

आरएसएस
के प्रांतीय अध्यक्ष सूर्य प्रकाश टोंक ने बताया कि आरएसएस के साथ हर कोई
जुड़ना चाहता है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक साल
में 5524 नई शाखाओं की शुरुआत हुई। आरएसएस ने अपने संगठन
के तौर पर पूरे देश को 42 प्रांतों में विभाजित किया हुआ है। मौजूदा समय
में पूरे देश में 56,859 शाखाएं चल रही हैं। वहीं, वर्ल्ड वाइड बात करें तो
38 देशों में संघ 820 शाखाएं लग रही हैं। जबकि घाना में दो नई शाखाओं की शुरुआत
हुई है।

वीकली मीटिंग्स में हुआ इजाफा

सूर्य
प्रकाश टोंक के अनुसार, डेली शाखा होने की वजह से वीकली मीटिंग में काफी
इजाफा हुआ है। अगर बात आंकड़ों की करें तो पिछले साल 12847 वीकली मीटिंग
हुई थी, जबकि इस साल इनकी संख्या 13,784 हो गर्इ है। जो अपने आप में एक
रिकॉर्ड है। जबकि मंथली मीटिंग में कमी आई हैं, जो 9008 से 8226
पर आ गई हैं। मंथली मीटिंग के बारे में बताते हुए वह कहते हैं कि इस मीटिंग में वे
लोग शामिल होते हैं, जो अपने हेक्टिक और बिजी शेड्यूल की वजह से वीकली
मीटिंग में शामिल नहीं हो पाते हैं।

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यूथ हो रहा है शामिल

सूर्य
प्रकाश टोंक की मानें तो शाखाओं को ज्वाइन करने वाले लोगों में एक
इंट्रेस्टिंग फैक्ट ये निकलकर सामने आया है कि इसमें अधिक से अधिक युवा शामिल होने
के लिए आ रहे हैं। अगर पिछले साल की बात करें तो हर महीने 8000 नए मेंबर्स
ऑनलाइन कैंपेन के जरिये जुड़े हैं, जबकि वर्ष 2011 में ये आंकड़ा सिर्फ
350 तक ही सीमित था। इस मतलब साफ है कि आने वाले दिनों में देश का यूथ और
भी ज्यादा आरआरएस की ओर मुड़ सकता है।

नहीं है मोदी का असर

क्या
आरएसएस में मेंबरशिप बढ़ने की असली वजह मोदी इफेक्ट है? इस पर टोंक ने कहा
है कि जब मोदी पॉवर में नहीं होंगे, तब भी आरएसएस की
मेंबरशिप में कोई असर नहीं पड़ेगा। ये अपनी इसी रफ्तार से आगे बढ़ता रहेगा।
आज के समय में 1.5 लाख योजनाएं पब्लिक वेलफेयर से जुड़ी चल रही
हैं, जिसमें एजुकेशन, स्वास्थ्य, राष्ट्र निर्माण आदि शामिल हैं।

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तीन साल से हो रहा था ड्रेस कोड पर विचार

आरएसएस का ड्रेस कोड बदले जाने पर उन्होंने कहा कि इस
पर तीन साल से विचार चल रहा था। अब थोड़ी बदलाव की जरूरत महसूस की जा
रही थी। वहीं, यूथ भी निकर पहनने में आरामदायक महसूस नहीं कर रहा था, इसलिए
नागौर की मीटिंग में ड्रेस को चेंज करने का फैसला लिया गया।

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