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प्रतियोगी परीक्षा में पास कराने का ठेका लेने वाले सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश, सरगना समेत चार गिरफ्तार

नोएडा पुलिस ने विभिन्न राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) का पेपर आउट कराने और परीक्षार्थी की जगह नकली परीक्षार्थी को बिठाकर पास कराने का ठेका लेने वाले सॉल्वर गैंग (Solver Gang) का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने प्रतियोगी परीक्षा देने आए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसमें गिरोह सरगना भी शामिल है। ये गैंग एक अभ्यर्थी को पास कराने के नाम पर 8 लाख रुपये तक वसूलता था।

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नोएडा

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lokesh verma

Dec 10, 2021

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नोएडा. कोतवाली सेक्टर-58 पुलिस ने राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) का पेपर आउट कराने और परीक्षार्थी की जगह नकली परीक्षार्थी को बिठाकर पास कराने का ठेका लेने वाले सॉल्वर गैंग (Solver Gang) का पर्दाफाश किया है। नोएडा पुलिस ने प्रतियोगी परीक्षा देने आए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसमें गिरोह सरगना भी शामिल है। पुलिस ने आरोपियों के पास से पांच मोबाइल, पांच पैन कार्ड, पांच आधार कार्ड, 52 हजार रुपये, दो फर्जी प्रवेश पत्र और व्हाट्सएप चैटिंग का प्रिंट आउट बरामद किया है। पुलिस की गिरफ्त में इन आरोपियों के नाम घवेंद्र, विकास कुमार, संजय कुमार और अनीश चाहर है। अनीश ही इस गैंग का सरगना है। पुलिस ने इन चारों आरोपियों को सेक्टर-62 स्थित गुप्ता तिराहे के पास से गिरफ्तार किया है।

नोएडा जोन के अपर पुलिस उपायुक्त रणविजय सिंह ने बताया कि गिरोह का सरगना अनीश है, जबकि राघवेंद्र अभ्यर्थी है। अनीश नौकरी दिलाने के नाम पर छात्रों से पैसे लेकर विकास से मिलवाता था। विकास पैसे लेकर छात्रों के स्थान पर परीक्षा देता था। चारों आरोपी बीएससी पास हैं। यह गिरोह पांच साल से मोटी कमाई कर रहा था। वहीं, आगरा में प्रिंटिंग प्रेस चलाने वाला रिंकू यादव फरार है। परीक्षा दिलवाने के लिए रिंकू फर्जी कागजात तैयार करता था।

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एक परीक्षा में पास कराने के लिए लेते थे 7 से 8 लाख रुपये

रणविजय सिंह ने बताया कि सरगना अनीश चाहर फिरोजाबाद में प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देता है। वहीं छात्रों को नौकरी दिलाने का सौदा करता था। प्रतियोगी परीक्षाओं में पास कराने के लिए वह सात से आठ लाख रुपये लेता था। इसके बाद वह संजय के जरिये विकास से संपर्क करता था। विकास ही दूसरे की जगह परीक्षा देता था। इसके एवज में करीब दो लाख रुपये उसे मिलते थे। विकास ने बताया है कि वह एक दर्जन से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं में वह दूसरे के स्थान पर बैठकर परीक्षा दे चुका है। एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि 9 दिसंबर को विकास को राघवेंद्र की जगह परीक्षा देनी थी। आरोपी दिल्ली पुलिस, जेल वार्डन, आईटीबीपी, एसएससी से लेकर कई तरह की परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करते थे और इनका नेटवर्क यूपी, दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान तक फैला हुआ है।

कुछ युवकों से एडवांस लेकर तोड़ देते थे संपर्क

गिरफ्तार आरोपियों के पास से कई व्हाट्सएप चैटिंग भी मिली हैं। जिससे पता चला है कि ग्रुप बनाकर ये आरोपी अभ्यर्थियों को जोड़ते थे और उन्हें प्रलोभन देकर ठगते थे। इतना ही नहीं कुछ युवकों से ये आरोपी नौकरी दिलाने के नाम पर एडवांस में पैसे भी लेते थे और बाद में संपर्क ही नहीं करते थे। गिरोह में अभी कुछ अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आ रहे हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।

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