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सपा-बसपा गठबंधन से पहले मायावती के इस फैसले पर होगी सभी की नजर

2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर सभी दल अपनी-अपनी गोठी बैठाने में जुटे है।

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mayawati

सपा-बसपा गठबंधन से पहले मायावती के इस फैसले पर होगी सभी की नजर

नोएडा. 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर सभी दल अपनी-अपनी गोठी बैठाने में जुटे है। हालाकि यूपी में महागठबंधन की तैयारी भी की जा रही है। मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को गठबंधन पर मायावती 2 टूक जवाब दे चुकी है। वहीं सपा और बसपा के बीच में गठबंधन को लेकर अटकलें जारी है। दोनों पार्टियों के बीच में गठबंधन होता है तो इनके सामने गेस्ट हाउस कांड भी खड़ा हुआ है। 28 साल पुराने गेस्ट हाउस कांड पर 13 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। कोर्ट की इस सुनवाई पर नजर उनके गांव बादलपुर के लोगों की भी है।

बादलपुर के रहने वाले बुजुर्ग श्यामलाल सिंह ने बताया कि गेस्ट हाउस कांड एक शर्मनाक घटना है। जिस तरह बीजेपी ने देश का हाल किया है, उससे जरुरी है कि सरकार लोगों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी से गठबंधन करने का फैसला मायावती का है। जैसा वो उचित समझे कर सकती है। राजनीति और गेस्ट हाउस कांड दोनों अलग-अलग है। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों की नजर इस केस पर बनी हुई है।

लोकसभा चुनाव से पहले बदलते समीकरण को दो मायने निकाले जा रहे है। इनके बीच महागठबंधन होगा या नहीं। दरअसल में एक के पक्ष में यह फैसला आना है। सवाल यह है कि 28 साल पहले दर्ज कराए गए केस को मायावती वापस लेंगी। ये मुलायम सिंह यादव व अन्य को माफ करेंगी। इन पर चल रहे एससी व एसटी केस खत्म होगा। 19 सिंतबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को 6 सप्ताह के भीतर फैसला कर सूचना देने की बात कहीं है। अब यह समय खत्म हो रहा है।

यह है कांड

बसपा सुप्रीमो मायावती की तरफ से मुलायम सिंह यादव, आजम खान, शिवपाल यादव, बेनी प्रसाद वर्मा समेत अन्य के खिलाफ केस में नाम शामिल कराए गए थे। 2 जून, 1995 में गेस्ट हाउस कांड हुआ था। घटना से पहले सपा व बसपा दोनों एक साथ थे। 13 नवंबर को सुनवाई से पहले दोनों के बीच में समझौते पर नजर है। समझौते पर यूपी सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार भी नजर है। यह मामला इसलिए भी अहम है कि मायावती की तरफ से सपा नेताओं पर एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज है और एंटी करप्शन मामले में दो केस।

यह केस इसलिए भी अहम है कि मुलायत और शिवपाल की राह अलग हो चुकी है। वहीं अखिलेश यादव राजनीतिक विरासत संभाल चुके है। राजनीतिक एक्सपर्ट की माने तो गेस्ट हाउस कांड को भुलकर 2019 लोकसभा चुनाव में मायावती साथ आएगी, इसपर सभी की नजर होगी।