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श्री श्री की संस्था ने एनजीटी की कार्रवाई को बताया गलत, लगाए गंभीर आरोप

प्रेस वार्ता कर संस्था की तरफ से सरकार और एनजीटी को ही घेरे में लिया गया

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sandeep tomar

Aug 18, 2016

sri sri ravishankar

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नोएडा। आर्ट आॅफ लिविंग ने एनजीटी कमिटी के रवैये को पक्षपात पूर्ण और अवैज्ञानिक बताया है। आर्ट आॅफ लिविंग की छवि को खराब करने के लिए तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप लगाया है। इस मामले पर गुरुवार को आर्ट आॅफ लिविंग के विशेषज्ञों ने सेक्टर- 48 में प्रेस वार्ता में एनजीटी कमेटी के 120 करोड़ रुपए के क्षतिपूर्ति के दावे पर सवालिया निशान लगाया।

आर्ट आॅफ लिविंग की तरफ से पर्यावरणविद डॉ. प्रभाकर राव ने बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की रिपोर्ट पूरी तरह से तार्किक आधार से उलट हैं। जो वैज्ञानिक तथ्यों से परे महज विशेषज्ञों की राय है। उन्होंने बताया कि एनजीटी कमेटी ने आयोजन स्थल को वेटलैंड की सूची में रखा है। यह वेटलैंड एटलस दिल्ली ने भारत के 1986 सर्वे मैप के साथ प्रदर्शित किया है और ना ही सरकार के कोई अधिकृत दस्तावेज में इसे वेटलैंड बताया गया है।

तथ्यों में उलट फेर कर कमेटी इसे पर्यावरण स्वच्छता के दायरे में लाना चाह रही है। जबकि हकीकत यह है कि यह भूमि सदा ही फ्लड प्लेन रही है। एनजीटी कमेटी के भूमि को समतल करने के तथ्य को भी निराधार बताया। उन्होंने बताया कि यदि आयोजन के दौरान भूमि समतल हुई है, तब 1985 में किस तरह से उक्त जमीन को समतल भूमि प्रदर्शित किया गया है। उन्होंने कहा कि एनजीटी कमिटी के ज्यादातर आरोप हकीकत से परे और ठोस नहीं है। इस अवसर पर आर्ट आॅफ लिविंग के पर्यावरणविद् डॉ. रंजन, काउंसलर केदार देसाई समेत कई सदस्य मौजूद थे।

डॉ. प्रभाकर राव ने कहा कि याचिका पर एनजीटी ने एक कमिटी गठित की थी। जिसके सदस्य प्रोफेसर सीआर बाबू थे। उन्होंने आयोजन का किसी भी तरह का मूल्यांकन किये। बगैर ही मीडिया को आयोजन होने पर नुकसानदायक होने का बयान दिया, जोकि पूर्ण रूप से पक्षपात था।

राव ने आरोप लगाया कि सीआर बाबू ने आर्ट आॅफ लिविंग कमेटी की समाज में छवी खराब करने के लिए एेसा किया। राव ने कहा कि आयोजन से यमुना को नुकसान पहुंचाने के सबंध में याचिकाकर्ता मनोज मिश्रा के एनजीटी कमिटी के सदस्य प्रोफेसर ब्रिज गोपाल से निकट वर्ती संबंध है। कर्इ सालों से दोनों के बीच निकटता है। यहीं कारण है कि बिना किसी जांच प्ररख के कमिटी ने पक्षपात कर गलत रिपोर्ट दी।

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