
उत्तराखंड के देहरादून में एक जमीन को खाली कराने के लिए दो शातिर ठगों को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश और केंद्रीय मंत्री बनना भारी पड़ गया है। उन्होंने खुद को जज और मंत्री बताते हुए उत्तराखंड के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को व्हाट्सएप पर धौंस दे डाली। अधिकारी को शक हुआ तो उन्होंने इसकी जानकारी उत्तराखंड के एसटीएफ को दी। एसटीएफ ने नोएडा पुलिस के साथ मिलकर इन दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
नोएडा जोन के एडिशनल डीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि उत्तराखंड एसटीएफ और नोएडा के थाना सेक्टर-49 पुलिस ने पंजाब निवासी मनोज कुमार और राजीव अरोड़ा को सेक्टर-50 से गिरफ्तार किया किया है। उन्होंने बताया कि दोनों ठग नोएडा के अलग-अलग सेक्टर में रह रहे थे और दोनों आरोपियों पर दिल्ली के कई थानों में धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हैं। रणविजय सिंह ने बताया कि इन दोनों आरोपियों ने सर्वोच्च न्यायालय के जज और केंद्रीय मंत्री बनकर उत्तराखंड सचिवालय में पहले एक वरिष्ठ आईएएस अफसर को व्हाट्सएप पर कॉल कर रौब गालिब करते हुए मिलने का समय मांगा था।
नंबर सर्विलांस से हुए ट्रेस
बातचीत की शैली से अधिकारी को दोनों पर शक हो गया तो अधिकारी ने संबंधित कोतवाली पुलिस और एसटीएफ को संबंधित नंबर की जांच के आदेश दिए। जब नंबर को सर्विलांस से ट्रेस किया गया तो आरोपियों की लोकेशन नोएडा में मिली। इसके बाद एसटीएफ ने नोएडा की कोतवाली सेक्टर-49 पुलिस के सहयोग से दोनों आरोपियों को धर दबोचा।
बार-बार जेल जाकर भी नहीं सुधरे
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी शातिर किस्म के ठग हैं। उनके खिलाफ दिल्ली के कई थानों में मुकदमे दर्ज हैं। पूछताछ के दौरान अपराध आरोपियों ने बताया कि वे पहले लोगों को फर्जी वीजा के जरिए विदेश भेजने का काम करते थे। दूतावास की शिकायत पर पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जेल से छूटने के बाद दोनों एक प्राइवेट लिमिटेड पान मसाला कंपनी बनाकर टैक्स की चोरी की। इसके बाद दोनों को एक बार फिर जेल जाना पडा। जेल से छूटे तो उनकी मुलाकात गीता नाम की महिला से हुई, जिसे देहरादून में अपना प्लॉट को खाली करवाना था।
Published on:
11 Jul 2022 05:26 pm
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