25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नीट टेस्ट मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दी नोटिस, 29 अगस्त को हाेगी सुनवाई

नीट एग्जाम पास छात्रों की एक रिट पर सु्प्रीम कोर्ट ने भारत सरकार, मेडिकल काउंसलिंग कमेटी समेत इन सबको नोटिस जारी किया है

2 min read
Google source verification

image

Rajkumar Pal

Aug 19, 2016

NEET

NEET

नाेएडा। नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट कम एंट्रेंस एग्जाम (एनईईटी) एग्जाम काे लेकर केंद्र सरकार आैर एमसीसी की मुश्किलें कम नहीं हाे रही हैं। नीट एग्जाम पास छात्रों की एक रिट पर सु्प्रीम कोर्ट ने भारत सरकार, मेडिकल काउंसलिंग कमेटी, स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किए हैं। अब कोर्ट इस मामले में 29 अगस्त को सुनवाई करेगा। आपका बता दें कि रिट के माध्यम सेे छात्राें ने सुप्रीम कार्ट से परमादेश (मेंडामस) देने की मांग की है। छात्रों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि अगर केंद्र सरकार के 15 फीसदी कोटे वाली सीटें खाली रहती हैं तो राज्यों को सरेंडर नहीं की जाएं। बल्कि नेशनल मेरिट के प्रतीक्षारत छात्रों को अवसर मिलना चाहिए।

इन छात्राें ने डाली रिट

दिल्ली के सुभाष कुमार, छत्तीसगढ़ की पूजा राज, हरियाणा की अनुपमा समेत 27 छात्र-छात्राओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड और राजस्थान के वे छात्र भी शामिल हैं। जिन्होंने एनईईटी-2016 पास किया है और नेशनल मेरिट के माध्यम से दाखिला मिलने का इंतजार कर रहे हैं। छात्रों की ओर से एडवोकेट सुब्रत बिरला, आशीष पांडेय,दक्षा शर्मा और विश्व पाल सिंह ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा। जस्टिस अनिल आर. दवे और जस्टिस एल. नागेश्वर राव की खंडपीठ के सामने मामला रखा गया। यही खंडपीठ एनईईटी से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है। खंडपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए भारत सरकार, मेडिकल काउंसलिंग कमेटी, स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किए हैं। अब कोर्ट इस मामले में 29 अगस्त को सुनवाई करेगा।

राज्याें के पास है 85 फीसदी हिस्सा


छात्रों की ओर से डाॅ. पवन कुमार ने बताया कि हमारी मुख्य मांग है कि राज्यों के पास 85 प्रतिशत सीटों का बहुत बड़ा हिस्सा है। केंद्र सरकार के पास केवल 15 प्रतिशत सीट हैं। इन 15 फीसदी सीटों के लिए केवल दो काउंसलिंग करवाई गई हैं। अपने राज्यों में प्रवेश लेने के चक्कर में छात्र बड़ी संख्या में सीट छोड़ देते हैं। यह संख्या 50 फीसदी तक होती है। वहीं, नेशनल मेरिट में चार गुना छात्रों को वेटिंग में रखा गया है। लेकिन एमसीआई और काउंसलिंग कमेटी छोड़ी गई सीटें राज्यों को सरेंडर कर देते हैं। इससे नेशनल मेरिट में वेटिंग कर रहे होनहार छात्रों को कहीं भी दाखिला नहीं मिलता है।

ये हैं छात्राें की मांग


छात्रों की ओर से कोर्ट में पिछले वर्षों के दौरान हुई गड़बड़ियों को बतौर साक्ष्य पेश किए हैं। छात्रों ने अदालत से चार प्रमुख मांग की हैं। नेशनल कोटे वाली खाली सीटें राज्यों को सरेंडर नहीं करें। राज्यों को सीट तब भेजी जाएं, जब राज्यों की काउंसलिंग पूरी हो जाएं। तब भी नेशनल मेरिट के छात्रों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। नेशनल काउंसलिंग के चक्रों में ज्यादा समय मिलना चाहिए। नेशनल काउंसलिंग का अंतिम चक्र राज्यों के पहले चक्र से कम से कम एक सप्ताह पहले पूरा हो जाना चाहिए। नेशनल काउंसलिंग के चक्रों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।

ये भी पढ़ें

image