
उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर समेत आसपास के कई इलाकों में वायु प्रदूषण तेजी से फैल रहा है। पिछले दिनों भी शहर में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई है। वायु गुणवत्ता सबसे खराब वाले देश के टॉप आठ शहरों में पांच उत्तर प्रदेश के हैं। जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 से अधिक दर्ज किया गया है। इस कारण वाहनों से निकलता धुआं, सड़कों पर उड़ती धूल और निर्माण कार्य के चलते प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। देश के टॉप-8 प्रदूषित शहरों में शामिल वेस्ट यूपी के पांच शहरों में वायु प्रदूषण बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। इनमें हापुड़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा शामिल हैं। वहीं राजधानी की बात करें तो यहां की स्थिति भी काफी चिंताजनक है। ऐसे में यहां पर एक नया नियम लागू होने जा रहा है, जिसके तहत अब वायु प्रदूषण फैलाने पर टैक्स देना होगा।
राजधानी में देना होगा टैक्स
दरअसल वायु प्रदूषण की दिन पर दिन खराब गुणवत्ता को देखते हुए नगर निगम ने शहर में हवा खराब करने वालों पर नया टैक्स लगाने का फैसला लिया है। यानी कि लखनऊ वासियों को अब वायु प्रदूषण फैलाने पर टैक्स देना होगा। इन नए टैक्स के लिए दरें अभी तय की जाएंगी। सोमवार को महापौर संयुक्ता भाटिया की अध्यक्षता में हुई नगर निगम सदन की बैठक में इसकी मंजूरी मिल गयी। अगले दो महीने के भीतर नए टैक्स लागू कर दिए जाएंगे। ऐसे में अब हवा को साफ रखना लोगों के लिए जरूरी होगा।
इनसे भी वसूला जाएगा टैक्स
आपको बता दें कि वायु प्रदूषण करने वाली संस्थानों, इकाइयों और अन्य पर भी शुल्क लगेगा। इसके लिए दरें जल्द तय होंगी। ईट भट्टों और वायु प्रदूषण करने वाली औद्योगिक इकाईयों से शुल्क वसूला जाएगा। डीजल से चलने वाले जनरेटर मशीनों पर शुल्क लिया जाएगा। निर्माण इकाईयों पर वायु प्रदूषण के लिए शुल्क देना होगा। कामर्शियल वाहनों पर वायु प्रदूषण शुल्क लागू होगा। इसके अलावा निर्माण सामाग्री बालू, मौरंग, व सीमेन्ट व्यावसायी, प्लास्टिंग उत्पादन इकाईयों आटो टेम्पो व ई रिक्शा से संचालन शुल्क और नगर निगम की 20 पार्किंग में वाहनों से शुल्क लिया जाएगा।
Published on:
14 Jun 2022 08:43 am

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