
दोबारा पोस्टमार्टम होने तक शव को माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखा जाएगा।
post mortem aiims delhi team: ट्विशा शर्मा मौत मामले में शुक्रवार को जबलपुर हाई कोर्ट ने एक बड़ा मोड़ ला दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि दिल्ली AIIMS के डायरेक्टर बनाई गई डॉक्टरों की एक स्पेशल टीम भोपाल आकर ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम करेगी। न्याय की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कोर्ट ने आदेश दिया कि जब तक दोबारा पोस्टमार्टम नहीं हो जाता, तब तक शव को माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखा जाए। साथ ही, इस पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी।
अदालत के सामने पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कई ऐसी बड़ी कमियां रखी गईं, जिससे पूरी जांच पर शक के बादल मंडराने लगा है। ट्विशा के बाएं हाथ पर गहरी चोट के निशान थे, लेकिन रिपोर्ट में यह साफ नहीं किया गया कि ये चोटें कितनी गहरी और कितनी पुरानी थीं। गले पर फंदे के निशान होने के बावजूद गले या रीढ़ की हड्डी का एक्स-रे नहीं कराया गया। DNA जांच के लिए ट्विशा के नाखूनों के नीचे से सैंपल लिए गए थे, लेकिन यह साफ नहीं था कि जांचकर्ताओं को इस बात का कोई शक था या नहीं कि ट्विशा ने बचाव के लिए संघर्ष किया था।
फेफड़ों और आंखों की स्थिति फांसी लगाने जैसी नहीं थी, बल्कि ऐसा लग रहा था जैसे दम घुटने या गला दबाने से मौत हुई हो। ट्विशा की असली लंबाई 176 सेमी थी, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसे केवल 166 सेमी लिखा गया। सुप्रीम कोर्ट के नियमों के बावजूद, पहली पोस्टमार्टम टीम में कोई महिला डॉक्टर शामिल नहीं थी और न ही सीनियर डॉक्टरों का सही पैनल था।
सुनवाई के दौरान ट्विशा के पति समर्थ के वकीलों ने दोबारा पोस्टमार्टम कराने का विरोध किया। उन्होंने मांग की कि शव को अंतिम संस्कार के लिए उन्हें सौंप दिया जाए क्योंकि ट्विशा उनकी बहू थी। लेकिन हाई कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया और कहा कि जांच में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए दोबारा पोस्टमार्टम जरूरी है।
इस मामले में एक और बड़ी हलचल हुई है। मध्य प्रदेश सरकार ने ट्विशा की सास गिरी बाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत को रद्द कराने के लिए हाई कोर्ट में अर्जी दी है। इस मामले की पैरवी के लिए खुद देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में पेश हुए। तुषार मेहता ने दलील दी कि यह दहेज उत्पीड़न का गंभीर मामला है और आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सास रसूखदार हैं और वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकती हैं। कोर्ट ने सास गिरी बाला सिंह को नोटिस जारी कर सोमवार 25 मई तक जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट से यह भी मांग की गई कि मीडिया में इस खबर को दिखाने पर रोक लगाई जाए। लेकिन हाई कोर्ट ने मीडिया की आवाज दबाने से साफ मना कर दिया। कोर्ट ने सिर्फ इतना कहा कि मामला अदालत में है, इसलिए सभी को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।
Updated on:
22 May 2026 05:43 pm
Published on:
22 May 2026 05:18 pm
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