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मदर्स-डेः पार्कों में पौधे लगाकर इस माली मां ने देश को दिया ये तेज गेंदबाज

टीम इंडिया का हिस्सा रह चुके भारतीय तेज गेंदबाज परविंदर अवाना की अनसुनी कहानी

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नोएडा

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lokesh verma

May 12, 2019

cricketer parvinder awana

मदर्स-डेः पार्कों में पौधे लगाकर इस माली मां ने देश को दिया ये तेज गेंदबाज

नोएडा. यूं तो हर मां की ख्वाहिश होती है कि उसके बच्चे बड़े होकर देश-दुनिया में नाम रोशन करे। बच्चों की कामयाबी के लिए एक मां अपनी हर इच्छा को दबाकर उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास निरंतर करती रहती है। कुछ ऐसी ही कहानी है नोएडा के हरौला गांव की रहने वाली राजपाली देवी की, जिन्होंने पति की मौत के बाद भी कभी हिम्मत नहीं हारी। नोएडा अथॉरिटी में माली की नौकरी करते हुए राजपाली ने अभावों से जूझते हुए देश को देश को तेज गेंदबाज दिया है। जी हां, हम बात कर रहे हैं टीम इंडिया का हिस्सा रह चुके परविंदर अवाना की।

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बता दें कि वर्ष 2000 में परविंदर अवाना के पिता की आक्समिक मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद परिवार के पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई। काफी हाथ-पैर मारने के बाद राजपाली को पति के स्थान पर नोएडा अथॉरिटी में माली की नौकरी मिल गई। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और हाथों में खुरपी उठाते हुए करीब 16 साल तक पार्कों और डिवाइडरों पर पौधे लगाए और उनकी देखरेख करते हुए अपने तीन बच्चों को पाला। वह वर्ष 2016 में रिटायर हुईं। मदर्स-डे के अवसर पर परविंदर अपनी उपलब्धियों का पूरा श्रेय अपनी मां राजपाली को को देते हैं। उनका कहना है कि यदि मां का साथ न मिला होता तो आज वह इस मुकाम पर नहीं पहुंचते। बता दें कि फिलहाल परविंदर मां और पूरे परिवार के साथ ग्रेटर नोएडा में रहते हैं।

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परविंदर अवाना के करिअर पर एक नजर

बता दें कि परविंदर घर में छोटे थे और उन्हें क्रिकेट खेलने का शौक था। परविंदर अवाना ने 2004 में ईएसपीएन स्कॉर्पियो स्पीडस्टर कॉम्पिटिशन में हिस्सा लिया। मुंबई में हुए इस जूनियर कैटिगरी के कॉम्पिटिशन में देशभर से करीब 4500 खिलाडिय़ों ने हिस्सा लिया था, जिसमें परविंदर 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी की। इसके बाद परविंदर को एक महीने की ट्रेनिंग पर आस्ट्रेलिया भेजा गया। वहां से लौटते ही 2005 में उनका चयन दिल्ली की रणजी टीम में हो गया। हालांकि उस समय खेलने का मौका नहीं मिल सका। इसके बाद 2007 में उन्होंने रणजी ट्रॉफी खेलते हुए अपने दूसरे ही मैच में हैटट्रिक बनाई। उनके प्रदर्शन की बदोलत ही दिल्ली लंबे समय तक रणजी ट्रॉफी विजेता रही। इसके बाद 2012 में पहली बार परविंदर पंजाब की ओर से आईपीएल में खेला। इसी वर्ष उनका चयन इंडिया ए टीम में भी हो गया। इसके बाद उन्होंने टीम इंडिया की ओर से इंग्लैंड के खिलाफ दो टी-20 मैच भी खेले, लेकिन दो मैचों में किए गए छह ओवर में ही उन्होंने 71 रन दे दिए। इस निराशाजनक प्रदर्शन के कारण वह टीम इंडिया से बाहर हो गए। हालांकि 2016 में आयकर विभाग में परविंदर को इंस्पेक्टर की नौकरी मिल गई। बता दें कि पिछले वर्ष ही उन्होंने शादी की है। उनकी पत्नी दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर हैं।

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