scriptuse of antibiotics in poultry farms making chicken unhealthy | अगर खाते हैं चिकन तो मुर्गे क्यों बन सकते हैं आपकी मौत की वजह | Patrika News

अगर खाते हैं चिकन तो मुर्गे क्यों बन सकते हैं आपकी मौत की वजह

अगर आप भी नॉन वेज खासकर चिकन के शौकीन हैं तो यह खबर आपको चिंतित कर सकती है।

नोएडा

Updated: February 24, 2018 03:21:29 pm

नोएडा। अगर आप भी नॉन वेज के शौकीन हैं तो यह खबर आपको चिंतित कर सकती है। दरअसल, पिछले दो दशकों के दौरान नोएडा समेत देशभर में नॉनवेज और खासकर चिकन के शौकीनों की तादाद में तेजी से इजाफा हुआ है। जिसके चलते चिकन की मांग में तेजी से इजाफा हुआ है और सप्लायरों पर भी इसका दबाव बढ़ा है।
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इस बढ़ते दबाव में भी चिकन की पूर्ति करने के लिए पोल्ट्री फार्म संचालक मुर्गियों को तेजी से बड़ा करने और बिमारियों से बचाने के लिए अधिक मात्रा में एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करते हैं। जो चिकन के द्वारा इंसानों के शरीर में भी तेजी से पैर पसार रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि शरीर में बेवजह एंटीबायोटिक्स के पहुंचने से इनके साइड इफेक्ट्स भी लोगों को झेलने पड़ रहे हैं। इसके साथ ही सेंटर फॉर साइंस ऐंड एनवारनमेंट की एक स्टडी में कहा गया है कि भारत में चिकन में एंटीबायोटिक्स की मात्रा बेहद ज्यादा है और यह इंसानी सेहत के लिए खतरनाक है।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ

नोएडा के सेक्टर-32 में एक निजी क्लिनिक चलाने वाले फिजिशियन डॉ राजेश शर्मा का कहना है कि इन दिनों जिस तरह से मार्केट में चिकन की डिमांड बढ़ रही है और साथ ही सप्लायरों द्वारा डिमांड को पूरा करने के लिए जल्दी जल्दी मुर्गियों को बड़ा किया जाता है। इसके लिए वह मुर्गियों के खाने में एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करते हैं। पॉल्ट्री फार्म्स वालों को लगता है कि एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल से मुर्गियों में ग्रोथ जल्दी होती है। डॉक्टर शर्मा ने बताया कि वास्तव में एंटीबायोटिक्स किसी भी प्राणी को बिमारी के समय दिया जाता है, न कि ग्रोथ के लिए। लेकिन बेवजह इसके इस्तेमाल स मुर्गियों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है और जिस मुर्गी को यह दिया गया है उसे खाने वाले इंसान के शरीर में भी यह दवाएं पहुंचती है। जिससे इंसान के शरीर पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ता है और कई बार इंसानों के बीमार होने पर दवाएं भी काम नहीं करती।
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एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल में भारत चौथे नंबर पर

एक साइंस मैगजीन में प्रकाशित सेंटर फॉर डिसीज डायनामिक्स, इकनॉमिक्स एंड पॉलिसी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि एंटीबायोटिक्स के मनमाने इस्तेमाल से पूरी दुनिया में स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है। एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करने में भारत चौथे स्थान पर है और इस समय पोल्ट्री और मीट के लिए पाले जाने वाले पशुओं को हर साल करीब 2700 टन एंटीबायोटिक्स खिलाए जा रहे हैं। यदि इसपर रोक नहीं लगी तो 2030 तक इस मात्रा में 82 प्रतिशत तक का इजाफा होने की आशंका है।

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