पत्रिका न्यूज नेटवर्क, अलवर। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) भले ही लोढ़ा समिति की सिफारिशों का तोड़ ढूंढऩे में लगा है, लेकिन राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) ने 15 नवम्बर से पहले चुनाव कराने के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इस रणनीति का पहला दांव सोमवार को सामने आया जब आरसीए के मौजूदा अध्यक्ष ललित मोदी ने अपने बेटे रुचिर मोदी को अलवर जिला क्रिकेट संघ के जरिए क्रिकेट पॉलीटिक्स में एंट्री दिलाई। रुचिर अलवर जिला संघ के 22 अगस्त को सम्पन्न चुनाव में निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए। गुपचुप तरीके से हुए इस चुनाव का 21 दिन बाद जाकर खुलासा हुआ। अलवर जिला संघ के सचिव व आरसीए कोषाध्यक्ष पवन गोयल ने सोमवार को इसकी पुष्टि की।
मोदी के करीबी हैं गोयल
इस चुनाव में ललित मोदी के करीबी गोयल ने रुचिर को अध्यक्ष बनाने के लिए प्रस्ताव रखा। रुचिर को अलवर के कॉरपोरेट क्रिकेट क्लब से सदस्य दिखाते हुए नाम प्रस्तावित किया गया। गोयल ने बताया कि इस बैठक में रुचिर मौजूद नहीं थे। किसी भी व्यक्ति के संघ की कार्यकारिणी में पदाधिकारी होने के लिए जिले का निवासी होना या उसके नाम कोई प्रॉपर्टी होना आवश्यक है। जानकारों के अनुसार जुलाई में ही रुचिर के नाम से राजगढ़ में आवासीय कम खेती की जमीन खरीदी गई।
15 नवम्बर से पहले कराने हैं चुनाव
लोढ़ा समिति की सिफारिशों के तहत बीसीसीआई से सम्बद्ध सभी राज्य क्रिकेट संघों को 15 नवम्बर से पहले ताजा चुनाव कराने होंगे। वैसे भी आरसीए ने खुलेतौर पर लोढ़ा समिति की सिफारिशों को मानने का एेलान किया था। रुचिर की एंट्री इसी बाबत हुई है कि वे राज्य क्रिकेट संघ के अगले चुनाव में अपने पिता का स्थान ले सकते हैं। उल्लेखनीय है कि आरसीए मई 2014 से निलंबित है। ललित मोदी के अध्यक्ष बनने के साथ ही बोर्ड ने आरसीए को निलंबित कर दिया था, एेसे में रुचिर के आने से भविष्य में भी यह निलंबन हटने की उम्मीद कम ही दिख रही है।
राजस्थान क्रीड़ा परिषद रही अनजान
अलवर जिला संघ के चुनाव से राजस्थान क्रीड़ा परिषद पूरी तरह से अनजान रही, जबकि स्पोट्र्स एक्ट के आधार पर परिषद का पर्यवेक्षक बैठक में मौजूद होना चाहिए। अलवर के प्रभारी खेल अधिकारी लखपत राय सैनी पर्यवेक्षक के तौर पर बैठक में शामिल तो हुए, लेकिन उन्होंने क्रीड़ा परिषद को सूचित करना जरूरी नहीं समझा। एक दिन पहले तक तो सैनी साफ मना करते रहे कि उन्हें चुने गए पदाधिकारियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है, जबकि सोमवार को जारी आधिकारिक चुनाव प्रमाण पत्र में सैनी के हस्ताक्षर हैं।
रोक के बावजूद चुनाव
उधर जिला क्रिकेट संघ के आजीवन सदस्य पवन शर्मा ने चुनाव को अवैध बताते हुए कहा है कि अलवर सब रजिस्ट्रार ने 13 दिसम्बर 2010 को चुनाव पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भी पवन गोयल ने 2011 में चुनाव करा लिए, उन्हें निरस्त करने के बाद रोक अभी तक जारी है। शर्मा का कहना है कि सब रजिस्ट्रार की ओर से लगी रोक अभी लागू है इसलिए चुनाव नहीं कराए जा सकते हैं। वह इसके खिलाफ अदालत में जाएंगे क्योंकि रजिस्ट्रार की ओर से एडहॉक कमेटी बनाने के बाद ही चुनाव कराए जा सकते हैं।