
Mother Teresa
वेटिकन सिटी। शांति के नोबेल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा को आखिरकार लंबे इंतजार के बाद रविवार को वेटिकन सिटी में संत की उपाधि मिल जाएगी। ये उपाधि उन्हें 19वीं पुण्यतिथि के मौके पर दी जा रही है। इस समारोह के लिए करीब 1 लाख लोगों को आधिकारिक इनविटेशन भेजा गया है। इस समारोह में सभी देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। भारत से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के भाग लेने की संभावना जताई जा रही है।
कौन थीं मदर टेरेसा
वर्ष 1910 में कोसोवर अल्बानिया (मैसेडोनिया) में जन्मीं टेरेसा भारत आने के बाद यहीं बस गईं। उन्होंने 1950 में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की और करीब 68 सालों तक गरीब और बीमारों की सेवा में लगी रहीं। 86 साल की उम्र में साल 1997 में कोलकाता में उनका निधन हो गया था। दुनिया के असहाय और गरीबों की सेवा के लिए उन्हें 1979 को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। जब वो ये सम्मान ले कर भारत लौटी थीं, तो पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने कहा था - अभी तक आप भारत की मां थीं अब आप पूरी दुनिया की मां बन गई हैं।
इसलिए मिल रही है संत की उपाधि
वेटिकन की नजर में एक संत बनने के लिए किसी चमत्कार की जरूरत होती है। टेरेसा के मामले में उनकी मौत के पांच साल बाद पोप जॉन पॉल सेकेंड ने उनके एक चमत्कार को स्वीकार किया था। इस घटना में एक बंगाली आदिवासी महिला मोनिका बेसरा को पेट का अल्सर था, जो ठीक हो गया। बताया गया कि यह मदर टेरेसा के आलौकिक ताकत की वजह से हुआ। हलांकि इस पर विवाद भी हुआ कि ये तो अंध विश्वास को बढ़ावा देना हुआ।
मदर टेरेसा से जुड़े ये 5 विवाद
1. वैसे टेरेसा को लेकर कुछ विवाद भी जुड़े। शोधकर्ताओं ने उनके संस्थान की गतिविधियों में वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा किया और उनके मिशन चलाने पर सवाल खड़ा किया।
2. ब्रिटेन में जन्मे लेखक क्रिस्टोफर हिचेंस उन्हें एक धार्मिक रुढ़िवादी, एक राजनीतिक गुप्तचर, एक कट्टर उपदेशक और दुनिया भर की धर्मनिरपेक्ष ताकतों का एजेंट करार देते थे। इन्होनें मदर टेरेसा पर कई बड़े सवाल खड़े करते हुए एक डॉक्यूमेंट्री 'हेल्स एंजेल' भी बनाई थी।
3. साल 2003 में लंदन के निवासी डॉक्टर अरूप चटर्जी ने भी टेरेसा की संस्था से जुड़े 100 लोगों का इंटरव्यू किया और उनके कामों पर एक तीखा लेख लिखा। अरूप के मुताबिक टेरेसा द्वारा बनवाए गए घरों में बाक़ी चीज़ों के अलावा स्वच्छता के बदतर हालात, सीरिंज में एक ही सूई का बार बार इस्तेमाल और देखभाल की घटिया व्यवस्था होती है।
4. इसी तरह मियामी के हेमली गोंदालेथ ने भी चैरिटी के बारे में सनसनीखेज खुलासे किए। उन्होंने बताया कि उन्हें यह देखकर हैरत हुई कि चैरिटी किस भयानक लापरवारी के साथ काम करता है। यह लोगों के मन में चैरिटी के काम को लेकर जो विचार था, उसके ठीक उल्टा था। बता दें कि गोंदालेथ मदर टेरेसा की आलोचना करते हुए एक फ़ेसबुक पेज भी चलाते हैं।
5. इसके अलावा भारत के कई हिंदूवादी संगठनों ने ये भी आरोप लगाया कि टेरेसा अपने सेवा कार्यों की आड़ में धर्म परिवर्तन करने के लिए लोगों को बरगलाती हैं।
Published on:
03 Sept 2016 01:21 pm
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