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पचपदरा से नमक आंदोलन की चिंगारी के सौ बरस

कलकत्ता प्रवास में उन्होंने घनश्याम दास बिड़ला सरीखे उद्योगपति एवं इंडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री के माध्यम से नमक नीति का भंडाफोड़ किया।
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भारत

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Opinion Desk

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गुलाब बत्रा

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Updated: 5 Nov 2026, 2:56 PM IST

namak andolan

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भारत के स्वाधीनता आंदोलन के दौरान नमक व्यवसाय पर ब्रिटिश सत्ता के एकाधिकार की कुटिल नीति के प्रतिरोध में सौ बरस पहले थार मरुस्थल के पचपदरा कस्बे से उठी चिंगारी चार साल पश्चात महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह में ज्वालामुखी बन गई।नमक उत्पादन के साथ अब पचपदरा ने सोना उगलने वाली रिफाइनरी के रूप में दस्तक दी है। अपनी साहसिक समझ-बूझ के धनी एकल सेनानी युवा नमक व्यवसायी सेठ गुलाब चंद सालेचा ने राजस्थान के अत्यंत पिछड़े इलाके के हजारों नमक उत्पादक खारवाल समूह तथा मजदूरों की संगठित शक्ति 1926 में हड़ताल के रूप में बदलने की युक्ति बिठाई। सालेचा ने सरकार की देशी रियासतों से नमक संधियों की कपटपूर्ण शर्तों के तथ्य जुटाए। नमक उपभोक्ताओं से पचपदरा नमक की मांग संबंधी प्रतिवेदन भिजवाने के साथ-साथ कलकत्ता के विदेशी नमक बाजार में पचपदरा नमक की बिक्री की चुनौती प्रस्तुत की। सरकार की नमक नीति के खिलाफ वरिष्ठ पत्रकारों से आलेख लिखवाए। दिल्ली की सेंट्रल एसेम्बली में 1926 में भी नमक नीति की गूंज सुनाई दी।

इस रोमांचक कहानी के सूत्रधार सालेचा के चार-पांच वर्षीय आंदोलन के चलते 1930 में महात्मा गांधी ने नमक व्यवसाय पर एकाधिकार के खिलाफ राजनीति का मुद्दा बनाया। उन्होंने 12 मार्च को दांडी यात्रा आरंभ कर 6 अप्रेल को नमक कानून तोड़ा। पचपदरा में 19 नवंबर 1978 को 94 वर्षीय सेठ गुलाब चंद सालेचा के नागरिक अभिनंदन समारोह के लिए राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत ने अपना संदेश भेजा। दरअसल, सेठ गुलाब चंद सालेचा ने तथ्यों को एकत्रित करते समय सरकारी गजेटियर्स से महारानी विक्टोरिया के उस खरीते का पता लगाया, जिसमें वायसराय लार्ड डलहौजी को यह लिखा गया था कि ब्रिटिश व्यापारियों के हित में भारत में नमक व्यवसाय पर एकाधिपत्य किया जाए।

ब्रिटिश सत्ता ने प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात पचपदरा नमक उत्पादन क्षेत्र से नुकसान होने का बहाना बनाकर नमक बनाने का व्यवसाय बंद करने की रणनीति अपनाई तब सालेचा ने इसके खिलाफ मोर्चा खोला। कलकत्ता प्रवास में उन्होंने घनश्याम दास बिड़ला सरीखे उद्योगपति एवं इंडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री के माध्यम से नमक नीति का भंडाफोड़ किया। सरकार ने वरिष्ठ अंग्रेज अधिकारी मि. स्ट्रेची का एक सदस्यीय आयोग गठित किया। सालेचा ने पचपदरा में नमक उत्पादन बंद करने की सूरत में 1879 की संधि के तहत एक करोड़ रुपए हर्जाना देने की बात कही तो स्ट्रेची चौंक गए। स्ट्रेची के रिपोर्ट में भारी हर्जाना देने की अपेक्षा उत्पादन चालू रखने की बात कही। नतीजतन पचपदरा नमक व्यवसाय को जीवनदान मिल गया।

गुलाब बत्रा,(वरिष्ठ पत्रकार)