
British Army rapes 1400 women of Kenya, destitute women settle their village
मोबाइल और इंटरनेट बना समस्या
मातृशक्तिका शारीरिक रूप से मजबूत बनाया जाए। जूड़ो कराटे या अन्य विधाओं को स्कूली शिक्षा से जोड़ा जाए। साथ में मनोविज्ञान से सम्बंधित प्रशिक्षण दिया जाए। टेलीविजन पर कामुकता बढ़ाने वाले और अश्लीलता वाले दृश्यों पर सख्ती से प्रतिबंध लगे। ऐसे साहित्य पर भी रोक लगे। घर और स्कूल में लड़कों को मातृशक्ति का सम्मान करने के संस्कार दिए जाएं। छेड़छाड़ के मामलों को गम्भीरता से लिया जाए। आजकल मोबाइल और इंटरनेट भी गम्भीर समस्या बनता जा रहा है । इसमें अश्लील वीडियो आसानी से देखे जा सकते हैं। इस कारण गन्दे विचार मस्तिष्क में आते हैं। इस प्रवृत्ति को रोकने की जरूरत है। महिला अपराधों से सम्बंधित कानूनों की समीक्षा की जाए और आवश्यक सुधार किए जाएं। इसके लिए समाज में भी जागरूकता लाने की आवश्यकता है। कई बार देखने में आता है कि समाज में बदनामी होगी। इसलिए बहुत से मामलों को दबा दिया जाता है ,जो बहुत गलत है।
-पहलवान सिंह बघेल, विदिशा, मध्यप्रदेश
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बच्चों को महिलाओं का सम्मान करना सिखाएं
देश में बलात्कार की बढ़ती घटनाएं चिंता की बात है। बढ़ती अश्लीलता और नशीले पदार्थों के सेवन से इस तरह के अपराध बढ़ रहे हैं। बचपन से ही बच्चों में महिलाओं का सम्मान करना सिखाया जाना चाहिए। यदि ऐसा अपराध सामने आता है, तो विशेष कोर्ट में 3 माह में सुनवाई पूरी हो जानी चाहिए। ऐसे अपराधी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। दया याचिका का भी प्रावधान नहीं होना चाहिए। इसमें समय की बर्बादी होती है। सभी लोग मर्यादा में रहें। इससे हर तरह के अपराध कम हो सकते हैं।
-डॉ. डी. कुमार, काजरी, जोधपुर
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इंटरनेट पर अश्लील सामग्री को रोका जाए
भारत में दिन-प्रति-दिन महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। न केवल महिलाओं, बालिकाओं का भी यौन शोषण हो रहा है। उनकी हत्या भी हो रही है। जब तक अपराधी को एक वर्ष के अन्दर फांसी की सजा नहीं मिलती, तब तक बलात्कार जैसे अपराध खत्म नहीं होंगे। साथ ही इंटरनेट पर अश्लील वीडियो और फिल्मों पर कानूनी प्रतिबन्ध अत्यंत आवश्यक है। बलात्कारी के परिवार का बहिष्कार हो। छेड़छाड़ के मामलों को भी पुलिस गंभीरता से लेना शुरू कर देख् तो अपराधियों के हौसले बुलंद नहीं हो सकते।
-संजय श्रीश्रीमाल, कोइम्बटूर, तमिलनाडु
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बेखौफ हैं अपराधी
देश में पिछले कई सालों से बलात्कार की घटनाएं निरन्तर बढ़ रही हैं। अबोध बालिका से लेकर वृद्ध महिलाएं तक वहशीपन का शिकार हो रही हैं। कड़े कानून होने के बावजूद बलात्कार की घटनाओं का बढऩा सरकारी तन्त्र की कमजोरी को उजागर करता है। अनेक मामलों मे प्रसिद्ध लोगों के नाम दुष्कर्म की घटनाओं में आए हैं, लेकिन सजा दिलवाने की बजाय उन्हें बचाने की कोशिश हुई। पीडि़त परिवार को प्रताडि़त करना, उस पर समझौते के लिए दबाव बनाना, डराना-धमकाना आम बात है। बलात्कारियों में पुलिस और कानून का खौफ नहीं के बराबर होने से दुष्कर्म बढ़ रहे हैं। अब तो जाति और धर्म के आधार पर आरोपियों का समर्थन कर उन्हें बचाने के प्रयास तक हो रहे हैं। जब तक सरकारें, पुलिस- प्रशासनिक अधिकारी अपने कर्तव्य के प्रति गम्भीर नहीं होंगे और अपराधियों को त्वरित सजा नहीं होगी, तब तक ये अपराध नहीं रुकेंगे।
-विनोद कटारिया, रतलाम
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जरूरी हैं संस्कार
बलात्कार जैसे अपराधों को रोकने के लिए हमें हमारे संस्कारों को फिर से जीवित करना पड़ेगा। हमें पश्चिमी संस्कृति के जाल से निकल कर पुन: हमारे मानवीय मूल्यों को अपनाना पड़ेगा। इसी के साथ स्कूलों में जेंडर संवेदनशीलता से संबंधित पाठ्यक्रम भी चलाने चाहिए। हर समाज में कुछ विकृत मानसिकता के व्यक्ति भी होते हैं, ऐसे विकृत लोगों के लिए कानून का कठोर होना भी आवश्यक है।
-कुलदीप सिंह भाटी, पिंडवाड़ा, सिरोही
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जरूरी है यौन शिक्षा
यौन शिक्षा को स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में जोड़ा जाए, जिससे छात्र-छात्राओं को सही जानकारी मिले। कानून का डर तो अब खत्म हो गया है। अब एकमात्र तरीका ये ही है कि बच्चों को विद्यार्थी जीवन से ही यौन अनुशासन का पाठ पढ़ाया जाए।
-पवन कु जैन, जयपुर
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संस्कारहीनता का परिणाम
बलात्कार जैसा घिनौना कृत्य संस्कारहीनता का परिणाम है। यह समझाया जाना चाहिए की लड़कियां कोई भोग विलास की वस्तु नहीं है। ऐस अपराध तभी रुक सकते हंैं, जब भारतीय संस्कृत के अनुसार नारी का सम्मान हो। प्रशासन भी हर रिपोर्ट हुए मामले को गंभीरता से ले।
-दीप्ति जैन, उदयपुर
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तुरंत कार्रवाई जरूरी
देश में लगातार बलात्कार की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।ठोर कानून होने के बाद भी बलात्कार की घटनाएं थम नहीं रही हैं। कठोर कानून के साथ ही शीघ्र व त्वरित कार्रवाई का होना भी आवश्यक है। बलात्कार के मामलों में पीडि़ता की शिकायत तक दर्ज नहीं की जाती है या फिर रिपोर्ट दर्ज करने में विलंब किया जाता है। इस वजह से अपराधी को बच निकलने का मौका मिल जाता है। ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई आवश्यक है।
-सुदर्शन सोलंकी, मनावर धार
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जरूरी है संस्कार निर्माण
बलात्कार जैसे अपराध विकृत मानसिकता के परिणाम हैं। आज के समय में इंसान में इंसानियत का भाव खत्म हो रहा है। संस्कार, मानवता, दया, करुणा आदि गुणों से आज का मानव दूर होता जा रहा है। यही कारण है कि आज के समय मे बलात्कार जैसी घटनाएं हर रोज होती रहती हैं। कोई सरकार ऐसी घटनाओं को नहीं रोक सकती। हां, कम जरूर कर सकती है। बलात्कार जैसे अपराधों को रोकने के लिए बालकों में संस्कारों का विकास बहुत जरूरी है।
-भारत नागर, बामला, बारां
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आत्मरक्षा के गुर सिखाएं
बलात्कार सबसे ज्यादा घटने वाले अपराधों में से एक है। सरकार पुलिस बल को बढ़ाने की कोशिश करे। इसके अलावा सरकार बलात्कार रोकने के लिए स्पेशल फोर्स तैयार करे। सरकार को सुनसान इलाकों में भी सीसीटीवी कैमरे भी लगाने पर जोर देना चाहिए। इसके अलावा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कैंप लगाने चाहिए। स्कूलों में ऐसी स्पेशल क्लास लगे, जिसमें बच्चियों को आत्मरक्षा के गुण सिखाए जाएं।
-विनम्र मिश्र है, राजगढ़, मध्यप्रदेश
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शीघ्र सजा जरूरी
देशभर में आए दिन महिलाओं के साथ रेप, छेडख़ानी, हिंसा की घटनाएं होती रहती हंै। कुछ मामलों को छोड़ दें, तो हजारों पीडि़त महिलाएं अब भी इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही हैं, लेकिन उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला। सरकारों को चाहिए कि हर बस स्टॉप, चौराहों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए स्पेशल पुरुष व महिला पुलिकर्मियों की तैनाती की जाए। साथ ही साथ ऐसे मामलों में आरोपी को गिरफ्तार कर फास्ट ट्रेक कोर्ट में मामला चलाकर देाषी को 6 महीने के भीतर कठोर से कठोर सजा दिलाई जाए।
-वसीम अख्तर, मांगरोल, बारां
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माहौल सुधारने की जरूरत
कठोर दंड व्यवस्था वाले देशों में भी बलात्कार की बढ़ती घटनाएं होती हैं। इससे साफ है कि शिक्षा और घरेलू परिवेश में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है। अपराधियों से तो कानून निपटेगा ही, लेकिन ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है कि ऐसे अपराध हो ही नहीं।
-खगेश खटाणा, सवाई माधोपुर
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चरित्र में आई गिरावट
महिला अत्याचार का प्रमुख कारण लोगों के चरित्र में आई गिरावट है। नैतिकता में गिरावट इस हद तक पहुंच गई कि धार्मिक रूप से ख्यातनाम कई लोग भी यौन शोषण जैसे जघन्य अपराध में लिप्त पाए जाने लगे हंै। ऐसे मामलों में कानून को निष्पक्षता से काम करने देना चाहिए। समाज का कार्य यह है कि वह इस बात का चिंतन करे कि आखिर ऐसे जघन्य अपराध हो क्यो रहे हंै और इसकी रोकथाम के लिए समाज में जागृति पैदा करने की कोशिश की जाए। समाज के नैतिक स्तर को उठाने का प्रयास किया जाए।
-संजय पाटोदी, कोटा
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जरूरी है नारी का सम्मान
बलात्कार जैसे जघन्य अपराध को रोकने के लिए हमें पुलिस प्रशासन प्रणाली में सुधार करना होगा। साथ ही त्वरित न्याय व्यवस्था को बढ़ावा देना होगा। भारतीय संस्कृति को पुन: जीवित करना होगा। युवाओं को नशे की लत से बाहर निकालना, नारी के प्रति सम्मान और उसके प्रति सोच में बदलाव करके ही हम बलात्कार जैसे अपराध को कम कर सकते हैं।
-उर्मिला सिसोदिया, बेंगलुरु
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सजा के लिए हो समय सीमा
जब तक सरकार कड़े कानून बनाकर उनका क्रियान्वयन नहीं करती तब तक इस पर अंकुश लगाना मुश्किल है। कानून बनाए गए, लेकिन उसमें इतनी खामियां हैं कि है कि पीडि़ता को न्याय मिलने में बरसों लग जाते हैं। ऐसे दरिंदो के लिए सजा के लिए निश्चित समय सीमा तय होनी चाहिए।
-जितेन्द्र गोस्वामी, मध्यप्रदेश
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महिलाओं को सशक्त बनाएं
बलात्कार रोकने के लिए महीलाओं को और भी सशक्त बनाना होगा। आजकल हर घर में टीवी जरूर होता है। हम टीवी के माध्यम से बच्चियों और महिलाओं को सेल्फ डिफेंस जैसी छोटी मोटी चीजें सिखा सकते हैं। अपराधियों की सजा बढ़ाना और लोगों जागरूक करना, यही प्रमुख उपाय हैं।
-रिषिका पारीक, जयपुर
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सतर्क रहें महिलाएं
कठोर कानून एवं त्वरित न्याय के साथ-साथ महिलाओं को स्वयं की सुरक्षा का भी ध्यान रखनना आावश्यक है। अनजान और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों से दूरी के साथ ही स्वयं का आत्मविश्वास और चौकन्नापन ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगा सकता है। माता-पिता द्वारा अपने बच्चो को अच्छे संस्कार एवं महिलाओं का सम्मान करने की शिक्षा देनी आवश्यक है।
-अरविंद शर्मा, जयपुर
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जरूरी है संस्कार
छोटी उम्र में बच्चों को मोबाइल नहीं देना चाहिए, क्योंकि मोबाइन के जरिये बच्चे अश्लील सामग्री भी देख लेते हैं। इसका उन पर विपरीत असर होता है। बच्चों को संस्काारित करना चाहिए, ताकि बच्चे गलत राह पर नहीं जाएं।
-शान्तिलाल राजपुरोहित, डिंडोली सूरत
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अश्लील सामग्री पर हो प्रतिबंध
आज का दौर इंटरनेट का है। एक बटन दबाने पर दुनिया की जानकारी मिल जाती हैं। बहुत से लोग अश्लील वीडियो देखने व ऐसा साहित्य पढऩे लगे हैं। ऐसी सामग्री पर प्रतिबंध लगना चाहिए।
-साहिल आदित्य, छतरपुर, मप्र
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नैतिक शिक्षा पर बल दिया जाए।
यह सर्वविदित सत्य है कि कानून के भय से किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता और बलात्कार भी उन्हीं में से एक है। आवश्यकता इस बात है कि समाज में नागरिकों का नैतिक बल बढ़ाया जाए। राष्ट्र की युवा पीढ़ी को सहेजने के लिये विद्यालयों में नैतिक शिक्षा पर जोर दिया जाए।
-अरविन्द भाटिया, नोहर, हनुमानगढ़
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दोषियों को फांसी दी जाए
बलात्कार तब रुकेंगे जब बलात्कारियों को कठोर सजा मिलेगी। फास्ट ट्रैक कोर्ट हों, जहां निर्णय तय समय सीमा में आ जाए। तीन महीने के अंदर निर्णय हो जाए और अपराधियों को सजा मिले। अभी मामल सालों तक चलते हैं। बलात्कारियों के मन में खौफ नहीं रह गया है। लात्कारियों के लिए फांसी से कम सजा न हो और वह भी बीच चौराहे पर।
-पद्मजा शर्मा, जोधपुर
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भटक गए हैं युवा
बलात्कार के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि इन घटनाओं की मुख्य वजह लोगों में काननू और समाज का डर खत्म होना है। युवा रास्ता भटक रहे हैं। युवा नशा और अपराध की गिरफ्त में फंसते जा रहे हैं।
-हुलास राम साहू, नया रायपुर, छत्तीसगढ़
Updated on:
06 Oct 2020 05:57 pm
Published on:
06 Oct 2020 05:53 pm
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