
सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की समस्या कोई आज की नहीं है और किसी एक जगह की भी नहीं है। देशभर में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर मकान-दुकान खड़े करने के मामले सामने आते रहे हैं। सड़कों का जाल बिछाने, इन्हें चौड़ी करने तथा दूसरी सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन की जरूरत पड़ती रहती है। ऐसी जमीन पर कई लोग अतिक्रमण कर काबिज हुए दिखते हैं। हाउसिंग एंड लैंड राइट नेटवर्क नामक संगठन का यह खुलासा चौंकाने वाला है कि वर्ष २०१७ से २०2३ के बीच करीब साढ़े तीन लाख मकानों को तौडऩे की नौबत आई है। इससे भी बड़ी चिंता यह भी कि अभी करीब १.७ करोड़ लोगों के घर टूटने के दायरे में हैं। वजह अतिक्रमण हटाने व विकास परियोजनाओं के लिए जरूरत दोनों ही हैं।
विकास के लिए कई बार राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए विध्वंस की कार्रवाई जरूरी हो जाती है। इसके लिए सरकारों की समुचित पुनर्वास योजनाएं भी होती हैं। लेकिन बड़ा संकट साफ-सुथरी सरकारी जमीन पर भी अतिक्रमण कर हुए निर्माण कार्यों का है जिनमें अधिकांश में रहवास भी होने लगता है। बेघर होने से बड़ा दर्द कोई नहीं हो सकता। यह संकट सीधे तौर पर स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी प्रभावित करने वाला होता है। बच्चे पढ़ाई से वंचित होते हैं तो महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करने लगती हैं। ऐसे परिवारों का आर्थिक रूप से टूटना तो तय ही होता है। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कोई एक-दो दिन में नहीं होता। जाहिर है जब जिम्मेदार बेखबर होते हैं तो भू-माफिया की गिद्ध दृष्टि ऐसी जमीनों पर पड़ती है। कई बार गांव-कस्बों से पलायन करने वाले परिवार खाली जमीन पर पहले अस्थायी रूप से बसते हैं और ऐसी ही अनदेखी के चलते धीरे-धीरे वे अपना घर भी बना लेते हैं। जिम्मेदार तो तब ही हरकत में आते हैं जब या तो कोई हादसा होता है या फिर विकास कार्यों के दौर में इन्हें हटाने की जरूरत पड़ती है। महज सात साल में १६ लाख लोगों के बेघर होने का आंकड़ा छोटा नहीं है। इनमें भी ५८ फीसदी ज्यादा के बेघर होने की वजह अतिक्रमण ही है। सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामलों की मिलीभगत से अनदेखी होती है, यह भी किसी से छिपा नहीं है।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई मानना ही काफी नहीं। पहले अतिक्रमण कर बनाए घरों के निर्माण में हुआ खर्च और बाद में इन्हें हटाने की लागत को भी जोड़ें तो यह नुकसान देश का ही है। किसी सरकारी प्रोजेक्ट की घोषणा तथा उसे क्रियान्वित करने के बीच लंबा अंतराल भी अतिक्रमण की समस्या को बढ़ाता है। जरूरत ऐसी नीति बनाने की है जिसमें अतिक्रमण रोकने की शुरू से ही व्यवस्था हो। सरकारी सिस्टम में जो अतिक्रमण को बढ़ावा देने वाले हों उन पर भी सख्ती की जरूरत है, तब जाकर ही लोग बड़ी संख्या में बेघर होने से बचेंगे।
Published on:
06 Jan 2026 04:20 pm
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