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धमकियों से क्या?

अमरीका सिर्फ फटकार लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करना चाहता है। उसकी यही कमजोरी पाकिस्तान सरीखे देशों को ताकत दे रही है।
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Sunil Sharma

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Updated: 28 Oct 2017, 3:23 PM IST

hafiz saeed

hafiz saeed

और कोई समझे या नहीं लेकिन भारत और यहां की जनता अमरीकी चालों को अच्छी तरह से समझ गई हैं। अमरीकी विदेशमंत्री रेक्स टिलरसन ने पाकिस्तान को आतंकवाद खत्म करने की चेतावनी दी है। साथ ही फटकार भी लगाई है। इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति भी पाकिस्तान को फटकार लगा चुके हैं। आर्थिक सहायता बंद करने के साथ-साथ हथियार आपूर्ति पर रोक लगाने की धमकी भी दे चुके हैं। अमरीकी धमकियों और फटकार का नतीजा क्या निकला, दुनिया से छिपा नहीं है।

लगता है कि दुनिया को दिखाने के लिए अमरीका पाकिस्तान ही नहीं उस जैसे दूसरे देशों को भी रह-रहकर धमकी देता रहता है। खास बात ये कि पाकिस्तान अमरीका की ऐसी धमकियों को सार्वजनिक रूप से नजरअंदाज करने का साहस दिखाने लगा है। जब तक पाकिस्तान को अमरीकी मदद और सहारे की जरूरत थी तब-तब वह उसकी हां में हां मिलाता रहा। अमरीका को समझना होगा कि अब चीन उसकी जगह ले चुका है। उससे अधिक पाकिस्तान की मदद कर रहा है। ताकि अमरीका के साथ भारत को भी साध सके। अमरीका आतंकवाद के सफाए का सबसे बड़ा पैरोकार बना हुआ है।

दूसरी तरफ आतंककारियों को पनाह देने के मामले में पाकिस्तान पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। अमरीका सिर्फ फटकार लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करना चाहता है। उसकी यही कमजोरी पाकिस्तान सरीखे देशों को ताकत दे रही है। आतंकवाद ऐसा मुद्दा नहीं जिस पर साल में चार बार धमकी देकर समझौता कर लिया जाए। आतंकवाद को जड़ से मिटाना है तो पाकिस्तान जैसे देशों को धमकी देने की बजाए उस पर सीधी कार्रवाई होनी चाहिए। आर्थिक सहायता भी रोकी जानी चाहिए, प्रतिबंध भी लगाने चाहिए और जरूरी हो तो सैन्य कार्रवाई भी की जा सकती है।

दुनिया आज जिस मुहाने पर खड़ी है वहां अशांति के अलावा कुछ नजर नहीं आ रहा। कभी यहां धमाके तो कभी वहां विस्फोट। इन्हें रोकने के लिए सभी देशों को एक मंच पर आकर आतंककारियों और उनको पनाह देने वालों के खिलाफ मोर्चा खोलना होगा। यह मुहिम एक बार शुरू हो गई तो पाकिस्तान भी समझ जाएगा और उस जैसे अन्य देश भी। धमकियों का समय बहुत पहले निकल चुका है। समय अब सीधी कार्रवाई का है।