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पुरातन और विज्ञान: सूर्य रथ का एक चक्रीय होना

विश्व की चर तथा अचर वस्तुओं की आत्मा सूर्य ही है। करीब पचास करोड़ वर्ष पहले अस्तित्व में आए सूर्य की प्राणदायिनी ऊर्जा की रहस्मयी शक्ति को भारतीय ऋषियों ने छह हजार साल पहले ही समझ लिया था।

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प्रमोद भार्गव:लेखक एवं साहित्यकार, मिथकों को वैज्ञानिक नजरिए से देखने में दक्षता

प्रमोद भार्गव:लेखक एवं साहित्यकार, मिथकों को वैज्ञानिक नजरिए से देखने में दक्षता

प्रमोद भार्गव (लेखक एवं साहित्यकार, मिथकों को वैज्ञानिक नजरिए से देखने में दक्षता)

आमतौर से सूर्य को प्रकाश और गर्मी का अक्षुण्ण स्रोत माना जाता है। परंतु जब सूर्य दक्षिणायन रहते हैं, तब मौसम ठंडा रहता है और जब मकर संक्रांति के दिन से सूर्य उत्तरायण होने लगते हैं, यानी उत्तर की ओर गमन करने लगते हैं, तो ठंड कम होने लगती है और दिन बड़े होने लगते हैं। इस स्थिति के निर्माण का कारक पुराणों में सूर्य के रथ को एक पहिए का होने के मिथक से जुड़ा है। अब वैज्ञानिक भी मान रहे हैं कि यदि सूर्य की गति में ठहराव आ जाए तो पृथ्वी पर विचरण करने वाले सभी जीव-जंतु तीन दिन के भीतर मर जाएंगे। करीब पचास करोड़ वर्ष पहले अस्तित्व में आए सूर्य की प्राणदायिनी ऊर्जा की रहस्मयी शक्ति को भारतीय ऋषियों ने छह हजार साल पहले ही समझ लिया था। अतएव वे ऋग्वेद में लिख गए थे, 'आप्रा द्यावा पृथिवी अंतरिक्ष: सूर्य आत्मा जगतस्थश्च।' अर्थात विश्व की चर तथा अचर वस्तुओं की आत्मा सूर्य ही है।

सूर्य के एक चक्रीय रथ में अश्वों को नियंत्रित करने में जो वल्गाएं सौर-रश्मियां परिलक्षित होती हैं, वही सात प्रकार की किरणें हैं। अब विज्ञान ने इन सात किरणों के अस्तित्व को मान लिया है और इनके पृथक-पृथक महत्त्व को समझने में लगा है। अब तक के शोधों से ज्ञात हुआ है कि सूर्य किरणों के अदृश्य हिस्से में अवरक्त और पराबैंगनी किरणें होती हैं। भूमंडल को गर्म रखने और जैव-रासायनिक क्रियाओं को तेज बनाए रखने का काम अवरक्त किरणें और जीवधारियों के शरीर में रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता बढ़ाने का काम पैराबैंगनी किरणें करती हैं। हालांकि पैराबैंगनी-सी किरणें अत्यंत घातक होती हैं। इस घातक विकिरण से बचने के लिए ही उगते सूर्य की ओर मुख करके तांबे के पात्र में भरे जल से मकर संक्रांति के दिन सूर्य को अघ्र्य देने का विशेष विधान है। ओजोन परत भी इन किरणों को अवरुद्ध करती हैं। कुल मिलाकर सूर्य रथ का एक चक्रीय होना गतिशील बने रहने का द्योतक है।