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आत्म-दर्शन : प्रेम का अर्थ

प्रेम निस्संदेह खुद को मिटाने वाला है और यही इसका सबसे खूबसूरत पहलू भी है।

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सद्गुरु जग्गी वासुदेव

सद्गुरु जग्गी वासुदेव

सद्गुरु जग्गी वासुदेव (ईशा फाउंडेशन के संस्थापक)

बुनियादी तौर पर प्रेम का मतलब है कि कोई और आपसे कहीं ज्यादा अहम हो चुका है। जैसे ही आप किसी से कहते हैं, 'मैं तुमसे प्रेम करता हूं', तो आपको खुद का कुछ हिस्सा छोडऩा पड़ेगा, नहीं तो आप प्रेम नहीं कर सकते। प्रेम कोई सुख नहीं है। यह तो खुद को खो देने का एक तरीका है। आप जितना ज्यादा प्रेम करेंगे, आपका अहम् उतना ही ज्यादा गिरेगा। आपके अंदर का वह हिस्सा, जो अभी तक 'मैं' था, उसे मिटना होगा, जिससे कि कोई और चीज या इंसान उसकी जगह ले सके। अगर आप ऐसा नहीं होने देते, तो यह प्रेम नहीं है, बस हिसाब-किताब है, लेन-देन है।

अगर आप प्रेम के जरिए अपने साथी से सुख और खुशी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, तो यह दोनों के लिए बड़ी समस्या बन सकती है। सच्चे प्रेम में आप अपना व्यक्तित्व, अपनी पसंद-नापसंद, अपना सब कुछ समर्पित करने के लिए तैयार होते हैं। यह एक शानदार आध्यात्मिक प्रक्रिया है। प्रेम निस्संदेह खुद को मिटाने वाला है और यही इसका सबसे खूबसूरत पहलू भी है।