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बड़ा सवाल, संयुक्त राष्ट्र को कैसे मजबूत बनाया जा सकता है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था, पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं...

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सुरक्षा परिषद का विस्तार जरूरी
सयुंक्त राष्ट्र की स्थापना उस वैश्विक परिदृश्य में हुई थी, जब दुनिया को विश्व युद्ध झेलने पड़े थे। स्थापना के समय मात्र 51 सदस्य देश थे, जिनमें से 5 को वीटो पावर दी गई। अगर अनुपरिक दृष्टि से देखें तो 10 प्रतिशत देशों को वीटो पावर था। वर्तमान में इसके सदस्यों की संख्या 19० से ज्यादा है और अब भी वीटो पावर पांच देशों के पास ही है। संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख अंग है सुरक्षा परिषद, जो विश्व में शांति व्यवस्था बनाए रखने में मदद करती है। इसलिए सुरक्षा परिषद का विस्तार आवश्यक है। विश्व के अन्य प्रमुख बड़े देशों जैसे भारत, ब्राजील, जर्मनी, जापान, दक्षिणी अफ्रीका को सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता दी जाए। साथ ही संयुक्त राष्ट्र को शक्तिशाली बनाने के लिए महासभा को भी व्यापक शक्तियां दी जाए, क्योंकि महासभा विश्व संसद की भूमिका में है। अगर सुरक्षा परिषद के किसी सदस्य द्वारा अनावश्यक वीटो का प्रयोग किया जाता है, तो उसे महासभा के तीन चौथाई बहुमत से रोकने का प्रावधान हो। इस प्रकार सुरक्षा परिषद का विस्तार कर हम इसे सशक्त बना सकते हैं।
-राजकुमार बवेजा, हनुमानगढ़
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बहुमत से हो निर्णय
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व में शांति स्थापित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की गई। यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य था कि अब किसी भी प्रकार का कोई युद्ध ना हो। मुश्किल यह है कि जिन विश्व की पांच बड़ी शक्तियों के पास वीटो विशेषाधिकार है, उनकी ही मनमानी चलती है। आज के परिवेश में संयुक्त राष्ट्र का महत्व घटता जा रहा है। इसका मूल कारण यह है कि जिस उद्देश्य से इसकी स्थापना की गई थी, उससे वह दिग्भ्रमित होता नजर आ रहा। आर्थिक स्थिति भी कमजोर है। उसे शक्ति संपन्न राष्ट्रों पर निर्भर होना पडता है। विश्व में तब तक शांति स्थापित नहीं हो सकती, जब तक वीटो विशेषाधिकार पांच देशों के पास है। जब तक बहुमत आधारित निर्णयों को मान्य नही किया जाता, तब तक अधिकतर देश उदासीन बने रहेंगे।
-विद्याशंकरपाठक, सरोदा, डूंगरपुर
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संयुक्त राष्ट्र का पुनर्गठन आवश्यक है
संयुक्त राष्ट्र विश्व में शांति व सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संस्था है। आज के बदलते वैश्विक परिवेश में संयुक्त राष्ट्र का भी पुनर्गठन किया जाना अति आवश्यक है। इसके लिए संघ के सभी अंगों में बदलाव व पुनर्गठन की जरूरत है। विशेष रूप से सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्य देशों में बदलाव होना चाहिए, जिससे कि चीन जैसे देश अपने वीटो पावर का दुरूपयोग अपने निजी स्वार्थ पूर्ण हितों के लिए नहीं कर सकें। अगर समय के अनुसार इसमें बदलाव नहीं किया जाता है, तो इसकी प्रासंगिकता एवं उपयोगित समाप्त हो जाएगी, क्योंकि इसकी स्थापना से अब तक विश्व में बहुत बदलाव हो चुका है ।
-श्याम सुन्दर कुमावत, किशनगढ़, अजमेर
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सुरक्षा परिषद का ढांचा उचित नहीं
संयुक्त राष्ट्र में सुधार का एक बड़ा मामला सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यों की संख्या से जुड़ा हुआ है। शक्ति तथा लोकतांत्रिक दृष्टि से भी संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद का ढांचा उचित नहीं जान पड़ता। इसमें भारत और जापान जैसी बड़ी शक्तियां शामिल नहीं हैं। साथ ही, विश्व के दूसरे सर्वाधिक जनसंख्या होने वाले देश तथा विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत को स्थान नहीं दिया गया है। अत: सुरक्षा परिषद में सदस्यों की संख्या को लोकतांत्रिक बनाए जाने की आवश्यकता है। इसकी वित्तीय व्यवस्था को भी लोकतांत्रिक बनाने की आवश्यकता है। संयुक्त राष्ट्र के स्थाई सुरक्षा सदस्य के रूप में भारत जैसे शांतिप्रिय और शक्ति संपन्न देश के चयन से इसके लोकतांत्रिक मूल्यों में वृद्धि होगी और संपूर्ण विश्व में आपसी सद्भाव तथा शांति को बढ़ावा मिलेगा।
डॉ. अजिता शर्मा, उदयपुर
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भारत को स्थाई सदस्य बनाया जाए
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विश्व में शांति और सुरक्षा स्थापित करने के लिए संयक्त राष्ट्र का जन्म हुआ था। तब से ये संस्था अपना काम बखूबी कर रही है। सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यों की संख्या पांच ही बनी हुई है, जो वर्तमान में उचित नहीं है। चीन भी सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य है, जो अपने वीटो पावर का भारत के खिलाफ प्रयोग करता है। अगर स्थाई सदस्यों की संख्या में बढ़ोतरी कर दी जाए, तो संयुक्त राष्ट्र को मजबूत बनाया जा सकता है। हमारा देश भारत महासभा का स्थाई सदस्य बनने का प्रबल दावेदार है।
-कुशल सिंह राठौड़, कुड़ी भगतासनी, जोधपुर
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विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाए
संयुक्त राष्ट्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए उसके प्रमुख निकाय जैसे सुरक्षा परिषद आदि में विकासशील या उभरती अर्थव्यवस्थाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व किया जाना चाहिए। सुरक्षा परिषद का भी विस्तार किया जाना चाहिए। पश्चिमी देशों के प्रभुत्व को कम करके संपूर्ण विश्व के देशों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। अत: इसे और अधिक लोकतांत्रिक बनाए जाने की आवश्यकता है। इस प्रकार का प्रावधान भी किया जाना चाहिए कि इसके फैसले सभी देश स्वीकार करें।
-नरेन्द्र सहू, तारानगर, चूरू
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वीटो का अधिकार खत्म किया जाए
संयुक्त राष्ट्र एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका उद्देश्य विश्व में मानव अधिकारों को सुरक्षित करते हुए अन्तरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, सामाजिक विकास, विश्व शांति को बढ़ावा देना है। संयुक्त राष्ट्र की संरचना तथा गतिविधि को मजबूत बनाने के लिए इसमें सुधार की आवश्यकता है। सम्पूर्ण विश्व में लोकतांत्रिक प्रवृत्ति में वृद्धि हुई है, किन्तु सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्यों को वीटो अधिकार दिया जाना लोकतान्त्रिक मूल्यों के विरूद्ध है। संयुक्त राष्ट्र अधिक वित्त सहायता के कारण अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश पर आश्रित है। इसकी वित्तीय व्यवस्था को भी लोकतांत्रिक बनाने की आवश्यकता है। संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में भी बदलाव की आवश्यकता है। वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सदस्यों में अफ्रीका तथा दक्षिणी अमेरिका के राष्ट्रों की संख्या अत्यधिक है ,किन्तु इन क्षेत्रों से एक भी प्रतिनिधि सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्यों में शामिल नहीं है। सुरक्षा परिषद में भारत और जापान जैसी बड़ी शक्तियां भी शामिल नहीं है। विश्व का दूसरा सर्वाधिक जनसंख्या वाला तथा सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के बाद भी भारत को सुरक्षा परिषद में स्थान नहीं दिया गया है। सुरक्षा परिषद को लोकतांत्रिक बनाए जाने की आवश्यकता है जिससे संयुक्त राष्ट्र को और मजबूती मिलेगी।
-करण मेहरा, तेलपुर, सिरोही
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पक्षपात को दूर करना होगा
संयुक्त राष्ट्र भले ही कई देशों का एक संघ है, परन्तु वह अमरीका के इशारों पर ही नाचता है। यह संगठन अमरीका की कठपुतली बन गया है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र की मजबूती के लिए भारत जैसे देश अपनी पकड़ मजबूत करें और अमेरिका की चौधराहट खत्म की जाए।
-रामेश्वर आमेटा, कारोलिया राजसमन्द
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सभी देशों की सक्रियता जरूरी
वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र को मजबूत एवं सशक्त बनाने के लिए सभी देशों को सक्रिय होने की जरूरत है। विश्व शांति के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। इसके लिए मजबूत संयुक्त राष्ट्र की जरूरत है।
-महेश आचार्य, नागौर
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विश्वास की भावना जरूरी
संयुक्त राष्ट्र को मजबूत बनाना होगा। सभी देशों में इसके प्रति विश्वास की भावना मजबूत करनी होगी। चीन जैसे साम्राज्यवादी देश के ऊपर लगाम लगानी होगी। साथ-साथ जिन देशों में सीमा विवाद की स्थिति है, उसका निष्पक्ष रहकर निपटारा करे।
-विकास चौहान, पल्लू, बीकानेर
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लोकतांत्रिक ढांचा नहीं
संयुक्त राष्ट्र के कुछ प्रावधान लोकतांत्रिक ढांचे के विरुद्ध भी हैं। वर्तमान समय में संयुक्त राष्ट्र में विकासशील देशों की संख्या ज्यादा है। भारत, जर्मनी, ब्राजील और जापान जैसे देश राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य बनने के हकदार हैं।
-रूप सिंह सोलंकी, हावेरी
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सुधार अपेक्षित
वर्र्षों से संयुक्त राष्ट्र में ढांचागत सुधार के माध्यम से इसे मजबूती प्रदान करने की मांग उठ रही है, लेकिन कुछ वीटो शक्ति का दुरुपयोग कर सुधारों के मार्ग में बाधा बन रहे हैं। विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र, जिम्मेदार नाभिकीय शक्ति तथा आतंकवाद व जलवायु परिवर्तन से निपटने में अग्रणी राष्ट्र भारत को जब तब यूएनओ में अपेक्षित स्थान नहीं मिलेगा, तब तक संयुक्त राष्ट्र की मजबूती की बात करना ही अव्यावहारिक है।
-विशनाराम माली, मोकलपुर
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सभी देशों की आवाज सुनी जाए
आज दुनिया में कई नई चुनोतियां हंै। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में बदलाव की आवश्यकता है। संस्था और देशों में भरोसे की कमी है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र को आगे आना पड़ेगा। नए देशों को मौका देना होगा। आज के वक्त की जरूरत है हर देश की आवाज सुनने की, तभी संयुक्त राष्ट्र मजबूत बनेगा।
-गोपाल अरोड़ा, जोधपुर
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समय के हिसाब से बदलाव आवश्यक
संयुक्त राष्ट्र के मुख्य उद्देश्य हैं युद्ध रोकना, मानव अधिकारों की रक्षा करना, सामाजिक और आर्थिक विकास, जीवन स्तर सुधारना और बीमारियों से मुक्ति के लिए प्रयास । संयुक्त राष्ट्र को मजबूत बनाना आवश्यक है। इसके लिए इसमें समय के हिसाब से उचित बदलाव आवश्यक है।
-सौरभ राठी, हनुमानगढ़
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भारत का प्रभाव बढ़े
संयुक्त राष्ट्र में आमूल-चूल परिवर्तन करने की आवश्यकता है। सुरक्षा परिषद में केवल 5 देशों को ही स्थाई सदस्यता में मिली हुई है। भारत जनसंख्या की दृष्टि से पूरे विश्व में दूसरे स्थान पर है। विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। ऐसे में भारत जैसे विकासशील देश की कैसे उपेक्षा की जा सकती है? यूएन को अधिक प्रभावशाली बनाना है, तो उसमें भारत जैसे विकासशील देशों का प्रभाव बढ़ाना होगा।
-आशुतोष शर्मा, विद्याधर नगर जयपुर
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किसी के दबाव में न आए
आज आवश्यकता है कि संयुक्त राष्ट्र अपनी योग्यता और क्षमता के आधार पर विभिन्न मुद्दों पर कठोर निर्णय ले तथा किसी भी देश के दबाव में ना आकर संपूर्ण संसार का हित देखते हुए योग्य देशों को सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनाए। इसी के साथ सदस्य देशों के लिए यह आवश्यक है कि वह इसके निर्णयों को मानें।
-रचित वर्मा, भवानीमंडी, झालावाड़
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इसलिए बदलाव जरूरी है
संयुक्त राष्ट्र की अवधारणा विश्व में शांति और स्थिरता के उद्देश्य से की गई थी और इसी एक बड़े मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र अपनी चुनौती पर खरा नहीं उतर पाया है। आतंकवाद से लड़ाई में संयुक्त राष्ट्र का बड़ा सहयोग नहीं है। जलवायु परिवर्तन के बड़े मुद्दे संयुक्त राष्ट्र से बाहर हल करने की कोशिश हो रही है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में बदलाव आवश्यक है।
-सूर्य प्रकाश गौड़, अंता
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उद्देश्यों और सिद्धांतों में आस्था
सदस्य राष्ट्रों को संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों और सिद्धांतों का पुरजोर समर्थन करना चाहिए। प्रत्येक सदस्य राष्ट्र को विकास एवं गरीबी उन्मूलन, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, निशस्त्रीकरण, मानवाधिकार एवं शांति स्थापना में संयुक्त राष्ट्र का सहयोग करना चाहिए। किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद का निपटारा निष्पक्षता से करना चाहिए। सदस्य राष्ट्रों को पक्षपातपूर्ण बयानों से बचना चाहिए, क्योंकि इससे गुटबाजी को बल मिलता है।
-अशोक कुमार शर्मा, झोटवाड़ा, जयपुर
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जरूरी हैं सुधार
संयुक्त राष्ट्र में 21 वीं सदी के अनुरूप सुधार आवश्यक हैं। इसमें सबसे ज्यादा जरूरत सुरक्षा परिषद् में सुधार की है। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र और तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाले भारत को सुरक्षा परिषद् का स्थाई सदस्य बनाया जाना चाहिए ।
-लक्ष्मण डोबवाल, चतरपुरा, उनियारा, टोंक