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Patrika Opinion: इजरायल-हमास संघर्ष को रोकने की चुनौती

इजरायल और हमास के बीच करीब एक पखवाड़े से चल रहा संघर्ष क्या इजरायल-फिलिस्तीन तक सिमटकर रह जाएगा? या फिर इसमें लेबनान भी शामिल होगा? चिंता इससे आगे के समीकरणों को लेकर भी है।

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Nitin Kumar

Oct 23, 2023

Patrika Opinion: इजरायल-हमास संघर्ष को रोकने की चुनौती

Patrika Opinion: इजरायल-हमास संघर्ष को रोकने की चुनौती

इजरायल और हमास के बीच चल रहा भीषण संघर्ष चिंताजनक है। इजरायल गाजा को निशाना बना रहा है। हमलों में बड़ी संख्या में हो रही मौतें चिंताजनक हैं। सवाल यह है कि हमास के एक गलत फैसले से भडक़ी चिंगारी हमें किधर लेकर जा रही है? इजरायल और हमास के बीच करीब एक पखवाड़े से चल रहा संघर्ष क्या इजरायल-फिलिस्तीन तक सिमटकर रह जाएगा? या फिर इसमें लेबनान भी शामिल होगा? चिंता इससे आगे के समीकरणों को लेकर भी है।

बड़ी चिंता यह है कि क्या इसमें ईरान भी प्रत्यक्ष रूप से शामिल हो जाएगा? युद्ध इजरायल-फिलिस्तीन और लेबनान तक सीमित रहा तो शायद शेष दुनिया के लिए खतरा बड़ा न हो, लेकिन यदि ईरान इसमें शामिल हुआ तो हालात विकट हो सकते हैं। क्या हम तीसरे विश्व युद्ध की तरफ बढ़ रहे हैं? क्योंकि अमरीका और इसके सहयोगी देश पूरी ताकत के साथ इजरायल के साथ खड़े हैं। वे इजरायल को आर्थिक मदद भी दे रहे हैं और सैन्य साजोसामान भी। ईरान, हमास और हिजबुल्ला के पक्ष में सीधे उतरा तो इजरायल की तरफ से अमरीका के मैदान में उतरने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर ऐसी स्थिति बनी तो इस युद्ध की लपटें कहां तक जाएंगी, कोई अनुमान भी नहीं लगा सकता।

इजरायल हमास के खात्मे के लिए दृढ़ संकल्पित नजर आ रहा है। एक पखवाड़े में दोनों तरफ से छह हजार लोगों से अधिक लोगों की मौत हो गई है और पंद्रह हजार से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। यह आंकड़ा डराने वाला है।
युद्ध ने व्यापक रूप ले लिया तो इसके दुष्परिणामों की कल्पना करना आसान नहीं होगा। दोनों तरफ से मरने वालों का आंकड़ा तो सिक्के का एक पहलू है। लेकिन, दूसरा पहलू भी कम डरावना नहीं रहने वाला। तीन साल पहले आई कोरोना महामारी दुनिया को गहरे घाव दे चुकी है। वह घाव पूरी तरह से भरा नहीं, इस बीच एक नई मुसीबत दुनिया के दरवाजे पर दस्तक देने लगी है। युद्ध ने विकराल रूप ले लिया तो उसका प्रभाव उन देशों पर भी पड़ेगा जो सीधे तौर पर इसमें शामिल नहीं हैं। तब आर्थिक मंदी की आहट निश्चित है। दुर्भाग्य की बात यह है कि जिस संयुक्त राष्ट्र पर विश्व में शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी है, वह अपनी भूमिका नहीं निभा रहा। यही वजह है कि न तो रूस-यूक्रेन युद्ध थम रहा है और न ही इजरायल-हमास के बीच चल रहा संघर्ष। बेहतर तो यह है कि दुनिया के किसी भी कोने में इस तरह के हालात ही पैदा न हों। यदि कहीं विवाद पैदा होता भी है, तो इनका हल बातचीत से ही निकाला जाना चाहिए, मिसाइलों से नहीं।