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आपकी बात, क्या वैचारिक आधार पर भी एनसीईआरटी की पुस्तकों में बदलाव किया जाता है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

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Patrika Desk

Apr 09, 2023

आपकी बात, क्या वैचारिक आधार पर भी एनसीईआरटी की पुस्तकों में बदलाव किया जाता है?

आपकी बात, क्या वैचारिक आधार पर भी एनसीईआरटी की पुस्तकों में बदलाव किया जाता है?

इतिहास के तथ्यों के साथ न हो छेड़छाड़
एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने के लिए समिति का चयन शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया जाता है। अत: संभव है कि जिस विचारधारा से प्रभावित मौजूदा सरकार होगी वैसी ही विचारधारा के लोगों का पाठ्यक्रम निर्माण समिति में चयन किया जाएगा। पाठ्यपुस्तकों पर किसी एक विचारधारा का प्रभाव देश के भविष्य व भावी पीढ़ी के लिए अत्यंत घातक सिद्ध होगा, क्योंकि जैसी पठन सामग्री पाठ्यपुस्तकों में पढ़ाई जाएगी वैसी ही पीढ़ी तैयार होगी। पाठ्यपुस्तकों में इतिहास के तथ्यों के साथ कोई छेडख़ानी नहीं होनी चाहिए।
-अनिल कुमार सामरिया, सूरजगढ़, झुंझुनूं
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वैचारिक आधार पर न हो बदलाव
निश्चित रूप से शिक्षा को व्यक्ति और समाज के सर्वांगीण विकास के लिए महत्त्वपूर्ण औजार माना गया है। इसलिए शिक्षा और पाठ्यपुस्तकों में समय-समय पर तार्किक बदलाव किए जाने आवश्यक हो जाते हैं, परंतु यह ध्यान रखा जाए कि एनसीईआरटी पुस्तकों में बदलाव भेदभाव पूर्ण एवं धार्मिक-वैचारिक आधार पर नहीं होना चाहिए, ताकि देश में सामाजिक सौहार्द एवं भाईचारा कायम रह सके।
-महेश आचार्य, नागौर
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तार्किक आधार पर हो बदलाव
आज का समय तथ्य एवं तार्किक आधार पर अपनी बात रखने का है। सच को आंच नहीं की तर्ज पर आज का युवा तथ्य जानना चाहता है जिसका कोई सटीक अर्थ भी हो। अगर यह करने के लिए एनसीईआरटी में बदलाव किए जा रहे हैं, तो कोई बात नहीं।
-चांदनी श्रीवास्तव, दुर्ग, छत्तीसगढ़
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विद्यार्थियों पर असर
वैचारिक आधार पर एनसीईआरटी की पुस्तकों में बदलाव किया गया है। इसका खमियाजा विद्यार्थियों को पीढ़ी को उठाना पड़ेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थी भी इससे प्रभावित होंगे।
-सुरेंद्र बिंदल, जयपुर
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सुझाव के आधार पर होते हैं बदलाव
एनसीईआरटी की नई किताबें जब बनकर स्कूलों में जाती हैं तो बहुत से बच्चों, परिजनों और शिक्षकों के भी सुझाव आते हैं। इन्हें ध्यान में रखकर ही पाठ्य पुस्तकों में बदलाव किए जाते हैं। इन बदलावों के बारे में एनसीईआरटी के विशेषज्ञ चर्चा करते हैं।
-अतुल वशिष्ठ, जयपुर
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एक ही विचारधारा न हो
पुस्तकों में वैचारिक आधार पर बदलाव करने से न केवल शिक्षक एवं छात्र अपितु आने वाली पीढ़ी पर भी असर देखने को मिलता है। भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। पाठ्य पुस्तकों में भी यह भावना नजर आनी चाहिए। इसमें सिर्फ एक ही विचारधारा नहीं होनी चाहिए।
-अंशु राठौड़, बीकानेर
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न हो अनावश्यक प्रयोग
एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों में बदलाव विचार विशेषज्ञों से विचार-विमर्श के बाद ही किए जाने चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में अनावश्यक प्रयोग नहीं होने चाहिए।
-गिरीश ठक्कर, राजनांदगांव