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चीन मलक्का जलडमरूमध्य पर दुविधा में

चीन के तत्कालीन राष्ट्रपति हू जिन्ताओ ने पहली बार 2003 में मल्लका जलसंधि को 'मलक्का दुविधा' के रूप में वर्णित किया था। चीन को भय है कि कुछ शक्तियां-जैसे अमरीका इस तंग, लेकिन महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग को अवरुद्ध करने के लिए अपने प्रभुत्व का इस्तेमाल कर सकती हंै। चीन मध्यपूर्व से तेल, अफ्रीका, लेटिन अमरीका, मध्य एशिया और रूस से अधिक ऊर्जा के लिए इसी मार्ग पर निर्भर है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि चीन अगले तीस-चालीस वर्षों तक तेल और गैस के लिए मध्यपूर्व पर अत्यधिक निर्भर रहेगा।

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Patrika Desk

Aug 30, 2022

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हिन्द महासागर पृथ्वी का तीसरा सबसे बड़ा महासागर है। पृथ्वी की सतह पर मौजूद पानी का लगभग 20 फीसदी भाग इसमें समाहित है। हिन्द महासागर क्षेत्र (आइओआर) में नौ बड़े रणनीतिक मार्ग हैं, जहां से दूसरे समुद्री क्षेत्र में जाने के लिए मार्ग मिलता है। आइओआर अटलांटिक और प्रशान्त महासागर को भी जोड़ता है। वैश्विक समुद्री व्यापार में हिन्द महासागर का महत्त्वपूर्ण स्थान है। सभी समुद्री जहाजों को यहीं से पारगमन करना होता है। सबसे प्रमुख समुद्री चौकियों में फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोडऩे वाला होर्मुज रास्ता, लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोडऩे वाला बाब-अल-मंडेब रास्ता और मलक्का जलडमरूमध्य है, जो हिन्द महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ता है। मलक्का जलसंधि की लम्बाई 930 किलोमीटर है, जो उत्तर में मलेशिया और दक्षिण में इंडोनेशियाई द्वीप को जोड़ती है। यहां पानी अधिक गहरा नहीं है। इसकी बनावट शीर्ष पर चौड़ी और नीचे की ओर संकीर्ण है। दक्षिण में इसकी चौड़ाई केवल 65 किलोमीटर है, जबकि उत्तर की ओर 250 किलोमीटर तक फैली है। दुनिया को जोडऩे वाले सबसे महत्त्वपूर्ण शिपिंग रास्तों में से यह एक है।