
pakistan china relationship
तूडाल-डाल, हम पात-पात। पाकिस्तान पर ट्रंप ने आंखें क्या टेढ़ी कीं, उसका हमदर्द चीन बचाव में आ खड़ा हुआ। चीन की शह पर ही ट्रंप के ट्वीट पर पाकिस्तान ने अकडक़र रीट्वीट किया था कि अमरीका को जल्द ही जवाब मिलेगा। नववर्ष २०१८ के पहले दिन ही अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया था कि हम पाकिस्तान को पिछले १५ सालों में दो लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की मदद दे चुके हैं और बदले में हमें सिर्फ झूठ व धोखे के अलावा कुछ नहीं मिला।
ट्रंप ने भविष्य में दी जाने वाली २५५ मिलियन डॉलर की सैन्य मदद पर भी रोक लगाने की घोषणा की। इसके एक दिन बाद ही चीन का विदेश मंत्रालय मदद के लिए आया और कहा कि आतंकवाद से लडऩे में पाक ने बेहतरीन काम किया है। विश्व समुदाय को उसका समर्थन व सहयोग करना चाहिए। जहां एक ओर अमरीका पाक को खुलकर आतंकवाद समर्थक बता रहा है, वहीं चीन का यह कहना, आतंक के खिलाफ पाकिस्तान मजबूती से लड़ रहा है, साफ संकेत देता है कि ‘ड्रैगन’ कमजोर पड़ रहे पाकिस्तान को अपने शिकंजे में पूरी तरह कसना चाहता है।
अमरीकी मदद बंद होने के बाद इस्लामाबाद के पास चीन के आगे घुटने टेकने के सिवा कोई चारा नहीं रह जाएगा। चीन तो एशिया में सैन्य और आर्थिक प्रभुत्व के लिए तो चाहता भी यही था कि पाकिस्तान अमरीका का पिछल्लगू नहीं रहे। भारत और अमरीका के सुधरते रिश्तों के बाद यह लगने भी लगा था कि अब पाक का झुकाव चीन की ओर होने लगेगा लेकिन इस गठजोड़ से ना सिर्फ पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में अशान्ति बढ़ेगी, चीन की मदद से पाकिस्तान कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देकर भारत पर दबाव बना सकता है। साथ ही बांग्लादेश, नेपाल को भी आर्थिक कॉरिडोर से जोडक़र हमारे खिलाफ कर सकता है।
डोकलाम में भूटान के मोर्चे पर पहले ही टकराव के हालात हैं। चीन जैश व जमात उद दावा जैसे आतंकी गुटों के सरगना हाफिज सईद के राजनीति में आने का समर्थन कर चुका है। कुल मिलाकर नए साल के इस घटनाक्रम ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। हमें पाकिस्तान के खिलाफ विश्व समुदाय का समर्थन हासिल करना होगा साथ ही चीन के हथकंडों का तोड़ भी ढूंढऩा होगा। वरना चीन का साथ पाकिस्तान को हमारे खिलाफ और विषैला बना देगा।

बड़ी खबरें
View Allओपिनियन
ट्रेंडिंग
